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चार दशकों की सैन्य साधना के बाद धीरज सेठ बने देश के 31वें सेना प्रमुखभारत
3 घंटे पहले· 2

चार दशकों की सैन्य साधना के बाद धीरज सेठ बने देश के 31वें सेना प्रमुख

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लेते हुए भारत के 31वें थलसेना अध्यक्ष का पदभार संभाल लिया है। उनका कार्यकाल 31 अगस्त 2028 तक रहेगा।

Karan MalhotraKaran MalhotraCrime Correspondent 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने आज भारतीय सेना के प्रमुख का पदभार संभाल लिया। कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में जिस अधिकारी का नाम सुनकर उग्रवादी सहम जाते थे, वही आज देश की थलसेना का नेतृत्व करने के लिए आगे आए हैं। वे भारत के 31वें सेना प्रमुख होंगे और जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लेंगे। उनका कार्यकाल 31 अगस्त 2028 तक तय किया गया है। करीब चार दशकों के सैन्य जीवन में उन्होंने रेगिस्तान से लेकर ऊंचाई वाली सीमाओं तक हर कठिन मोर्चे पर खुद को साबित किया है।

NDA से आर्म्ड कॉर्प्स तक का सफर

खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र धीरज सेठ को दिसंबर 1986 में आर्म्ड कॉर्प्स में कमीशन मिला था। अपने करियर की शुरुआत से ही उन्होंने सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण पोस्टिंग पर काम किया। उन्होंने रेगिस्तानी इलाके में एक बख्तरबंद रेजिमेंट की कमान संभाली, विकसित क्षेत्र में आर्मर्ड ब्रिगेड का नेतृत्व किया और जम्मू-कश्मीर में तैनात आतंकवाद विरोधी बल को संचालित किया। इस दौरान उन्होंने जिस कुशलता से उग्रवादियों के खिलाफ अभियान चलाए, उसने उन्हें सेना में एक विशेष पहचान दिलाई।

सुदर्शन चक्र कोर से दिल्ली एरिया तक

लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नत होने के बाद उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर का नेतृत्व किया। इसके बाद उन्हें दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) के महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौर में उनके नेतृत्व में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभियान सफलतापूर्वक संचालित हुए।

दो बड़ी कमांड संभालने का दुर्लभ अनुभव

आर्मी कमांडर के स्तर पर पहुंचने के बाद धीरज सेठ ने साउथ वेस्टर्न कमांड और सदर्न कमांड, दोनों का नेतृत्व किया। भारतीय सेना में यह एक बेहद दुर्लभ उपलब्धि है। पश्चिमी मोर्चे की दो अलग-अलग प्रमुख ऑपरेशनल कमांड संभालने का मौका बहुत कम अधिकारियों को मिलता है। यह विस्तृत ऑपरेशनल अनुभव उन्हें सेना के वरिष्ठ नेतृत्व में एक अलग और मजबूत स्थान दिलाता है।

रणनीतिक भूमिकाओं में भी उल्लेखनीय योगदान

केवल रणभूमि पर ही नहीं, रणनीतिक मोर्चे पर भी धीरज सेठ ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन में ऑपरेशंस ऑफिसर के रूप में अंतरराष्ट्रीय सैन्य अनुभव हासिल किया। सेना मुख्यालय में असिस्टेंट मिलिट्री सेक्रेटरी के तौर पर भी जिम्मेदारी निभाई। इसके अलावा साउथ वेस्टर्न कमांड में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ (ऑपरेशंस) और डायरेक्टर जनरल (डिसिप्लिन, सेरेमोनियल और वेलफेयर) जैसे अहम पदों पर उन्होंने अपनी प्रशासनिक दक्षता साबित की। भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और दीर्घकालीन रणनीतिक योजनाओं को आकार देने में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है।

तीन प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान

उनकी उत्कृष्ट सैन्य सेवाओं को देश ने तीन बड़े पदकों से नवाजा है: परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) और अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM)। ये सम्मान उनके ऑपरेशनल साहस, नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक दक्षता तीनों को एक साथ मान्यता देते हैं।

सेना प्रमुख के रूप में आगे की चुनौतियां

नई भूमिका में धीरज सेठ के सामने कई बड़ी जिम्मेदारियां हैं। सेना का आधुनिकीकरण करना, उभरती हुई नई तकनीकों को सैन्य ढांचे में शामिल करना और देश की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना उनकी प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी। ऑपरेशनल और रणनीतिक दोनों क्षेत्रों में दशकों के गहरे अनुभव के साथ वे इन चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार माने जाते हैं।

इसका आप पर असर

  • भारत में: नए सेना प्रमुख धीरज सेठ की नियुक्ति से देश की सैन्य नेतृत्व में निरंतरता बनी रहेगी, और उनकी प्राथमिकताएं आधुनिकीकरण व सीमा सुरक्षा को मजबूत करने पर केंद्रित हैं जो सभी नागरिकों की सुरक्षा से सीधे जुड़ी हैं।
  • सेना कर्मियों और सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए: नए सेना प्रमुख की नीतिगत दिशा पदोन्नति, कल्याण योजनाओं और सेवा की शर्तों को प्रभावित करती है, इसलिए यह नियुक्ति सेवारत और पूर्व सैनिकों दोनों के लिए सीधे महत्व रखती है।

सवाल-जवाब

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ कौन हैं?
वे भारत के 31वें थलसेना अध्यक्ष हैं, जिन्हें दिसंबर 1986 में आर्म्ड कॉर्प्स में कमीशन मिला था और वे खड़कवासला की राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र हैं।
धीरज सेठ ने किसकी जगह सेना प्रमुख का पद संभाला?
उन्होंने जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लिया है।
उनका कार्यकाल कब तक रहेगा?
उनका कार्यकाल 31 अगस्त 2028 तक निर्धारित है।
सेना प्रमुख बनने से पहले उन्होंने कौन सी कमांड संभाली थीं?
उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर, दिल्ली एरिया (GOC), साउथ वेस्टर्न कमांड और सदर्न कमांड का नेतृत्व किया।
उन्हें कौन से सैन्य सम्मान मिले हैं?
उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) और अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किया गया है।
नए सेना प्रमुख के सामने मुख्य चुनौतियां क्या हैं?
सेना का आधुनिकीकरण, नई तकनीकों को अपनाना और सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियां होंगी।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किस मिशन में काम किया?
उन्होंने अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन में ऑपरेशंस ऑफिसर के रूप में सेवाएं दी हैं।
Karan Malhotra
लेखक के बारे मेंKaran MalhotraCrime Correspondent Prayagraj
विशेषज्ञताCrime News, Investigations, Law Enforcement, Courts, Legal Affairs, Public Safety, Breaking Crime Stories, Justice System, Criminal Cases

Karan Malhotra is a Crime Correspondent covering breaking crime news, investigations, law enforcement updates, and major criminal cases. He reports on public safety and justice-related developments.

Karan Malhotra is a Crime Correspondent specializing in crime reporting, criminal investigations, law enforcement, and justice system coverage. He reports on breaking crime stories, police operations, court proceedings, high-profile cases, and public safety issues. With a focus on factual and responsible journalism, Karan provides detailed coverage of criminal activities, legal developments, and investigative updates. His reporting highlights the work of law enforcement agencies, judicial outcomes, and the impact of crime on communities, offering readers clear and timely information on security and justice matters.

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