टाटा संस की अर्जी रिजर्व बैंक ने की खारिज, अब शेयर बाजार में दस्तक देने के अलावा नहीं बचा कोई रास्ताबेंगलुरु की लापता छात्रा को खोजने में मददगार बना सरकारी योजना का ओटीपी, सहेली की तलाश में जुटी सीआईडीबाढ़ प्रभावित नेपाल के लिए मसीहा बनी अंबाला की मेडिकल टीम, मुफ्त इलाज पाकर भावुक हुए पीड़ितवृषभ राशिफल 13 सितंबर: इस एक आदत से आज चमकेगा भाग्य, जानें अपना पूरा दैनिक भविष्यफलरसोई की काली और चिकनी छन्नी को चमकाने के 4 आसान घरेलू नुस्खे, ऐसे करें साफपश्चिम बंगाल में असली तृणमूल कांग्रेस पर संग्राम, ऋतब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग के सामने 'जोड़ाफूल' चुनाव चिह्न पर जताया दावाकॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने जताई गहरी चिंता, गणित के क्षेत्र में एआई की तेज तरक्की से वैज्ञानिक सहमेदिल्ली में अफगानिस्तान के खिलाफ इतिहास रच सकते हैं वैभव सूर्यवंशी, वीरेंद्र सहवाग का यह बड़ा रिकॉर्ड निशाने परमूलांक 8 के जातक: शनि की कृपा से जीवन में अपार सफलता पाने वाले लोगों के छिपे हुए गुणग्रैंड थेफ्ट ऑटो VI की रिलीज से पहले क्यों भड़क उठा है दक्षिणपंथी धड़ा? जानें सोशल मीडिया पर जारी इस विवाद की असल वजह
मुजफ्फरनगर में जज रवि कुमार दिवाकर बोले, कायर कहलाने से बेहतर है मौत, चार महीने में दे चुके हैं 23वीं फांसीउत्तर प्रदेश
8 सित॰ 2026, 4:33 pm (4 दिन पहले)· 2

मुजफ्फरनगर में जज रवि कुमार दिवाकर बोले, कायर कहलाने से बेहतर है मौत, चार महीने में दे चुके हैं 23वीं फांसी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक न्यायाधीश ने दहेज हत्या के मामले में फैसला सुनाते हुए अपराधियों के दबाव में आने से इनकार किया और कहा कि वह डरने के बजाय मौत को गले लगाना पसंद करेंगे।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में न्यायपालिका से जुड़ा एक कड़ा और साहसिक संदेश सामने आया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने दहेज हत्या से जुड़े एक मामले में सुनवाई पूरी करते हुए मृत्युदंड का आदेश पारित किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में यह बात रखी कि वह अपराधियों, गैंगस्टरों और माफियाओं के किसी भी तरह के अनुचित दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं। न्यायाधीश ने यह भी उल्लेख किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें केवल ईश्वर से ही डरना सिखाया है, इसलिए कर्तव्य पथ पर रहते हुए उन्हें किसी का भय नहीं है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब न्यायाधीश दिवाकर पिछले चार महीनों के दौरान कुल 23 लोगों को फांसी की सजा सुना चुके हैं। उन्होंने अपने न्यायिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए दो टूक कहा कि यदि कोई जज बाहुबलियों और अपराधियों के आगे भयभीत हो जाता है, तो देश की आम जनता का न्याय व्यवस्था से पूरी तरह भरोसा उठ जाएगा।

ये भी पढ़ें

सिद्धांतों से समझौता न करने का संकल्प

अदालत की कार्यवाही के दौरान न्यायाधीश ने अपने सख्त रुख को दोहराते हुए कहा कि वह अपनी साख और उसूलों से किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाले नहीं हैं।

मैं कायर जज कहलाने के बजाय मौत को गले लगाना पसंद करूंगा।

उन्होंने यह भी शिकायत दर्ज कराई कि उन्हें असामाजिक तत्वों और माफियाओं की ओर से लगातार धमकियां मिल रही हैं। उनका यह भी आरोप रहा कि अपराधियों को फायदा पहुंचाने की मंशा से उनकी अदालत से लगभग 100 गंभीर प्रकृति के मुकदमों को वापस ले लिया गया था। सुरक्षा को लेकर खतरे की आशंका जताते हुए उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से सुरक्षा प्रबंध पुख्ता करने की अपील की है, खासकर तब जब मुजफ्फरनगर में उनकी सुरक्षा में कटौती किए जाने की बात सामने आई थी।

