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फुकेत दिल्ली विमान हादसे के बाद एक्शन में केंद्र सरकार, एयर इंडिया सीईओ तलब और पायलटों के डोप टेस्ट नियम होंगे सख्तदिल्ली
13 अग॰ 2026, 9:07 am (33 दिन पहले)· 2

फुकेत दिल्ली विमान हादसे के बाद एक्शन में केंद्र सरकार, एयर इंडिया सीईओ तलब और पायलटों के डोप टेस्ट नियम होंगे सख्त

फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI 2379 में 300 फीट की अचानक गिरावट और पायलट के मारिजुआना पॉजिटिव मिलने पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइन प्रबंधन को कड़ी चेतावनी देते हुए डीजीसीए को डोप टेस्ट के नियम कड़े करने के निर्देश दिए हैं।

केंद्र सरकार ने 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ़्लाइट में हुई गंभीर घटना के बाद सख्त रुख अपनाया है। विमान में अचानक आई तकनीकी खराबी, भीषण टर्बुलेंस और बाद में पायलट-इन-कमांड का मारिजुआना टेस्ट पॉजिटिव आने पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया के सीईओ को तलब किया है। सरकार ने एयरलाइन प्रबंधन को अपनी परिचालन सुरक्षा की पूरी ज़िम्मेदारी लेने की चेतावनी दी है और डीजीसीए को सभी पायलटों के ड्रग और डोप टेस्ट से जुड़े नियमों को तत्काल कड़ा करने के निर्देश जारी किए हैं।

ओडिशा के ऊपर हवा में गहराया संकट और तकनीकी चेतावनियां

फुकेत से दिल्ली के लिए रवाना हुई एयर इंडिया की फ़्लाइट AI 2379 में कुल 145 यात्री सवार थे। जब यह विमान ओडिशा के वायुक्षेत्र में उड़ान भर रहा था, उस दौरान कॉकपिट में एक साथ कई गंभीर आपातकालीन चेतावनियां बजने लगीं। विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम, दरवाजों और एलिवेटर में खराबी के अलर्ट मिले, जिसके तुरंत बाद ऑटोपायलट सिस्टम भी अपने आप बंद हो गया। इस दौरान विमान भीषण टर्बुलेंस की चपेट में आ गया और हवा में अचानक 300 फ़ीट नीचे गिर गया। इस झटके के कारण विमान में सवार 20 यात्री और 4 केबिन क्रू सदस्य चोटिल हो गए।

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पायलट का मारिजुआना टेस्ट पॉजिटिव और कॉकपिट में अनियंत्रित व्यवहार

विमान के दिल्ली उतरने के बाद जब पायलट-इन-कमांड (PIC) का अनिवार्य ड्रग टेस्ट कराया गया, तो उसमें मारिजुआना की पुष्टि हुई। जांचकर्ताओं की पूछताछ में पायलट ने दावा किया कि व्यक्तिगत समस्याओं के कारण उन्हें नींद की गोलियां लेने की सलाह दी गई थी और इन्हीं दवाओं की वजह से टेस्ट पॉजिटिव आया है। हालांकि, फ़्लाइट के दौरान पायलट के आचरण पर गंभीर सवाल उठे हैं। केबिन क्रू के सदस्यों ने शिकायत दर्ज कराई कि उड़ान के दौरान पायलट साइकोएक्टिव पदार्थों के प्रभाव में लग रहे थे। वे बार-बार कॉकपिट के फ़र्श पर बैठ रहे थे और वहां धूम्रपान करने का प्रयास कर रहे थे, जिसके बाद केबिन क्रू को बीच-बचाव करना पड़ा।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय की चेतावनी और सख्त कार्रवाई के आदेश

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए एविएशन सेक्रेटरी समीर सिन्हा ने एयर इंडिया के शीर्ष अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की और सुरक्षा में हुई चूक पर जवाब तलब किया। सरकार ने साफ़ किया है कि यात्रियों की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एविएशन सेक्रेटरी समीर सिन्हा ने कहा, "एयरलाइन को ज़िम्मेदारी लेनी होगी और जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।" इसके साथ ही उड्डयन मंत्रालय ने नियामक संस्था डीजीसीए को निर्देश दिए हैं कि वह पायलटों के मेडिकल और डोप टेस्ट प्रोटोकॉल की समीक्षा करे तथा नियमों को अधिक सख्त बनाए।

अहमदाबाद विमान हादसे की पृष्ठभूमि में बढ़ी प्रशासनिक चिंता

यह नई घटना ऐसे समय में सामने आई है जब एयर इंडिया की सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही जांच के दायरे में है। पिछले साल जून महीने में अहमदाबाद में एयर इंडिया का एक भीषण विमान हादसा हुआ था, जिसमें 260 लोगों की जान चली गई थी। उस दर्दनाक हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। अहमदाबाद हादसे की जांच लंबित रहने के बीच फुकेत-दिल्ली फ़्लाइट में पायलट की इस लापरवाही और गंभीर तकनीकी विफलताओं ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय तथा यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने एयर इंडिया को अपने रोज़मर्रा के ऑपरेशन्स और क्रू मॉनिटरिंग सिस्टम को तुरंत सुधारने का अंतिम आदेश दिया है।

सवाल-जवाब

एयर इंडिया की फ़्लाइट AI 2379 में क्या घटना हुई थी?
4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रही इस फ़्लाइट में तकनीकी खराबी और टर्बुलेंस के कारण विमान हवा में 300 फ़ीट गिर गया था, जिससे 20 यात्री और 4 केबिन क्रू सदस्य घायल हो गए थे।
फ़्लाइट के पायलट-इन-कमांड की जांच में क्या खुलासा हुआ?
पायलट-इन-कमांड का ड्रग टेस्ट मारिजुआना के लिए पॉजिटिव आया। उड़ान के दौरान कॉकपिट के फ़र्श पर बैठने और धूम्रपान की कोशिश की बात भी सामने आई।
पायलट ने सकारात्मक ड्रग टेस्ट के लिए क्या सफाई दी?
पायलट ने दावा किया कि व्यक्तिगत समस्याओं के कारण उन्हें नींद की गोलियां लेने की सलाह दी गई थी, जिसकी वजह से उनका ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आया।
केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने क्या कदम उठाए हैं?
एविएशन सेक्रेटरी समीर सिन्हा ने एयर इंडिया के सीईओ को तलब कर जवाब मांगा है और डीजीसीए को पायलटों के डोप टेस्ट नियम सख्त करने के निर्देश दिए हैं।
इस घटना के समय किस पिछले हादसे का जिक्र किया गया है?
पिछले साल जून में हुए एयर इंडिया के अहमदाबाद विमान हादसे का जिक्र किया गया है, जिसमें 260 लोगों की मौत हो गई थी और जिसकी अंतिम रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।
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टिप्पणियाँ 5

Rohan Verma@rohan-verma·32 दिन पहले

यह घटना सिर्फ एक एयरलाइन की चूक नहीं, बल्कि नागरिक उड्डयन सुरक्षा ढांचे में मौजूद गंभीर खामियों को उजागर करती है। पायलट का मारिजुआना पॉजिटिव आना और कॉकपिट में अनियंत्रित व्यवहार यह दर्शाता है कि एयरलाइंस में आंतरिक निगरानी और मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन प्रणाली कितनी कमजोर हो चुकी है। यदि डीजीसीए ने समय रहते रैंडम ड्रग टेस्टिंग और क्रू मॉनिटरिंग के नियमों को कड़ाई से लागू नहीं किया, तो यह लापरवाही किसी बड़े विमान हादसे का सबब बन सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·32 दिन पहले

यह घटना महज एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि भारतीय न्याय संहिता और विमान नियमों के तहत गंभीर आपराधिक लापरवाही का मामला है। कॉकपिट में नशे की हालत में विमान संचालित करना और सुरक्षा प्रणालियों का विफल होना यात्रियों की जान जोखिम में डालने वाला संज्ञेय अपराध है। डीजीसीए की जाँच और एयर इंडिया के शीर्ष प्रबंधन पर संभावित कानूनी शिकंजा यह तय करेगा कि एयरलाइन की जवाबदेही केवल कागजी है या आपराधिक कार्रवाई तक पहुँचेगी।

Rohan Verma@rohan-verma·32 दिन पहले

यह घटना न केवल एयर इंडिया के आंतरिक प्रबंधन की घोर विफलता को उजागर करती है, बल्कि यह विमानन सुरक्षा के बुनियादी ढांचे पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। जब कॉकपिट के भीतर ही सुरक्षा प्रोटोकॉल का इस हद तक उल्लंघन होने लगे, तो यह स्पष्ट है कि मौजूदा निगरानी तंत्र में बड़े सुधार की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में नियामक संस्थाओं और एयरलाइन प्रबंधन के बीच जवाबदेही तय करने को लेकर प्रशासनिक और विधिक स्तर पर कड़े कदम उठाए जाने की पूरी संभावना है, जिससे पूरे उद्योग में सुरक्षा मानकों की नए सिरे से समीक्षा होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·32 दिन पहले

यह मामला केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि भारतीय न्याय संहिता और विमान नियमों के तहत आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आ सकता है। कॉकपिट में प्रतिबंधित पदार्थों का सेवन और सुरक्षा प्रणालियों की विफलता सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। आगे की जाँच में एयरलाइन प्रबंधन की जवाबदेही तय होने के साथ आपराधिक धाराओं के तहत मुक़दमे दर्ज होने की पूरी संभावना है, जो कॉर्पोरेट जगत के लिए एक कड़ा संदेश होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·32 दिन पहले

यह घटना एयरलाइंस के आंतरिक सुरक्षा ऑडिट और क्रू मॉनिटरिंग सिस्टम पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करती है। जब तक रोस्टर मैनेजमेंट और रैंडम ड्रग स्क्रीनिंग प्रक्रिया में थर्ड-पार्टी स्वतंत्र ऑडिट को अनिवार्य नहीं किया जाता, तब तक इस तरह की कॉकपिट लापरवाही पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल होगा। आने वाले समय में नियामक संस्थाओं को एयरलाइन ऑपरेटरों पर कड़े वित्तीय दंड और लाइसेंस निलंबन जैसे कड़े प्रावधान लागू करने होंगे।

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