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रांची में सजा त्योहारी बाजार, डिजाइनर हैंडबैग और मिट्टी के गहनों की धूमझारखंड
17 सित॰ 2026, 12:12 am (8 दिन पहले)· 0

रांची में सजा त्योहारी बाजार, डिजाइनर हैंडबैग और मिट्टी के गहनों की धूम

त्योहारी सीजन के नजदीक आते ही रांची के बाजारों में पारंपरिक और आधुनिक कला का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। इस बार रेशमी मोतियों के हैंडबैग से लेकर मिट्टी और सीप के गहने खरीदारों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।

आगामी त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए बाजारों की रौनक अभी से बढ़ गई है। रांची के विभिन्न बाजारों और प्रदर्शनियों में एक से बढ़कर एक अनूठे और आकर्षक सामानों का नया कलेक्शन पहुंच चुका है। इस बार महिलाओं के बीच हस्तनिर्मित उत्पादों का जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है। पारंपरिक कला और आधुनिक फैशन का यह मेल इस बार की पूजा खरीदारी को बेहद खास बना रहा है। खरीदार बाजार में पारंपरिक से लेकर ट्रेंडी तक हर तरह के सामानों की तलाश कर रहे हैं।

समुद्री सीप और कपड़ों से बनी अनोखी चूड़ियां

इस बार नवरात्रि के खास मौके पर बाजार में ऐसी चूड़ियां आई हैं जो पारंपरिक चूड़ियों से बिल्कुल अलग हैं। इन चूड़ियों को तैयार करने में कपड़े और समुद्री सीप का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है। सीप की नक्काशी और कपड़े के मेल से बनी यह चूड़ियां देखने में बेहद खूबसूरत लगती हैं। इन चूड़ियों को पहनने के बाद एक अलग ही लुक मिलता है जो भीड़ से अलग दिखने में मदद करता है। इस डिजाइन की खास बात यह है कि इसके साथ मैचिंग नेकलेस भी बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं। सीप से बने इन गहनों को पहनकर आप इस बार के त्योहार पर अपना पारंपरिक और स्टाइलिश अंदाज दोनों दिखा सकती हैं।

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पकी हुई मिट्टी के पारंपरिक गहने

बाजार में इस बार मिट्टी से तैयार किए गए गहनों का नया चलन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पकी हुई मिट्टी से बने ये झुमके और गले के सेट देखने वालों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। इन गहनों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि जो भी इन्हें एक बार देखता है वह देखता ही रह जाता है। रांची के होटल रेडिसन ब्लू में लगी एग्जीबिशन में ये शानदार चीजें बिक रही हैं। इस प्रदर्शनी में स्टॉल संभाल रहीं पल्लवी बताती हैं कि इन मिट्टी के गहनों की कीमत बहुत ज्यादा नहीं है। ये खूबसूरत गहने आपको मात्र 100 रुपये की शुरुआती रेंज में आसानी से मिल जाते हैं।

पर्यावरण के अनुकूल और पारंपरिक पेंटिंग का मेल

पर्यावरण के प्रति जागरूक लोगों के लिए यह मिट्टी के गहने इस सीजन का सबसे बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं। अगर आप इको-फ्रेंडली जीवनशैली को बढ़ावा देना पसंद करती हैं तो इस पूजा में इन गहनों को जरूर आजमाएं। इन गहनों की खासियत यह है कि इन पर बहुत ही बारीक और सुंदर पारंपरिक पेंटिंग की जाती है। इनमें सोहराय और वर्ली जैसी पारंपरिक लोक कलाओं के छोटे-छोटे डिजाइन उकेरे जाते हैं। यह कलाकृतियां इन साधारण दिखने वाली मिट्टी की चीजों को बेहद खास और कलात्मक बना देती हैं।

हाथों से बने मोती के शानदार हैंडबैग

अगर आप बैग्स की शौकीन हैं तो इस बार मोती से तैयार किए गए हैंडबैग आपकी पसंद बन सकते हैं। इन बैग्स की सबसे बड़ी खूबी यह है कि ये पूरी तरह से हैंडवर्क से बनाए जाते हैं। इनमें किसी भी प्रकार के मशीन के काम का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। रांची के रेडिसन ब्लू एग्जीबिशन में इन बैग्स का खूबसूरत कलेक्शन देखने को मिल रहा है। इस बारे में जानकारी देते हुए बैग बेच रही सुषमा बताती हैं कि ये सारे उत्पाद उनके अपने हाथों से तैयार किए जाते हैं। एक-एक मोती को करीने से सजाकर सुंदर डिजाइन का रूप दिया जाता है।

हैंडमेड बैग्स की रेंज और खासियत

सुषमा आगे बताती हैं कि इन बैग्स को बनाने में जरा भी मशीन की मदद नहीं ली जाती है और कारीगर खुद अपने हाथों से इन्हें गढ़ते हैं। इन खूबसूरत हैंडबैग्स की कीमत 250 रुपये से शुरू होकर 2000 रुपये तक जाती है। बाजार में आपको इन बैग्स में कई तरह के डिजाइन और रंगों के विकल्प मिल जाते हैं। ये बैग पूरी तरह से ओरिजिनल होते हैं और इनकी फिनिशिंग देखने लायक होती है। हाथ से बने होने के कारण इनकी खूबसूरती बाजार में मिलने वाले महंगे से महंगे ब्रांडेड बैग्स से बिल्कुल अलग और अनूठी नजर आती है। आप अपनी पसंद और कपड़ों के रंग के हिसाब से इनसे मैचिंग बैग चुन सकती हैं।

