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राजस्थान के 2017 डबल मर्डर मामले में 9 वर्षों से वांछित आरोपी चुम्मा उर्फ नवल किशोर दिल्ली के मोहन गार्डन से गिरफ्तारदिल्ली
2 सित॰ 2026, 12:38 am (13 दिन पहले)· 3

राजस्थान के 2017 डबल मर्डर मामले में 9 वर्षों से वांछित आरोपी चुम्मा उर्फ नवल किशोर दिल्ली के मोहन गार्डन से गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एंटी गैंगस्टर स्क्वॉड ने वर्ष 2017 के भरतपुर डबल मर्डर केस में करीब नौ साल से फरार आरोपी चुम्मा उर्फ नवल किशोर को मोहन गार्डन इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर दिल्ली और राजस्थान में हत्या के प्रयास तथा आर्म्स एक्ट समेत 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एंटी गैंगस्टर स्क्वॉड (AGS) को एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। पुलिस टीम ने राजस्थान के भरतपुर में वर्ष 2017 में हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड के मुख्य आरोपियों में शामिल 50 वर्षीय चुम्मा उर्फ नवल किशोर को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पिछले नौ वर्षों से लगातार पुलिस की पकड़ से दूर चल रहा था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी दिल्ली के मोहन गार्डन इलाके में छिपकर रह रहा था और वह PS मोहन गार्डन की सूची में एक सूचीबद्ध बैड कैरेक्टर के रूप में दर्ज है।

राजस्थान के भरतपुर में 2017 की खूनी वारदात का पूरा ब्यौरा

यह मामला राजस्थान के भरतपुर जिले स्थित थाना उचैन का है। घटना 14 जुलाई 2017 की है, जब कृषि भूमि के मालिकाना हक को लेकर दो गुटों के बीच गंभीर विवाद उत्पन्न हुआ था। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस जांच के अनुसार, विवादित खेत पर कब्जा जमाने के इरादे से लगभग 30 से 40 हथियारबंद लोग मौके पर पहुंचे थे। इन लोगों ने विवादित जमीन पर लगी ज्वार की फसल को जबरन ट्रैक्टर चलाकर जोतना शुरू कर दिया था।

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जब दूसरे पक्ष यानी शिकायतकर्ता पक्ष के लोग इस अवैध गतिविधि का विरोध करने पहुंचे, तो हथियारबंद हमलावरों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया। आरोपियों ने शिकायतकर्ता पक्ष पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं और घातक हथियारों से मारपीट की। इस भीषण गोलीबारी और हिंसा में दो लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था।

पुलिस कार्रवाई, अदालती वारंट और आरोपी की गिरफ्तारी

घटना के तुरंत बाद थाना उचैन में एफआईआर संख्या 160/2017 दर्ज की गई थी। इस मामले में पुलिस ने हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा भड़काने, घातक हथियारों के साथ गैरकानूनी सभा बनाने और शारीरिक चोट पहुंचाने से संबंधित विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। मामले की विस्तृत जांच के दौरान पुलिस ने अब तक लगभग 35 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर दी है।

वारदात के बाद से ही चुम्मा उर्फ नवल किशोर गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने ठिकाने बदल रहा था। अदालत द्वारा उसके खिलाफ परमानेंट नॉन बेलेबल वारंट (स्थाई गैर-जमानती वारंट) जारी किए गए थे। क्राइम ब्रांच की एंटी गैंगस्टर स्क्वॉड ने तकनीकी विश्लेषण, मोबाइल सर्विलांस और मुखबिरों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर उसकी लगातार निगरानी की। आखिरकार, सटीक लोकेशन ट्रैकिंग के बाद पुलिस टीम ने मोहन गार्डन इलाके में छापेमारी कर आरोपी को दबोच लिया और कोर्ट के वारंट को एग्जीक्यूट किया।

दिल्ली और राजस्थान में दर्ज 12 आपराधिक मामले और पुलिस अभियान

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, चुम्मा उर्फ नवल किशोर का आपराधिक इतिहास काफी लंबा रहा है। उसके खिलाफ दिल्ली और राजस्थान के विभिन्न थानों में पहले से 12 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों में हत्या के प्रयास, मारपीट, आबकारी कानून के उल्लंघन और आर्म्स एक्ट से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।

दिल्ली पुलिस की ओर से राष्ट्रीय राजधानी में संगठित अपराध और भगोड़े अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई से न केवल वर्षों पुराना मामला सुलझाने में मदद मिली है, बल्कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सवाल-जवाब

चुम्मा उर्फ नवल किशोर को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
उसे 14 जुलाई 2017 को राजस्थान के भरतपुर में हुए सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड और जमीन विवाद मामले में गिरफ्तार किया गया है।
आरोपी को पुलिस ने कहाँ से पकड़ा है?
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एंटी गैंगस्टर स्क्वॉड ने आरोपी को दिल्ली के मोहन गार्डन इलाके से गिरफ्तार किया है।
आरोपी कितने सालों से फरार चल रहा था?
आरोपी वारदात के बाद से पिछले लगभग नौ सालों से पुलिस की पकड़ से लगातार बच रहा था।
आरोपी के खिलाफ पहले से कितने आपराधिक मामले दर्ज हैं?
आरोपी चुम्मा उर्फ नवल किशोर के खिलाफ दिल्ली और राजस्थान में हत्या के प्रयास, मारपीट और आर्म्स एक्ट समेत 12 मामले दर्ज हैं।
2017 के भरतपुर हत्याकांड में कितने लोग आरोपी हैं?
पुलिस जांच के बाद अदालत में करीब 35 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·12 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि भूमि विवाद किस प्रकार गहरी हिंसा और लंबे समय तक फरार रहने वाले अपराधियों को जन्म देते हैं। हालांकि पुलिस ने तकनीकी निगरानी से गिरफ्तारी की है, लेकिन समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से यह देखना महत्वपूर्ण है कि ज़मीन के कब्ज़े जैसे स्थानीय संघर्ष कैसे संगठित अपराध का रूप ले लेते हैं, जिससे शहरी सुरक्षा पर भी असर पड़ता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·12 दिन पहले

भरतपुर के 2017 के इस दोहरे हत्याकांड में नौ साल बाद हुई यह गिरफ्तारी कानून व्यवस्था और अंतर-राज्यीय पुलिस समन्वय की एक बड़ी सफलता है। कृषि भूमि के मालिकाना हक को लेकर हुए इस खूनी संघर्ष में तीन दर्जन के करीब आरोपियों पर शिकंजा कसा जाना और फरार अपराधियों का इस तरह दिल्ली जैसे महानगरों में छिपना यह दर्शाता है कि संगठित अपराध और भूमि विवादों से जुड़े मामलों में तकनीकी सर्विलांस और स्थायी गैर-जमानती वारंटों का प्रभावी क्रियान्वयन कितना आवश्यक है। आने वाले दिनों में यह गिरफ्तारी न्यायिक प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने और शेष आरोपियों पर कानूनी दबाव बनाने में अहम साबित होगी।

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·12 दिन पहले

भरतपुर के इस दोहरे हत्याकांड में नौ साल लंबी फरारी के बाद हुई यह गिरफ्तारी दर्शाती है कि संपत्ति विवाद किस हद तक खूनी संघर्ष में बदल सकते हैं। पुलिस रिकॉर्ड में 12 गंभीर मामलों और स्थायी गैर-जमानती वारंटों का सामना कर रहे इस आरोपी के पकड़े जाने से अदालती मुकदमों में तेजी आएगी और शेष अभियुक्तों पर शिकंजा कसेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·13 दिन पहले

भरतपुर के इस दोहरे हत्याकांड में तीन दर्जन से अधिक लोगों का शामिल होना और मुख्य आरोपी का नौ साल तक दिल्ली में छिपे रहना अंतर-राज्यीय अपराध तंत्र की पेचीदगियों को उजागर करता है। पुलिस के लिए अब चुनौती यह सुनिश्चित करने की होगी कि इस कड़े कानूनी शिकंजे के बीच सभी आरोपियों को सख्त सजा मिले और भूमि विवाद से जुड़े ऐसे मामलों में त्वरित न्याय हो सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·13 दिन पहले

यह मामला रेखांकित करता है कि कैसे अंतर-राज्यीय शरण स्थल अपराधियों के लिए लंबे समय तक कानून से छुपने का जरिया बनते हैं। दिल्ली और राजस्थान पुलिस के बीच अब बेहतर समन्वय की आवश्यकता है ताकि इस गिरفतारी को मजबूत अभियोजन में बदला जा सके और अदालत में सुनवाई के दौरान गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए त्वरित न्याय का मार्ग प्रशस्त हो सके।

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