ऑनलाइन शॉपिंग और महंगाई की मार, नैनीताल में इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार 30 प्रतिशत तक गिराजैसलमेर के रामदेवरा में दीपावली पर अनूठी सजावट, 500 किलो फूलों से महका बाबा रामदेव का दरबारहिमाचल के सम्मू गांव में दिवाली पर क्यों पसरा रहता है सन्नाटा, जानिए सात पीढ़ियों से चली आ रही अनूठी परंपरासिरमौर के सराहां में धनतेरस पर दर्दनाक हादसा, खाई में बोलेरो गिरने से बड़े भाई की मौत और नौ घायलसुप्रीम कोर्ट में हिमाचल प्रदेश की बड़ी जीत, बीबीएमबी विवाद सुलझा, सालाना 1000 करोड़ तक का होगा फायदाबेंगलुरु में दामाद ने सिलबट्टे से की सात लोगों की हत्या, नंदी हिल्स से चिकबल्लापुर तक फेंके गए शवतकनीकी दबाव में फिसला यूरो, अमेरिकी डॉलर के सामने 1.1200 का अहम स्तर टूटाडायमंड स्टेट समिट 2026: राजस्थान की सियासत में जेनेरेशन जेड की एंट्री, कम उम्र के पार्षदों ने रखा विजनपलामू के किसान संतरे की बागवानी से कमा सकते हैं लाखों रुपये, जानिए एक एकड़ की लागत और कमाई का पूरा गणितमहज 100 रुपये से शुरू किया कारोबार, अब लाखों की कमाई कर रहे हैं मुरादाबाद के मोहम्मद फिरोज
नैनीताल के कृष्णापुर में सड़क न बनने से फूटा आक्रोश, स्थानीय लोगों ने 2027 के चुनाव बहिष्कार का किया ऐलानउत्तराखंड
1 अक्तू॰ 2026, 2:39 pm (36 दिन पहले)· 2

नैनीताल के कृष्णापुर में सड़क न बनने से फूटा आक्रोश, स्थानीय लोगों ने 2027 के चुनाव बहिष्कार का किया ऐलान

नैनीताल जिला मुख्यालय के कृष्णापुर वार्ड में टूटी सड़क की मरम्मत न होने से नाराज स्थानीय लोगों ने तल्लीताल गांधी चौक पर धरना दिया। निवासियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि 2027 के चुनाव से पहले मोटर मार्ग नहीं बना तो वे मतदान का पूरी तरह बहिष्कार करेंगे।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र नैनीताल के जिला मुख्यालय का हिस्सा होने के बावजूद कृष्णापुर क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। आपदा प्रभावित तल्लीताल के अंतर्गत आने वाले कृष्णापुर वार्ड में लंबे समय से क्षतिग्रस्त पड़ी सड़क का निर्माण न होने पर स्थानीय निवासियों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। आक्रोशित नागरिकों ने तल्लीताल गांधी चौक पर एकत्र होकर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासन अब केवल मौखिक आश्वासन देना बंद करे और धरातल पर काम शुरू कराए। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि वर्ष 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव से पूर्व इस मार्ग का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हुआ, तो समूचा क्षेत्र मतदान प्रक्रिया से दूर रहकर चुनाव का पूर्ण बहिष्कार करेगा।

रोजमर्रा के आवागमन में भारी रुकावट और दोपहिया वाहनों का संकट

धरने में शामिल नागरिकों ने बताया कि कृष्णापुर को नैनीताल शहर के मुख्य हिस्से से जोड़ने वाला संपर्क मार्ग बहुत लंबे समय से पूरी तरह बदहाल और टूटा हुआ है। सड़क की स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि वहां से दोपहिया वाहन निकालना भी किसी खतरे से कम नहीं है। रोजमर्रा के जरूरी कार्यों, राशन लाने अथवा कामकाज के सिलसिले में मुख्य बाजार जाने के लिए स्थानीय लोगों को बेहद जोखिम भरे पगडंडीनुमा रास्तों से गुजरना पड़ता है। वाहन न चल पाने के कारण घर-घर तक जरूरत का सामान पहुंचाना एक दैनिक संघर्ष बन चुका है।

ये भी पढ़ें

स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर और समय पर इलाज न मिलने से मौत