बनारसी साड़ियों की खास मांग

त्योहारों के इस सीजन को और भी ज्यादा खास बनाने के लिए बाजारों में विशेष बनारसी साड़ियां भी उतारी गई हैं। इन साड़ियों की कीमत बाजार में 6000 रुपये तक तय की गई है। इस स्टॉल पर मौजूद संदीप बताते हैं कि इन साड़ियों को खासतौर पर बनारस से मंगवाया गया है। जो कोई भी इन साड़ियों को एक बार पहनता है वह इसका मुरीद हो जाता है। इन पर किया गया काम पूरी तरह से असली और शत-प्रतिशत हैंड वर्क है। दुकानदारों का दावा है कि आने वाले 30 से 40 सालों तक इन साड़ियों की चमक और गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा और ये खराब नहीं होंगी। महिलाओं के बीच इन साड़ियों की डिमांड इन दिनों काफी ज्यादा बनी हुई है।

सवाल-जवाब

रांची में हस्तनिर्मित मिट्टी के गहने कहां मिल रहे हैं?
होटल रेडिसन ब्लू में लगी एग्जीबिशन में मिट्टी के गहने उपलब्ध हैं।
मिट्टी के गहनों की शुरुआती कीमत कितनी है?
मिट्टी के गहने लगभग 100 रुपये की रेंज में आसानी से मिल जाते हैं।
मोती के हैंडबैग की कीमत क्या है?
हाथ से बने मोती के हैंडबैग की कीमत 250 रुपये से शुरू होकर 2000 रुपये तक जाती है।
बनारसी साड़ियों की कीमत कितनी है?
बाजार में विशेष बनारसी साड़ियों की कीमत 6000 रुपये तक है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·8 दिन पहले

त्योहारी सीजन में स्थानीय हस्तशिल्प और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की बढ़ती मांग केवल सांस्कृतिक उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ता व्यवहार और सूक्ष्म अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत देती है। किफायती कीमतों पर स्वदेशी कला और स्थानीय कारीगरों के उत्पादों की खपत घरेलू बाजार में नकदी प्रवाह को बढ़ाती है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच, यह प्रवृत्ति दिखाती है कि कैसे पारंपरिक कौशल और स्थानीय मांग मिलकर क्षेत्रीय खुदरा क्षेत्र और रोजगार को गति दे सकते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

त्योहारों के दौरान रांची के बाजारों में सोहराय जैसी स्थानीय लोक कला और हस्तनिर्मित मिट्टी के गहनों की बढ़ती मांग जमीनी स्तर पर सूक्ष्म अर्थव्यवस्था और महिला उद्यमियों को मिलने वाले बढ़ावा को दर्शाती है। नीतिगत दृष्टिकोण से, ऐसी प्रदर्शनियों और हस्तशिल्प के प्रचार से न केवल पारंपरिक कला का संरक्षण होता है, बल्कि स्थानीय रोजगार और स्वदेशी कारीगरों की आत्मनिर्भरता भी मजबूत होती है। यह रुझान पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली और स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की दिशा में एक सकारात्मक बदलाव है।

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

अर्जुन की बात से आगे बढ़ते हुए, आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो 100 रुपये जैसी सुलभ शुरुआती कीमत पर हस्तनिर्मित और इको-फ्रेंडली उत्पादों की उपलब्धता त्योहारी सीजन में उपभोक्ता खर्च को गति देती है। टियर-2 शहरों में पारंपरिक लोक कला और स्वदेशी कारीगरी पर आधारित यह हाइपर-लोकल सप्लाई चेन आयातित प्लास्टिक सामानों पर निर्भरता कम करती है। जब स्थानीय प्रदर्शनियों के ज़रिए असंघटित क्षेत्र के कारीगर सीधे ग्राहकों से जुड़ते हैं, तो फेस्टिव रिटेल साइकिल का वास्तविक आर्थिक लाभ जमीनी स्तर पर स्थानांतरित होता है, जो टिकाऊ घरेलू खपत के लिए एक मजबूत संकेत है।

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

त्योहारी सीजन में इस तरह के हस्तनिर्मित और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों का बाजार में आना यह दर्शाता है कि उपभोक्ता अब पारंपरिक कलाओं और सतत विकास को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। रांची की इस प्रदर्शनी में सोहराय और वर्ली जैसी लोक कलाओं का मिट्टी के गहनों पर उभरना क्षेत्रीय कारीगरों के लिए बड़े आर्थिक अवसर पैदा कर रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा और पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा मिलेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

एक क्राइम संवाददाता के रूप में मेरा मानना है कि त्योहारी सीजन में लगने वाली ऐसी बड़ी प्रदर्शनियों और बाजारों में भीड़ का प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। रेडिसन ब्लू जैसी जगहों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और सुचारू यातायात प्रबंधन बहुत आवश्यक है।

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