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पंजाब में ड्रग सेंसस रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग, बीजेपी ने भगवंत मान सरकार पर बोला हमलापंजाब
29 अक्तू॰ 2026, 11:53 pm (8 दिन पहले)· 1

पंजाब में ड्रग सेंसस रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग, बीजेपी ने भगवंत मान सरकार पर बोला हमला

पंजाब में कराए गए बहुचर्चित ड्रग सेंसस की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करने को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने भगवंत मान सरकार पर सरकारी खजाने के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए इस सर्वे की रिपोर्ट तुरंत सामने लाने की मांग की है।

पंजाब में नशे की गंभीर समस्या को लेकर कराए गए व्यापक ड्रग सर्वे की रिपोर्ट को अब तक जनता के सामने नहीं लाए जाने पर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इस गोपनीय रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक करने की पुरजोर मांग उठाई है। राज्य में इसी साल यह बड़ा सर्वे करवाया गया था, जिसके तहत सरकारी अमले ने घर-घर जाकर स्थिति का जायजा लिया था, लेकिन इसकी फाइंडिंग्स बाहर न आने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

घर-घर सर्वे और भारी-भरकम खर्च पर सवाल

इस बड़े अभियान के तहत पंजाब सरकार ने अपने लगभग 28 हजार सरकारी कर्मचारियों को मैदान में उतारा था। इन कर्मचारियों ने राज्यभर के करीब 65 लाख परिवारों तक पहुंचकर सीधा संवाद स्थापित किया था। इस घर-घर जाकर किए गए संपर्क का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि किन घरों के कितने लोग नशे की चपेट में हैं, उन्हें प्रतिबंधित पदार्थ कहां से मिल रहे हैं और कितनों को रिहैबिलिटेशन सेंटर भेजने की आवश्यकता है। हालांकि, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस पूरी कवायद के नतीजे साझा न किए जाने से भगवंत मान सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है।

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सुनील जाखड़ ने लगाए गंभीर वित्तीय आरोप

पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील जाखड़ ने सरकार से सीधा सवाल किया है कि इस विशाल सर्वे पर आखिर 250 करोड़ रुपये क्यों खर्च किए गए, जबकि इसका कोई सार्वजनिक नतीजा सामने नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया के नाम पर सरकारी खजाने को दोनों हाथों से लूटा गया है और जनता के पैसे का भारी दुरुपयोग हुआ है। बीजेपी ने अब इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कराने के लिए केंद्र सरकार से सीबीआई और एनआईए जांच की मांग की है, ताकि वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही की परतें उधेड़ी जा सकें।

क्या था पंजाब का ड्रग सेंसस अभियान

राज्य प्रशासन ने पंजाब में ड्रग्स की वास्तविक स्थिति और इसकी सप्लाई चेन का पर्दाफाश करने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया था। वर्ष 2025 में इस महत्वाकांक्षी ऑपरेशन के लिए 150 करोड़ रुपये का बजट तय किए जाने की बात सामने आई थी। इस विशाल डेटा कलेक्शन ड्राइव की शुरुआत 5 मई 2026 को हुई थी, जिसमें नियमित सरकारी शिक्षकों के अलावा संविदा यानी कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले शिक्षकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों को भी ड्यूटी पर लगाया गया था। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राज्य के दौरे पर कहा था कि ड्रग्स माफिया को पाताल से ढूंढकर निकाला जाएगा।

सवाल-जवाब

पंजाब में ड्रग सेंसस सर्वे कब शुरू हुआ था?
इस व्यापक सर्वे अभियान की आधिकारिक शुरुआत 5 मई 2026 को हुई थी।
इस सर्वे में कितने परिवारों को कवर किया गया था?
सरकारी कर्मचारियों ने राज्य के करीब 65 लाख परिवारों तक पहुंचकर आंकड़े जुटाए थे।
इस सर्वे में कितने कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी?
इस अभियान में लगभग 28 हजार सरकारी और संविदा कर्मचारियों को शामिल किया गया था।
बीजेपी ने इस मामले में क्या मांग की है?
बीजेपी ने रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक करने और मामले की सीबीआई तथा एनआईए से जांच कराने की मांग की है।
इस सर्वे पर कुल कितना खर्च होने की बात कही गई है?
सुनील जाखड़ ने इस सर्वे पर 250 करोड़ रुपये खर्च होने का आरोप लगाया है, जबकि 2025 में 150 करोड़ का बजट तय हुआ था।
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टिप्पणियाँ 5

Kavya Nair@kavya-nair·7 दिन पहले

जब मैं पिछले साल पंजाब के एक छोटे से गाँव में थी, तो स्थानीय लोगों ने मुझसे नशे की इस भयानक समस्या पर खुलकर बात की थी। अगर इतना बड़ा सर्वे हुआ है, तो सरकार को डेटा छिपाना नहीं चाहिए, लोग सच जानने के हकदार हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·7 दिन पहले

ढाई सौ करोड़ खर्च करने के बाद भी रिपोर्ट छिपाना अजीब है, पर क्या सिर्फ चुनावी फायदे के लिए बीजेपी इस पर इतना हंगामा कर रही है?

Ravikash Gupta@ravikash·7 दिन पहले

अर्जुन, बात बिल्कुल सही है। अगर जनता का इतना पैसा खर्च हुआ है, तो रिपोर्ट बाहर आने से डर क्यों?

Rohan Verma@rohan-verma·7 दिन पहले

पंजाब में जब पिछले साल शिक्षकों को घर-घर भेजा जा रहा था, तब मेरे एक रिश्तेदार ने खुद बताया था कि कैसे फॉर्म भरे जा रहे थे। अब अगर इतना बड़ा सर्वे कराकर आंकड़े दबाए जा रहे हैं, तो शक होना लाजिमी है कि जनता का पैसा आखिर कहां गया।

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 दिन पहले

रोहन जी, बात तो बिल्कुल सही है आपकी। जब 28 हज़ार कर्मचारियों ने घर-घर जाकर डेटा जुटाया ही है, तो फिर उसे सार्वजनिक करने से सरकार क्यों डर रही है?

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