सड़क न होने का सबसे गंभीर और अमानवीय प्रभाव क्षेत्र की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर पड़ रहा है। कृष्णापुर के सभासद सुरेंद्र कुमार ने स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि स्थानीय लोग कई सालों से निरंतर सड़क की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन शासन और प्रशासन की ओर से केवल खोखले आश्वासन ही थमाए गए। सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उचित संपर्क मार्ग के अभाव में इलाके के एक व्यक्ति की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु भी हो चुकी है। यदि इलाके में एंबुलेंस या छोटी गाड़ियों के आने जाने लायक रास्ता होता, तो उस मरीज को ऐन वक्त पर अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाई जा सकती थी। वर्तमान में स्थिति यह है कि जब भी कोई बुजुर्ग, बच्चा, गंभीर मरीज या गर्भवती महिला बीमार पड़ती है, तो उन्हें स्ट्रेचर के अभाव में चादर या अन्य घरेलू साधनों के सहारे कंधों पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।

बलियानाला परियोजना पर करोड़ों का खर्च, फिर भी कृष्णापुर उपेक्षित

सभासद सुरेंद्र कुमार ने आगे रेखांकित किया कि आपदा प्रबंधन के तहत बलियानाला क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से सुरक्षा और स्थिरीकरण का व्यापक कार्य कराया जा रहा है। ऐसे दौर में भी कृष्णापुर की घनी बस्ती तक छोटी चारपहिया गाड़ियां पहुंचने लायक एक सामान्य मार्ग तक न बन पाना प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्षेत्रवासी महसूस करते हैं कि वे भौगोलिक रूप से शहर के भीतर रहकर भी प्रशासनिक नजरिए से पूरी तरह उपेक्षित और कटे हुए हैं।

भू-वैज्ञानिक मंजूरी का पेच और अधूरे वादे

प्रदर्शन में मौजूद कृष्णापुर निवासी दीपेश भट्ट ने बताया कि वर्ष 2022 के पिछले चुनाव के दौरान क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने जनता को आश्वस्त किया था कि बलियानाला सुरक्षा परियोजना के पूरा होते ही कृष्णापुर सड़क का निर्माण प्राथमिकता पर किया जाएगा। अब जबकि बलियानाला से जुड़ा ढांचागत काम लगभग पूर्ण होने के कगार पर पहुंच चुका है, तब भी सड़क का काम शुरू नहीं कराया गया। दीपेश के मुताबिक, अब जब लोग काम की मांग करते हैं तो प्रशासन भू-वैज्ञानिक अनुमति की औपचारिकता का हवाला देकर प्रक्रिया को टाल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी मंचों से सड़क, स्वास्थ्य और उत्तम शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं हर नागरिक तक पहुंचाने के दावे किए जाते हैं, मगर कृष्णापुर के बाशिंदे आज भी इन प्राथमिक जरूरतों के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।

तीन हजार की आबादी, 200 सीढ़ियों की चढ़ाई और लंबा पैदल सफर

क्षेत्र की भौगोलिक और व्यावहारिक दिक्कतों का ब्योरा देते हुए कृष्णापुर के पूर्व सभासद कैलाश रौतेला ने बताया कि पूर्व में यहां एक चालू संपर्क मार्ग हुआ करता था, लेकिन बलियानाला क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा के चलते वह पूरी तरह तबाह हो गया। कैलाश रौतेला के अनुसार, इस पूरे इलाके में करीब 3,000 से अधिक लोग निवास करते हैं। सड़क संपर्क टूटने के बाद से इन हजारों लोगों को नैनीताल शहर के मुख्य हिस्से तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर का फासला पैदल तय करना पड़ता है। हालांकि शहर का प्रमुख बीडी पांडे जिला अस्पताल कृष्णापुर से महज कुछ ही दूरी पर स्थित है, लेकिन मोटर मार्ग न होने के चलते गंभीर मरीजों को समय पर वहां नहीं पहुंचाया जा सकता। कई बार हालत बिगड़ने पर मरीजों को सीधे हल्द्वानी के बड़े अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ता है।

बच्चों की पढ़ाई पर असर और ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ का संकल्प

आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग ले रहीं स्थानीय महिला लक्ष्मी पपोला ने बताया कि सड़क विहीन स्थिति का सीधा प्रतिकूल प्रभाव नौनिहालों की शिक्षा पर पड़ रहा है। स्कूली बच्चों को हर रोज खतरनाक और पथरीले रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। उन्होंने साझा किया कि सामान्य आवाजाही और मुख्य सड़क तक आने के लिए लोगों को रोजाना करीब 200 सीढ़ियां चढ़नी और उतरनी पड़ती हैं, जो बुजुर्गों और बच्चों के लिए शारीरिक रूप से अत्यधिक कष्टकारी है। लक्ष्मी ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि चुनावों के समय नेता वोट मांगने क्षेत्र में आते हैं और सड़क, पानी, रोशनी के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही जनता को अपनी बदहाली पर अकेला छोड़ दिया जाता है। गांधी चौक पर प्रदर्शन कर रहे सभी नागरिकों ने एकजुट स्वर में निर्णय लिया है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया, तो आगामी 2027 के चुनाव में ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ के तहत मतदान का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।

सवाल-जवाब

नैनीताल के कृष्णापुर क्षेत्र के लोग किस स्थान पर धरना दे रहे हैं?
कृष्णापुर के निवासियों ने क्षतिग्रस्त सड़क के निर्माण की मांग को लेकर तल्लीताल गांधी चौक पर धरना प्रदर्शन शुरू किया है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन को क्या चेतावनी दी है?
क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि वर्ष 2027 के चुनाव से पहले सड़क नहीं बनाई गई, तो वे आगामी चुनावों का पूरी तरह बहिष्कार करेंगे।
कृष्णापुर की कुल अनुमानित आबादी कितनी है?
कृष्णापुर वार्ड की आबादी 3,000 से अधिक है, जो वर्तमान में सड़क सुविधा के अभाव में पैदल चलने को मजबूर है।
सड़क न होने से स्वास्थ्य सेवाओं पर क्या गंभीर असर पड़ा है?
सड़क न होने के कारण एक व्यक्ति की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो चुकी है और मरीजों को चादर या स्ट्रेचर के सहारे पैदल ले जाना पड़ता है।
सड़क निर्माण में देरी को लेकर प्रशासन क्या तर्क दे रहा है?
स्थानीय निवासियों के अनुसार, प्रशासन की तरफ से सड़क निर्माण में भू-वैज्ञानिक अनुमति की औपचारिकता का हवाला दिया जा रहा है।
मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए लोगों को क्या चुनौती उठानी पड़ती है?
लोगों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए रोजाना करीब 200 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं और कई किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·35 दिन पहले

पिछले साल जब नैनीताल जाना हुआ था, तब पहाड़ों की इन संकरी गलियों की असलियत पास से देखी थी। सोचिए, जहाँ एम्बुलेंस तक न पहुँच पाए, वहाँ मरीज को चादर पर लिटाकर कंधों पर ले जाना कितना खौफनाक होगा। चुनाव बहिष्कार की यह चेतावनी प्रशासन की आंखें खोलने के लिए काफी होनी चाहिए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·35 दिन पहले

चादर पर लादकर मरीज को अस्पताल ले जाना पड़ रहा है, इससे ज्यादा शर्मनाक प्रशासन के लिए कुछ नहीं हो सकता। सिर्फ कागजी वादों से अब पेट नहीं भरेगा, सड़क चाहिए तो चाहिए।

Ravikash Gupta@ravikash·35 दिन पहले

अर्जुन जी, बात तो सही है आपकी, पर क्या वाकई चुनाव बहिष्कार से सरकार नींद से जागेगी? कई बार नेता वोट न मिलने पर भी ध्यान नहीं देते।

Rohan Verma@rohan-verma·35 दिन पहले

सड़क न होने से मरीज की जान चली जाना बहुत डरावना है। चुनाव बहिष्कार की धमकी के बाद ही शायद प्रशासन की नींद खुलेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 दिन पहले

रोहन जी, बात सही है कि सड़क न होने से दिक्कत है, पर सीधे चुनाव बहिष्कार की बात कहना थोड़ा जल्दबाजी लगती है। पहले स्थानीय अधिकारियों से बात करके दबाव बनाना चाहिए था।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp