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नर्मदा जल परियोजना: चार राज्यों के बीच विस्थापन और मुआवजे का दशकों पुराना मसला हलभारत
7 जुल॰ 2026, 10:34 pm (45 दिन पहले)· 3

नर्मदा जल परियोजना: चार राज्यों के बीच विस्थापन और मुआवजे का दशकों पुराना मसला हल

नर्मदा परियोजना से जुड़े विस्थापन और मुआवजे के पुराने विवादों को सुलझाने के लिए चार राज्यों के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों ने इस समझौते पर मुहर लगाई।

नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान नर्मदा परियोजना को लेकर दशकों से चला आ रहा विवाद औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में चार राज्यों—मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र—के बीच विस्थापन और मुआवजे से संबंधित लंबित मुद्दों पर सहमति बनी। इस बैठक में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल के साथ-साथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस शामिल हुए।

विवादों का एकमुश्त समाधान

नर्मदा नदी से संबंधित परियोजना के दायरे में आने वाले जल-प्लावित क्षेत्रों के निवासियों के विस्थापन और उनकी भूमि के मुआवजे का मामला कई दशकों से अटका हुआ था। इस समझौते के माध्यम से सभी लंबित देय राशियों को 'वन-टाइम सेटलमेंट' यानी एकमुश्त निपटान प्रक्रिया के जरिए हल करने का निर्णय लिया गया है। इससे प्रभावित परिवारों को लंबे समय से प्रतीक्षित राहत मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

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सहकारी संघवाद और राजनीतिक समझ

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के जल सुरक्षा लक्ष्यों की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि राज्यों में 'डबल इंजन' सरकारों की मौजूदगी के कारण आपसी समन्वय बढ़ा है। इससे न केवल राजनीतिक मतभेद कम हुए हैं, बल्कि जल क्षेत्र में सहकारी संघवाद की भावना को भी मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि अब देश के कई पुराने जल विवादों को तेजी से निपटाया जा रहा है, जो विकास के लिए अनिवार्य है।

निर्माण और लाभ की चर्चा

बैठक में चारों राज्यों की सरकारों के रचनात्मक सहयोग की प्रशंसा करते हुए अमित शाह ने परियोजना के सकारात्मक परिणामों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि नर्मदा बांध के निर्माण से मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान को अत्यधिक लाभ मिला है। बिजली और पानी की निरंतर उपलब्धता ने इन क्षेत्रों की तस्वीर बदल दी है। विशेष रूप से राजस्थान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भले ही इसे एक सीमित लाभ माना जाए, लेकिन जिन इलाकों तक नर्मदा का पानी पहुँचा है, वहाँ किसानों की समृद्धि बढ़ी है और भूमि के मूल्य में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

जल विवाद निपटान की दिशा में निरंतरता

गृह मंत्री ने याद दिलाया कि हाल ही में हरियाणा और राजस्थान के बीच के जल विवाद को भी सफलतापूर्वक सुलझाया गया था। उन्होंने सी आर पाटिल के नेतृत्व की सराहना की और कहा कि किशाऊ बांध परियोजना हो या अन्य अंतर-राज्यीय विवाद, सरकार इन्हें प्राथमिकता के आधार पर हल कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पानी का उपयोग चाहे किसी भी राज्य में हो, अंततः उससे लाभान्वित होने वाला व्यक्ति भारतीय ही है। पड़ोसी राज्यों की समृद्धि को अपने विकास से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नुकसान को टालना और आपसी सहमति से समाधान निकालना ही भविष्य का सही रास्ता है।

सवाल-जवाब

नर्मदा परियोजना विवाद में कौन से चार राज्य शामिल थे?
इस विवाद और समझौते में मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र शामिल थे।
विवाद किस विषय पर आधारित था?
यह विवाद नर्मदा परियोजना के कारण विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास और उनकी भूमि के मुआवजे से संबंधित था।
मुआवजे का निपटान कैसे किया गया है?
सभी लंबित देयों को एक 'वन-टाइम सेटलमेंट' यानी एकमुश्त निपटान प्रक्रिया के जरिए हल किया गया है।
इस बैठक की अध्यक्षता किसने की?
इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने की।
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