राजस्थान के तीन प्रमुख शहरों जयपुर, जोधपुर और कोटा में नगर निगम महापौर पद के लिए मतदान प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके अलावा कोटा जिले की सुकेत नगरपालिका के अध्यक्ष पद पर भी आज ही मतदान कराया जा रहा है। इन चारों स्थानीय निकायों के कई वार्डों में दोबारा मतदान कराए जाने के कारण पहले से तय 21 सितंबर को महापौर और अध्यक्ष का चुनाव संपन्न नहीं हो सका था। पुनर्मतदान की औपचारिकता पूरी होने के बाद राज्य निर्वाचन तंत्र अब प्रमुख पदों पर नई कमान सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।
जयपुर में चुनावी कार्यक्रम और सीधा मुकाबला
जयपुर नगर निगम में महापौर पद के लिए मतदान सुबह 10 बजे प्रारंभ होकर दोपहर 2 बजे तक चलेगा। चुनाव प्रक्रिया में जनता द्वारा चुने गए कुल 150 पार्षद अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। मतदान की समय सीमा समाप्त होते ही मतगणना की जाएगी और आज ही परिणाम घोषित कर जयपुर के नए महापौर के नाम पर मुहर लगा दी जाएगी। मैदान में प्रत्याशियों की स्थिति नामांकन वापसी के बाद बिल्कुल साफ हो चुकी है, जहां भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार सुनील कोठारी और कांग्रेस की प्रत्याशी सुनीता मावर के बीच सीधी टक्कर है। इस चुनाव के अगले चरण में 26 सितंबर को उपमहापौर (डिप्टी मेयर) पद के लिए मतदान कराया जाएगा।
जयपुर नगर निगम का सियासी गणित और जादुई आंकड़ा
जयपुर के 150 वार्डों के सदन में बहुमत हासिल कर महापौर पद जीतने के लिए कम से कम 76 वोटों की आवश्यकता है। दलीय स्थिति पर नजर डालें तो भाजपा के पास 78 निर्वाचित पार्षद हैं, जो निर्धारित बहुमत से महज दो वोट अधिक हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस के खाते में 57 पार्षद हैं, जबकि 15 निर्दलीय पार्षद सदन में मौजूद हैं। यदि कांग्रेस सभी 15 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करने में सफल भी हो जाती है, तो उसका आंकड़ा 72 तक ही पहुंचेगा, जो बहुमत के आंकड़े से 4 वोट कम रह जाता है।
क्रॉस वोटिंग की संभावना और गुप्त मतदान की चुनौती
सदन में गुप्त मतदान की व्यवस्था होने के चलते दोनों ही दलों के लिए यह मुकाबला बेहद संवेदनशील बना हुआ है। कांग्रेस की रणनीति 15 निर्दलीय पार्षदों को साधने के साथ ही भाजपा खेमे में संभावित सेंधमारी और क्रॉस वोटिंग पर टिकी है। वहीं भाजपा के लिए अपने सभी 78 पार्षदों को एकजुट रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है, क्योंकि मात्र दो वोटों की बढ़त के कारण एक-एक वोट निर्णायक साबित हो सकता है। 15 निर्दलीय पार्षदों का रुख और मतदान पेटी में पड़ने वाले गुप्त वोट ही तय करेंगे कि जयपुर नगर निगम की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।





















