उत्तर प्रदेश के चर्चित माफिया और समाजवादी पार्टी के नेता अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की 6 अगस्त 2026 को हुई एक भीषण कार दुर्घटना में मौत हो गई। इस दुखद हादसे के बाद राज्य की राजनीति और कानून व्यवस्था के गलियारों में अतीक अहमद के पुराने साम्राज्य की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। इससे पहले 13 अप्रैल 2023 को अतीक के एक अन्य बेटे असद अहमद की पुलिस एनकाउंटर में मौत हो चुकी थी। अतीक की खुद की मौत को भी अब तीन साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन उसके परिवार द्वारा भय और आतंक के दम पर खड़े किए गए हजारों करोड़ रुपये के अवैध कारोबार और वित्तीय साम्राज्य के आंकड़े आज भी लोगों को हैरान कर रहे हैं। इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अपराध की दुनिया से अतीक ने कितना बड़ा आर्थिक संजाल तैयार किया था।
हलफनामे में 25 करोड़ और हकीकत में 11300 करोड़ की संपत्ति
अतीक अहमद के आधिकारिक और गैर-कानूनी वित्तीय साम्राज्य के बीच का अंतर बेहद चौंकाने वाला रहा है। जब अतीक अहमद ने साल 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए अपना चुनावी हलफनामा दाखिल किया था, तब उसने अपनी कुल घोषित संपत्ति लगभग 25 करोड़ रुपये दर्शायी थी। हालांकि, अतीक की मौत के बाद जब विभिन्न जांच एजेंसियों ने उसके वित्तीय लेन-देन और बेनामी संपत्तियों की गहन पड़ताल शुरू की, तो सामने आए तथ्यों ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। वित्तीय जांच के अनुमानों के अनुसार, अतीक और उसके परिवार के पास कुल मिलाकर लगभग 11300 करोड़ रुपये की नेट वर्थ मौजूद थी, जो उसकी घोषित संपत्ति से कई सौ गुना अधिक थी।
जांच एजेंसियों की रिपोर्टों के मुताबिक अतीक अहमद का आपराधिक सिंडिकेट हर साल लगभग 1200 करोड़ रुपये की अवैध कमाई करता था। इस काली कमाई के मुख्य जरिया अवैध सरकारी ठेके हथियाना, व्यापारियों और बिल्डरों से भारी फिरौती वसूलना तथा कीमती जमीनों पर जबरन कब्जा करना था। अतीक और उसके करीबियों ने रियल एस्टेट के कारोबार में अपना सबसे बड़ा प्रभुत्व स्थापित कर रखा था। विशेष रूप से प्रयागराज, कौशांबी, लखनऊ और नोएडा के रियल एस्टेट बाजारों में अतीक के परिवार ने अवैध रूप से भारी निवेश किया था और कई भूखंडों पर कब्जा जमाया था।
17 साल की उम्र से शुरुआत और 5 बार विधायक-सांसद बनने का सफर
अतीक अहमद ने महज 17 साल की उम्र में साल 1979 के दौरान अपराध की दुनिया में पहला कदम रखा था। इसके बाद उसने अगले कई दशकों तक उत्तर प्रदेश में अपने संगठित अपराध का सिक्का चलाया। साल 1989 में जब उसने क्षेत्र के प्रमुख कॉरपोरेट चांद बाबा की हत्या कर दी, तब उसका नाम पहली बार बड़े पैमाने पर सुर्खियों में आया। इसी हत्याकांड के बाद अतीक ने राजनीति में सीधे प्रवेश किया और इलाहाबाद के पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र से पहली बार चुनाव मैदान में उतरा। इसके बाद वह लगातार 5 बार विधायक और सांसद के रूप में चुना गया, जिससे उसके आपराधिक नेटवर्क को राजनीतिक संरक्षण और ताकत मिलती रही।
अतीक अहमद ने अपने आपराधिक कारोबार की शुरुआत प्रयागराज के चकिया इलाके से की थी। देखते ही देखते उसकी दहशत पूरे प्रयागराज में फैल गई। जैसे-जैसे उसका डर बढ़ता गया, वैसे-वैसे उसका अवैध कारोबार प्रयागराज से निकलकर कौशांबी, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के नोएडा तक फैल गया। अतीक और उसके परिवार के सदस्यों पर हत्या, रंगदारी, अपहरण और जमीन कब्जे जैसे कुल मिलाकर लगभग 160 आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।
योगी सरकार में पतन और 11684 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही अतीक अहमद के संगठित आपराधिक साम्राज्य का पतन तेजी से शुरू हुआ। राज्य प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अतीक के आर्थिक तंत्र पर कड़ा प्रहार किया। उत्तर प्रदेश के एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार के अनुसार, अतीक अहमद की गिरफ्तारी और उसके बाद शुरू की गई व्यापक कानूनी कार्रवाइयों के तहत जांच एजेंसियों ने अब तक लगभग 11684 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों को कुर्क और जब्त कर लिया है।
सरकार द्वारा जब्त की गई संपत्तियों में मुख्य रूप से प्रयागराज, लखनऊ, कौशांबी और नोएडा में स्थित महंगी जमीनें, व्यावसायिक इमारतें और बेनामी संपत्तियां शामिल हैं। भले ही अतीक अहमद की मौत हो चुकी है और उसके बेटों असद अहमद एवं अबान अहमद की अलग-अलग हादसों में जान जा चुकी है, लेकिन उसके द्वारा निर्मित 11300 करोड़ रुपये के अवैध साम्राज्य पर पुलिस और प्रशासन की जब्ती की कार्रवाई आज भी जारी है।



















