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रामदयाल मुंडा की अनकही कहानी: तमाड़ के छोटे गांव से निकलकर अमेरिका तक लहराया परचमझारखंड
31 अग॰ 2026, 6:58 am (25 दिन पहले)· 2

रामदयाल मुंडा की अनकही कहानी: तमाड़ के छोटे गांव से निकलकर अमेरिका तक लहराया परचम

झारखंड के साधारण गांव में जन्में रामदयाल मुंडा ने अमेरिका में प्रोफेसर से लेकर संयुक्त राष्ट्र में देश का प्रतिनिधित्व तक का सफर तय किया। पद्मश्री से सम्मानित उनके जीवन और अनूठी लव स्टोरी के कई दिलचस्प पहलू हैं।

झारखंड की राजधानी रांची से करीब साठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित तमाड़ के दिउड़ी गांव में जन्मे डॉ रामदयाल मुंडा ने देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी समाज के अधिकारों की आवाज बुलंद की थी। एक सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले रामदयाल मुंडा ने अपनी मेहनत और मेधा के बल पर अमेरिका के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य किया, रांची विश्वविद्यालय के कुलपति पद की जिम्मेदारी संभाली, उच्च सदन यानी राज्यसभा में सांसद के रूप में अपनी सेवाएं दीं और संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनकी निजी जिंदगी और जीवन का सफर भी लोगों के बीच खासी चर्चा का केंद्र रहा है, जिसमें अमेरिका में हुई उनकी पहली शादी से लेकर वतन वापसी के बाद हुए उनके दूसरे विवाह तक की पूरी दास्तान शामिल है।

अमेरिका में शिक्षा और पहला विवाह

उच्च शिक्षा, अध्ययन और शोध कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए रामदयाल मुंडा ने विदेश का रुख किया था और वे अमेरिका चले गए। उन्होंने लगभग अठारह वर्षों तक अमेरिका में ही रहकर विभिन्न शोध कार्यों को अंजाम दिया और एक प्रोफेसर के रूप में विद्यार्थियों को शिक्षा दी। इसी दौरान अमेरिकी प्रवास के दौरान उनकी मुलाकात हेजेल एन्न लुत्ज नामक महिला से हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और आपसी स्नेह प्रगाढ़ होने के बाद उन्होंने वैवाहिक बंधन में बंधने का निर्णय लिया। चौदह दिसंबर 1972 को रामदयाल मुंडा और हेजेल एन्न लुत्ज ने विवाह कर लिया और एक नई शुरुआत की।

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भारत वापसी और वैवाहिक जीवन में बदलाव

वर्ष 1982 में रामदयाल मुंडा अमेरिका का अपना कार्यकाल समाप्त कर वापस भारत लौट आए और झारखंड की राजधानी रांची में बस गए। हालांकि, स्वदेश लौटने के कुछ समय बाद रामदयाल मुंडा और हेजेल एन्न लुत्ज के रिश्ते में दूरियां आने लगीं और आपसी समीकरण प्रभावित हुए। वक्त बीतने के साथ दोनों के रिश्ते में तनाव इस हद तक बढ़ा कि आखिरकार उनका संबंध टूट गया और दोनों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया। इस कानूनी अलगाव के बाद रामदयाल मुंडा ने झारखंड में ही रहकर अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करने का फैसला किया और दोबारा विवाह किया।

अट्ठाइस जून 1988 को रामदयाल मुंडा ने अमिता मुंडा के साथ अपना दूसरा विवाह संपन्न किया। इस दंपत्ति के घर एक पुत्र का जन्म हुआ जिसका नाम गुंजल इकिर मुंडा रखा गया। जीवन के अंतिम पड़ाव में वे गंभीर बीमारी से ग्रसित हो गए। करीब एक वर्ष तक कैंसर जैसी घातक बीमारी से कड़ा संघर्ष करने के बाद तीस सितंबर 2011 को रांची के अपोलो अस्पताल में रामदयाल मुंडा का निधन हो गया। उनके निधन के समय कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान को देखते हुए वर्ष 2010 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित सम्मान पद्मश्री से नवाजा गया था।

वर्तमान परिवार और पहली पत्नी से जुड़ाव

आज रामदयाल मुंडा के परिवार में उनकी पत्नी अमिता मुंडा, उनके पुत्र गुंजल इकिर मुंडा, उनकी पुत्रवधू और उनकी पोती शामिल हैं। यह पूरा परिवार राजधानी रांची में ही निवास करता है। दिलचस्प बात यह है कि रामदयाल मुंडा की पहली पत्नी हेजेल एन्न लुत्ज के साथ इस परिवार के संबंध आज भी बेहद प्रगाढ़ और मधुर बने हुए हैं। रामदयाल मुंडा के बेटे गुंजल इकिर मुंडा ने एक खास बातचीत में इस बात का जिक्र किया कि वे हेजेल एन्न लुत्ज को सम्मान के साथ बड़ी मां कहकर संबोधित करते हैं और दोनों परिवारों के बीच आत्मीय रिश्ते आज भी कायम हैं।

सवाल-जवाब

डॉ रामदयाल मुंडा का जन्म कहां हुआ था?
उनका जन्म राजधानी रांची से साठ किलोमीटर दूर तमाड़ के दिउड़ी गांव में हुआ था।
रामदयाल मुंडा को पद्मश्री से कब सम्मानित किया गया था?
कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2010 में पद्मश्री से नवाजा गया था।
उनकी पहली पत्नी का नाम क्या था?
उनकी पहली पत्नी का नाम हेजेल एन्न लुत्ज था, जिनसे उन्होंने अमेरिका में विवाह किया था।
उन्होंने दूसरा विवाह कब किया था?
उन्होंने अट्ठाइस जून 1988 को अमिता मुंडा के साथ दूसरा विवाह किया था।
रामदयाल मुंडा का निधन कब और कहां हुआ था?
कैंसर से जूझने के बाद तीस सितंबर 2011 को रांची के अपोलो अस्पताल में उनका निधन हुआ था।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·24 दिन पहले

रामदयाल मुंडा जैसे व्यक्तित्व केवल अकादमिक जगत तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे क्षेत्रीय अस्मिता और आदिवासी अधिकारों के राष्ट्रीय आंदोलनों की धुरी बन जाते हैं। तमाड़ के एक साधारण गांव से उठकर संयुक्त राष्ट्र तक देश का प्रतिनिधित्व करना और पद्मश्री प्राप्त करना यह साबित करता है कि जड़ें मजबूत हों तो अंतरराष्ट्रीय फलक पर भी ऊंचाई हासिल की जा सकती है। उनकी यह जीवन यात्रा इस बात का अध्ययन प्रस्तुत करती है कि कैसे एक बुद्धिजीवी वैश्विक अनुभवों को समेटकर अपनी माटी की संस्कृति और अधिकारों की लड़ाई से जुड़ सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·24 दिन पहले

रामदयाल मुंडा के जीवन का यह विधिक और व्यक्तिगत पहलू उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व के समानांतर एक मानवीय संघर्ष को उजागर करता है। विदेशी भूमि पर कानूनी रूप से वैवाहिक बंधन में बंधना और स्वदेश लौटने पर कानूनी अलगाव के बाद पुनः पारिवारिक जीवन की शुरुआत करना, यह दर्शाता है कि एक लोकनायक को भी व्यक्तिगत स्तर पर सामाजिक और भौगोलिक बदलावों के बीच कितनी जटिल कानूनी और मानसिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।

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