लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने आज भारतीय सेना के प्रमुख का पदभार संभाल लिया। कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में जिस अधिकारी का नाम सुनकर उग्रवादी सहम जाते थे, वही आज देश की थलसेना का नेतृत्व करने के लिए आगे आए हैं। वे भारत के 31वें सेना प्रमुख होंगे और जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लेंगे। उनका कार्यकाल 31 अगस्त 2028 तक तय किया गया है। करीब चार दशकों के सैन्य जीवन में उन्होंने रेगिस्तान से लेकर ऊंचाई वाली सीमाओं तक हर कठिन मोर्चे पर खुद को साबित किया है।
NDA से आर्म्ड कॉर्प्स तक का सफर
खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र धीरज सेठ को दिसंबर 1986 में आर्म्ड कॉर्प्स में कमीशन मिला था। अपने करियर की शुरुआत से ही उन्होंने सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण पोस्टिंग पर काम किया। उन्होंने रेगिस्तानी इलाके में एक बख्तरबंद रेजिमेंट की कमान संभाली, विकसित क्षेत्र में आर्मर्ड ब्रिगेड का नेतृत्व किया और जम्मू-कश्मीर में तैनात आतंकवाद विरोधी बल को संचालित किया। इस दौरान उन्होंने जिस कुशलता से उग्रवादियों के खिलाफ अभियान चलाए, उसने उन्हें सेना में एक विशेष पहचान दिलाई।
सुदर्शन चक्र कोर से दिल्ली एरिया तक
लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नत होने के बाद उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर का नेतृत्व किया। इसके बाद उन्हें दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) के महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौर में उनके नेतृत्व में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभियान सफलतापूर्वक संचालित हुए।
दो बड़ी कमांड संभालने का दुर्लभ अनुभव
आर्मी कमांडर के स्तर पर पहुंचने के बाद धीरज सेठ ने साउथ वेस्टर्न कमांड और सदर्न कमांड, दोनों का नेतृत्व किया। भारतीय सेना में यह एक बेहद दुर्लभ उपलब्धि है। पश्चिमी मोर्चे की दो अलग-अलग प्रमुख ऑपरेशनल कमांड संभालने का मौका बहुत कम अधिकारियों को मिलता है। यह विस्तृत ऑपरेशनल अनुभव उन्हें सेना के वरिष्ठ नेतृत्व में एक अलग और मजबूत स्थान दिलाता है।
रणनीतिक भूमिकाओं में भी उल्लेखनीय योगदान
केवल रणभूमि पर ही नहीं, रणनीतिक मोर्चे पर भी धीरज सेठ ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन में ऑपरेशंस ऑफिसर के रूप में अंतरराष्ट्रीय सैन्य अनुभव हासिल किया। सेना मुख्यालय में असिस्टेंट मिलिट्री सेक्रेटरी के तौर पर भी जिम्मेदारी निभाई। इसके अलावा साउथ वेस्टर्न कमांड में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ (ऑपरेशंस) और डायरेक्टर जनरल (डिसिप्लिन, सेरेमोनियल और वेलफेयर) जैसे अहम पदों पर उन्होंने अपनी प्रशासनिक दक्षता साबित की। भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और दीर्घकालीन रणनीतिक योजनाओं को आकार देने में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
तीन प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान
उनकी उत्कृष्ट सैन्य सेवाओं को देश ने तीन बड़े पदकों से नवाजा है: परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) और अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM)। ये सम्मान उनके ऑपरेशनल साहस, नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक दक्षता तीनों को एक साथ मान्यता देते हैं।
सेना प्रमुख के रूप में आगे की चुनौतियां
नई भूमिका में धीरज सेठ के सामने कई बड़ी जिम्मेदारियां हैं। सेना का आधुनिकीकरण करना, उभरती हुई नई तकनीकों को सैन्य ढांचे में शामिल करना और देश की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना उनकी प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी। ऑपरेशनल और रणनीतिक दोनों क्षेत्रों में दशकों के गहरे अनुभव के साथ वे इन चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार माने जाते हैं।













