पंजाब के संगरूर में आयोजित 'इंसाफ रैली' के मंच से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार और पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी दोनों को एक साथ निशाने पर लिया। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने पंजाब के प्रशासनिक ढांचे और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने पंजाब की मौजूदा व्यवस्था को रिमोट कंट्रोल से चलने वाली सरकार करार दिया और राज्य के नेतृत्व की स्वायत्तता पर गंभीर सवाल उठाए।
नशा मुक्ति की तीन साल की मियाद पर राहुल गांधी का पलटवार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब से नशे की गंभीर समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए तीन साल की समय-सीमा निर्धारित की थी। इस बयान का उल्लेख करते हुए कांग्रेस सांसद ने केंद्र की स्थिरता पर संदेह जताया। राहुल गांधी ने सभा में कहा,
"गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब में नशे की समस्या को खत्म करने के लिए तीन साल की मियाद तय की है। लेकिन सच्चाई यह है कि तीन साल में तो अमित शाह गृह मंत्री ही नहीं रहेंगे। मेरा मानना है कि यह केंद्र सरकार एक साल भी नहीं टिकने वाली है। ऐसे में वे तीन साल में नशा खत्म करने का दावा कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि जब केंद्र की मौजूदा सत्ता का भविष्य ही लंबे समय के लिए सुरक्षित नहीं दिखता और सरकार के एक साल भी टिकने पर संशय बना हुआ है, तब तीन वर्षों की रूपरेखा पेश करना जमीनी हकीकत से परे जान पड़ता है।
राज्य प्रशासन की कमान पर खड़े किए सीधे सवाल
पंजाब की वर्तमान राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि सूबे को एक ऐसे शासन की दरकार है जो पूरी निष्ठा से केवल पंजाब और यहां के नागरिकों के कल्याण के लिए काम करे। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान के काम करने के तौर-तरीकों को कटघरे में खड़ा किया। राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौजूदा समय में पंजाब सरकार की वास्तविक कमान दिल्ली के हाथों में चली गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सूबे की बागडोर आधी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संभाल रहे हैं और आधी दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नियंत्रण में है, जबकि भगवंत मान केवल औपचारिक तौर पर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हुए हैं। उनके अनुसार राज्य के नीतिगत और प्रशासनिक फैसलों में स्थानीय नेतृत्व की स्वतंत्रता पूरी तरह खत्म हो चुकी है।
कांग्रेस की वापसी पर राज्य से शासन चलाने का संकल्प
रैली के दौरान राहुल गांधी ने जनसमूह को आश्वस्त किया कि जब पंजाब में कांग्रेस सत्ता में वापसी करेगी, तब शासन का संचालन पूरी तरह बदल जाएगा। उन्होंने संकल्प दोहराया कि नई सरकार के सभी नीतिगत फैसले दिल्ली के गलियारों से तय होने के बजाय सीधे पंजाब की धरती से लिए जाएंगे।
कांग्रेस नेता ने रेखांकित किया कि पार्टी की सरकार बनने पर पंजाब का मुख्यमंत्री वास्तव में पंजाब का अपना मुख्यमंत्री होगा। उन्होंने भरोसा दिया कि कांग्रेस पार्टी राज्य के प्रशासन को सूबे की सीमाओं के भीतर से ही संचालित करेगी, और यह व्यवस्था देश के गृह मंत्री या दिल्ली के किसी पूर्व मुख्यमंत्री के इशारों या बाहरी प्रभाव पर बिल्कुल भी निर्भर नहीं रहेगी।
















