बाजारों में मिलने वाली मिलावटी सब्जियों, फलों और खाद्य उत्पादों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच बड़ी संख्या में लोग अब खुद अपनी हरी सब्जियां उगाने लगे हैं। घरों की छतों, बालकनी और छोटे बगीचों में सीमित जगह होने के बावजूद लोग फलदार पौधे और सब्जियां लगा रहे हैं। हालांकि, घर पर उगाई जा रही इन फसलों में कौन सा पोषण देना चाहिए और कौन सी खाद उपयुक्त होती है, इसे लेकर अधिकांश बागवानों के पास सटीक जानकारी का अभाव रहता है। कई बार लोग कीटों से बचाव या बेहतर पैदावार की जल्दी में रासायनिक कीटनाशकों और केमिकल उर्वरकों का छिड़काव कर देते हैं। इससे भी अधिक गंभीर बात यह है कि रसायनों के इस्तेमाल के तुरंत अगले दिन ही पौधों से सब्जियां तोड़कर रसोई में पकाने के लिए इस्तेमाल कर ली जाती हैं, जिससे परिवार की सेहत पर सीधा खतरा मंडराने लगता है।
रासायनिक छिड़काव के तुरंत बाद तुड़ाई से बचें
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरएस बाना के अनुसार घरेलू बागवानी में रासायनिक तत्वों के अनियंत्रित इस्तेमाल से बचना बेहद जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति अपनी छत, बालकनी या क्यारियों में सब्जियां उगा रहा है और रासायनिक स्प्रे का इस्तेमाल करता है, तो उसे शाम के समय दवा छिड़कने के ठीक अगली सुबह सब्जियां तोड़ने की गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। रासायनिक दवाओं के अवशेष पौधों की पत्तियों और फलों की सतह पर कई दिनों तक सक्रिय रहते हैं। ऐसी सब्जियों को तुरंत खाने से रासायनिक अंश सीधे इंसानी शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। यदि कभी विवशतावश किसी केमिकल का छिड़काव किया भी गया हो, तो सब्जियों की तुड़ाई छिड़काव के कुछ दिन बीत जाने के बाद ही की जानी चाहिए ताकि उसका जहरीला असर काफी हद तक कम हो सके।
रसोई के कचरे और सूखी पत्तियों से घर पर बनाएं प्राकृतिक खाद
डॉ. आरएस बाना का सुझाव है कि घरेलू बागवानी में पैदावार चाहे कम हो या अधिक, पौधों को हमेशा जैविक खाद ही दी जानी चाहिए। जैविक खाद तैयार करना बेहद सरल है और इसे घर बैठे आसानी से बनाया जा सकता है। हमारे घरों की रसोई से हर दिन निकलने वाला गीला कचरा, जैसे विभिन्न फलों और हरी सब्जियों के छिलके, प्राकृतिक पोषण का एक बेहतरीन स्रोत होते हैं। इसके अतिरिक्त बगीचे और गमलों से लगातार गिरने वाली सूखी पत्तियों को एकत्र करके भी उच्च गुणवत्ता वाली कंपोस्ट खाद तैयार की जा सकती है। जब इस तरह के घरेलू कचरे को सड़ाकर खाद के रूप में बालकनी और छत की क्यारियों में डाला जाता है, तो पौधों को बिना किसी हानिकारक दुष्प्रभाव के संपूर्ण प्राकृतिक पोषक तत्व मिल जाते हैं।
जैविक खाद के विविध विकल्प और सरकारी केंद्रों से उपलब्धता
जैविक खाद कई रूपों में उपलब्ध होती है। इसमें गोबर से तैयार की जाने वाली पारंपरिक खाद, सूखी पत्तियों की खाद तथा किचन वेस्ट कंपोस्ट प्रमुख हैं। यदि किसी के पास घर पर खाद तैयार करने का समय या सुविधा नहीं है, तो वे सीधे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान यानी पूसा के बिक्री केंद्रों से प्रमाणित जैविक खाद खरीद सकते हैं। पूसा संस्थान में विभिन्न प्रकार की उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद सरकारी दरों पर सुलभ कराई जाती है। इसके अलावा आम लोग अपने नजदीकी किसी भी सरकारी कृषि केंद्र या प्रमाणित नर्सरी से भी जांच-परखकर उचित गुणवत्ता वाली जैविक खाद ले सकते हैं। इस प्रकार की प्राकृतिक खादों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी लंबे समय तक सुरक्षित बनी रहती है।
सर्दियों में प्रदूषण से बचाव और इनडोर प्लांट्स की देखभाल
सर्दियों के मौसम में वातावरण में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने लगता है। ऐसे समय में घरों के भीतर की आबोहवा को साफ और शुद्ध बनाए रखने के लिए लोग तरह-तरह के इनडोर प्लांट्स लगाना पसंद करते हैं। डॉ. आरएस बाना ने स्पष्ट किया कि घर के भीतर रखे जाने वाले इन वायु-शोधक पौधों में भी रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर केवल जैविक खाद का ही प्रयोग किया जाना चाहिए। प्राकृतिक खाद से इनडोर पौधों की जड़ों को निरंतर संतुलित पोषण प्राप्त होता रहता है, जिससे उनकी वृद्धि अच्छी होती है। इससे पौधे लंबे समय तक हरे-भरे, स्वस्थ और तरोताजा बने रहते हैं, जिससे घर के भीतरी वातावरण को निरंतर स्वच्छ रखने में मदद मिलती है।



















