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रेखा गुप्ता का कड़ा कदम, मौजपुर के उस प्ले स्कूल पर लगा ताला जहां मासूम से हुई थी दरिंदगीदिल्ली
31 अग॰ 2026, 11:58 pm (14 दिन पहले)· 2

रेखा गुप्ता का कड़ा कदम, मौजपुर के उस प्ले स्कूल पर लगा ताला जहां मासूम से हुई थी दरिंदगी

दिल्ली में साढ़े 3 साल के बच्चे के साथ मारपीट के मामले में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सख्त रुख अपनाते हुए मौजपुर स्थित प्ले स्कूल को सील करवा दिया है। जांच में कई गंभीर खामियां मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

राजधानी दिल्ली में बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक सनसनीखेज मामले में तुरंत और कड़ा एक्शन लेते हुए एक प्ले स्कूल पर ताला लगवा दिया है। यह वही संस्थान है जहां हाल ही में एक मासूम बच्चे के साथ मारपीट की दिल दहलाने वाली घटना सामने आई थी। इस मामले में माता-पिता की शिकायत मिलने पर दिल्ली पुलिस ने पहले ही कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी थी और अब प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा कदम उठाया गया है।

मौजपुर के स्कूल पर गाज और जांच टीम का गठन

दिल्ली सरकार ने मौजपुर स्थित मकून्स प्ले स्कूल को पूरी तरह सील कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सीधे निर्देशों के बाद यह कार्रवाई अमल में लाई गई। इस स्कूल का एक सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक हुआ था जिसमें साढ़े तीन साल के बच्चे के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार साफ दिखाई दे रहा था। इस गंभीर वाकये के प्रकाश में आने के बाद शिक्षा निदेशालय ने फौरन संज्ञान लिया। शिक्षा विभाग के डेप्युटी डायरेक्टर की अगुवाई में एक विशेष जांच समिति का गठन कर दिया गया है जिसे दो दिन के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी है। जांच के इसी सिलसिले में अब मुख्यमंत्री के आदेश पर संस्थान को सील करने का बड़ा कदम उठाया गया है।

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एसडीएम की जांच रिपोर्ट में सामने आईं चौंकाने वाली अनियमितताएं

प्रशासनिक जांच के दौरान मौजपुर के इस प्ले स्कूल में सुरक्षा और नियमों की भारी अनदेखी का खुलासा हुआ है। एसडीएम की रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल संचालन में कई गंभीर खामियां बरती जा रही थीं, जो बच्चों की जान के लिए बड़ा खतरा बन सकती थीं

  • संस्थान के पास दमकल विभाग की एनओसी यानी फायर एनओसी नहीं थी।
  • भवन का कोई बिल्डिंग कंप्लायंस सर्टिफिकेट नहीं पाया गया।
  • परिसर के भीतर किसी भी प्रकार के इमरजेंसी एग्जिट यानी आपातकालीन निकास का प्रबंध नहीं था।
  • आपातकालीन आवाजाही के लिए बनी सीढ़ियों को पूरी तरह बंद कर दिया गया था।
  • स्कूल परिसर के अंदर बिना किसी वैध अनुमति के अवैध रूप से बोरवेल लगाया गया था।
  • कमरों के भीतर पर्याप्त वेंटिलेशन या हवा आने-जाने की कोई व्यवस्था नहीं थी।
  • बच्चों की कक्षाएं बेसमेंट के भीतर संचालित की जा रही थीं।
  • परिसर में किचन तो चलाया जा रहा था लेकिन खाना बनाने के लिए व्यावसायिक के बजाय घरेलू गैस सिलेंडर का इस्तेमाल किया जा रहा था।
  • इन्हीं तमाम गंभीर सुरक्षा कमियों और नियमों की धज्जियां उड़ाने के कारण इस प्ले स्कूल पर सीलिंग की कार्रवाई की गई है।

क्या था पूरा मामला और कैसे हुआ था खुलासा?

उत्तर पूर्वी दिल्ली के इस प्ले स्कूल में जो हुआ उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। कुछ समय पहले यह बात सामने आई थी कि एक साढ़े 3 साल के बच्चे के साथ प्ले स्कूल में मारपीट और बदसलूकी की गई है। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था। परिजनों को इस खौफनाक सच्चाई का पता तब चला जब बच्चे ने लगातार कान में तेज दर्द होने की शिकायत की। जब वे बच्चे को डॉक्टर के पास लेकर गए तो मेडिकल जांच में पता चला कि मासूम के दोनों कानों के पर्दे सूजे हुए हैं।

इसके बाद गुस्से और चिंता से भरे माता-पिता स्कूल पहुंचे और प्रबंधन से जवाब मांगा। जब उन्होंने स्कूल के सीसीटीवी फुटेज को खुद देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि उसमें बच्चे के साथ मारपीट साफ नजर आ रही थी। इसके तुरंत बाद परिजनों ने दिल्ली पुलिस से संपर्क कर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में पोक्सो एक्ट के तहत संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपी आया को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था और अब प्रशासनिक कार्रवाई के तहत स्कूल की इमारत को भी सील कर दिया गया है।

सवाल-जवाब

दिल्ली के किस प्ले स्कूल को सील किया गया है?
मौजपुर स्थित मकून्स प्ले स्कूल को सील किया गया है।
यह कार्रवाई किसने और किसके आदेश पर की?
यह कार्रवाई दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के आदेश पर की गई है।
बच्चे के साथ हुई घटना का खुलासा कैसे हुआ?
बच्चे ने कान में दर्द की शिकायत की और डॉक्टर को दिखाने पर दोनों कानों के पर्दे सूजे हुए मिले, जिसके बाद परिजनों ने स्कूल का सीसीटीवी देखा।
पुलिस ने इस मामले में क्या कदम उठाया है?
दिल्ली पुलिस ने पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपी आया को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है।
एसडीएम की जांच में स्कूल में कौन सी मुख्य कमियां पाई गईं?
स्कूल के पास फायर एनओसी, बिल्डिंग कंप्लायंस और इमरजेंसी एग्जिट नहीं थे, साथ ही बेसमेंट में कक्षाएं चलाई जा रही थीं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Meera Joshi@meera-joshi·13 दिन पहले

एक साढ़े तीन साल के बच्चे के साथ हुई इस हिंसा और स्कूल में मिली गंभीर सुरक्षा खामियों से यह स्पष्ट होता है कि बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए सुरक्षित माहौल कितना जरूरी है। जब शिक्षण संस्थानों में ही इस तरह की अमानवीयता और प्रशासनिक लापरवाही बरती जाती है, तो बच्चों और उनके अभिभावकों पर गहरा मानसिक आघात पहुंचता है। इस घटना से यह सबक मिलता है कि बच्चों की सुरक्षा और वेलnes से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे त्रासद मानसिक और शारीरिक शोषण को रोका जा सके।

Arjun Mehta@arjun-mehta·14 दिन पहले

यह घटना सिर्फ एक स्कूल की लापरवाही नहीं, बल्कि दिल्ली के अनियोजित शिक्षण संस्थानों में नियमित प्रशासनिक ऑडिट की विफलता को दर्शाती है। मुख्यमंत्री के इस कड़े कदम से स्पष्ट है कि बाल सुरक्षा के मामलों में अब शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी। हालांकि, केवल सीलिंग पर्याप्त नहीं है; भविष्य में ऐसे अवैध परिसरों को शुरू होने से रोकने के लिए शिक्षा निदेशालय और नगर निगम को एक साझा निगरानी तंत्र विकसित करना होगा, ताकि बच्चों की जान जोखिम में न पड़े।

Sophie Laurent@sophie-laurent·14 दिन पहले

अर्जुन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह प्रशासनिक कार्रवाई यूरोपीय मानकों की तरह 'प्रिवेंटिव ऑडिट' यानी एहतियाती जांच की अनिवार्यता को रेखांकित करती है। जब तक नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर लाइसेंस रद्द करने और भारी वित्तीय दंड जैसे कड़े प्रतिबंध नहीं लगेंगे, तब तक केवल सीलिंग से ऐसे अवैध परिसरों का संचालन नहीं रुकेगा। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय निकायों को जवाबदेह बनाना होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 दिन पहले

यह प्रशासनिक कार्रवाई दिखाती है कि बच्चों की सुरक्षा और अवैध निर्माण पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। एसडीएम रिपोर्ट में फायर एनओसी, बेसमेंट में कक्षाएं और घरेलू एलपीजी का उपयोग जैसी जो गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, वे सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि आपराधिक उपेक्षा हैं। पुलिस की आपराधिक जांच और प्रशासन द्वारा संस्थान को सील किए जाने के बाद अब यह देखना अहम होगा कि ऐसे अनधिकृत स्कूलों को बिना जांच के लाइसेंस देने वाले अधिकारियों पर क्या कानूनी गाज गिरती है।

Rohan Verma@rohan-verma·14 दिन पहले

यह प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि राजधानी के रिहायशी इलाकों में चल रहे अधिकांश प्ले स्कूल बिना मानकों के संचालित हो रहे हैं। केवल एक संस्थान पर ताला लगने से समस्या का समाधान नहीं होगा। यह घटना स्पष्ट करती है कि शिक्षा विभाग और स्थानीय निकायों को केवल शिकायतों के आधार पर जागने के बजाय नियमित औचक निरीक्षण की व्यवस्थाक करनी होगी, ताकि मासूमों की जान जोखिम में डालने वाले ऐसे अन्य अवैध परिसरों पर भी समय रहते शिकंजा कसा जा सके।

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