दहेज हत्या के मामले की पूरी पृष्ठभूमि

सरकारी वकील कुलदीप कुमार ने इस मामले के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को अदालत ने अभियुक्त नदीम को भारतीय न्याय संहिता और पूर्ववर्ती IPC की धाराओं के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने आरोपी पर एक लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। यह पूरा मामला 23 जुलाई 2018 का है, जब शाहपुर कस्बे में दहेज की मांग को लेकर नदीम ने अपनी 23 वर्षीय पत्नी शहजादी को आग के हवाले कर दिया था।

गंभीर रूप से झुलसी हुई शहजादी को फौरन इलाज के लिए दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। अपनी मृत्यु से पहले दिए गए बयान में पीड़िता ने साफ तौर पर नदीम पर ही उसे जलाने का गंभीर आरोप लगाया था। सरकारी पक्ष के सभी 11 गवाह सुनवाई के दौरान अपने बयानों से मुकर गए थे, लेकिन अदालत ने शहजादी के उस आखिरी मृत्युपूर्व बयान को आधार बनाते हुए आरोपी को सजा सुनाई।

फांसी की सजाओं का बढ़ता आंकड़ा और प्रशासनिक फेरबदल

न्यायाधीश दिवाकर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पिछले चार महीनों के भीतर कुल 11 अलग-अलग मामलों में 23 दोषियों को मृत्युदंड की सजा से दंडित किया है। इन कठोर फैसलों के बीच प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव देखने को मिले। बीते अगस्त महीने में उनके पास विचाराधीन हत्या से जुड़े लगभग 100 मामलों को एक प्रशासनिक आदेश के जरिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था।

जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने इस बात का जिक्र किया था कि मुकदमों का यह ट्रांसफर वकीलों और वादियों के बीच इस आशंका के चलते हुआ था कि त्वरित अदालत द्वारा और भी मामलों में मृत्युदंड सुनाया जा सकता है। इस घटनाक्रम के अलावा हाल ही में मुंबई के दादर इलाके में भी उपद्रवियों द्वारा एक न्यायाधीश की गाड़ी को घेरकर जान से मारने की धमकी दिए जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया था, जिसके बाद पुलिस ने दो व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

सवाल-जवाब

मुजफ्फरनगर में किस न्यायाधीश ने मृत्युदंड का फैसला सुनाया?
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने यह फैसला सुनाया।
न्यायाधीश दिवाकर ने पिछले कितने महीनों में कितनी फांसी की सजा सुनाई हैं?
उन्होंने पिछले 4 महीनों में 11 मामलों में कुल 23 लोगों को मृत्युदंड दिया है।
यह मामला किस घटना से संबंधित है?
यह मामला 23 जुलाई 2018 को शाहपुर कस्बे में दहेज की मांग के लिए एक महिला को जिंदा जलाने से जुड़ा है।
मृतक महिला का नाम क्या था और वह कितने वर्ष की थी?
मृतक महिला का नाम शहजादी था और वह 23 वर्ष की थीं।
अभियुक्त का क्या नाम है जिसे अदालत ने दोषी ठहराया?
अदालत ने नदीम को दोषी ठहराया है।
गवाहों के मुकर जाने के बावजूद अदालत ने किस आधार पर सजा सुनाई?
अदालत ने मृतका शहजादी द्वारा मौत से पहले दिए गए मृत्युपूर्व बयान के आधार पर सजा सुनाई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 1

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

मुजफ्फरनगर में अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर द्वारा लगातार कठोर निर्णय और सुरक्षा संबंधी चिंताएं उत्तर प्रदेश की न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। महज चार महीने में 23 लोगों को फांसी की सजा सुनाना और साथ ही माफियाओं से धमकियां मिलने की बात कहकर सुरक्षा घटाए जाने पर सवाल उठाना यह रेखांकित करता है कि राज्य के संवेदनशील जिलों में तैनात न्यायिको अधिकारियों की सुरक्षा के लिए मजबूत तंत्र की कितनी आवश्यकता है। यदि इस मामले में उच्च स्तर पर तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर गवाहों और अन्य त्वरित अदालतों के कामकाज पर भी पड़ सकता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR