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सीतापुर में पेड़ की डाली हटाते वक्त बाप-बेटे को लगा करंट, दोनों की जान गईउत्तर प्रदेश
6 सित॰ 2026, 3:50 pm (6 दिन पहले)· 2

सीतापुर में पेड़ की डाली हटाते वक्त बाप-बेटे को लगा करंट, दोनों की जान गई

यूपी के सीतापुर में पेड़ की टूटी डाली बिजली के तार पर गिरने के बाद उसे हटाने के दौरान बेटे और फिर उसे बचाने पहुंचे पिता की करंट लगने से मौत हो गई।

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में रविवार को बिजली के करंट ने एक ही परिवार के पिता और बेटे की जान ले ली। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया और घर में मातम पसर गया।

पेड़ की टूटी डाली से शुरू हुआ हादसा

यह हादसा सकरन थाना क्षेत्र के बेलवा बसहिया गांव का है। यहां रहने वाले गीतेश मिश्रा के घर के ठीक सामने एक पेड़ लगा हुआ है, जिसके पास से बिजली की एलटी लाइन गुजरती है। रविवार को इसी पेड़ पर एक बंदर चढ़ गया, जिसके चलते पेड़ की एक डाली टूटकर बिजली के तार पर जा गिरी। तार पर गिरी इस डाली को हटाने के लिए गीतेश मिश्रा के बेटे पीयूष आगे बढ़े, लेकिन डाली को छूते ही वह करंट की चपेट में आ गए और जमीन पर गिर पड़े।

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बेटे को बचाने दौड़े पिता की भी गई जान

बेटे को जमीन पर गिरा देख पिता गीतेश उसे बचाने के लिए दौड़ पड़े। पीयूष को बिजली के तार से छुड़ाने के दौरान वह खुद भी करंट की चपेट में आ गए। देखते ही देखते पिता-पुत्र दोनों करंट की चपेट में आकर वहीं गिर गए। यह मंजर देख आसपास खड़े लोग मौके की तरफ दौड़े और तुरंत बिजली विभाग के साथ-साथ एंबुलेंस को भी सूचना दी। दोनों को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र सांडा ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद पिता-पुत्र दोनों को मृत घोषित कर दिया।

पुलिस पहुंची, पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए शव

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने दोनों शवों का पंचनामा भरकर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार ने बताया, "शवों का पंचनामा करके पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, तहरीर मिलने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।" गांव में इस हादसे के बाद से मातम का माहौल है और परिजनों को इस अचानक हुए नुकसान से उबरने में वक्त लगेगा।

उसी दिन देश में करंट लगने की और घटनाएं सामने आईं

सीतापुर के इस हादसे से पहले बदायूं में भी करंट लगने की एक बड़ी घटना हुई थी, जहां हाईटेंशन लाइन से कांवड़ियों का डीजे टकरा गया था। इससे करंट लगने से 7 बच्चे झुलस गए और एक युवक की मौत हो गई थी। डीजे का लाउडस्पीकर हाईटेंशन लाइन की चपेट में आते ही ट्रॉली में करंट दौड़ गया था और तेज धमाके के साथ लपटें उठने लगी थीं, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया था। इसी दिन महाराष्ट्र के रायगड जिले के पनवेल से भी खबर आई कि दही हांडी कार्यक्रम के दौरान करंट लगने से पांच लोग घायल हो गए। फिलहाल सभी घायलों का इलाज किया जा रहा है।

सवाल-जवाब

यह हादसा कहां हुआ?
यह हादसा उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के सकरन थाना क्षेत्र के बेलवा बसहिया गांव में हुआ।
हादसे में किसकी मौत हुई?
गीतेश मिश्रा और उनके बेटे पीयूष की करंट लगने से मौके पर ही मौत हो गई।
हादसा कैसे शुरू हुआ?
एक बंदर के पेड़ पर चढ़ने से डाली टूटकर बिजली की एलटी लाइन पर गिर गई, जिसे हटाते वक्त पीयूष करंट की चपेट में आ गए।
पिता की मौत कैसे हुई?
बेटे को करंट लगते देख पिता गीतेश उसे बचाने दौड़े और तार से छुड़ाने के दौरान खुद भी करंट की चपेट में आ गए।
दोनों को कहां ले जाया गया?
दोनों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र सांडा ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
पुलिस ने शवों का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया और तहरीर मिलने पर आगे की कार्रवाई करने की बात कही।
उसी दिन और कहां करंट लगने की घटनाएं हुईं?
उसी दिन बदायूं में हाईटेंशन लाइन से डीजे टकराने पर 7 बच्चे झुलसे और एक युवक की मौत हुई, वहीं महाराष्ट्र के पनवेल में दही हांडी के दौरान करंट लगने से पांच लोग घायल हुए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

सीतापुर की यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के रख-रखाव की गंभीर अनदेखी को उजागर करती है। एलटी लाइनों के पास बिना किसी ट्रिमिंग के खड़े पेड़ और बंदरों की आवाजाही अक्सर ऐसे जानलेवा हादसों को न्योता देती है। इस मामले में स्थानीय विद्युत विभाग की लापरवाही और सुस्त प्रतिक्रिया पर जांच बैठनी चाहिए। साथ ही, बदायूं जैसी घटनाओं को देखते हुए प्रशासन को त्यौहारों या सार्वजनिक आयोजनों से पहले हाईटेंशन और एलटी लाइनों की सुरक्षा का व्यापक ऑडिट कराना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि इस तरह की अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह मामला मात्र आकस्मिक दुर्घटना नहीं बल्कि भारतीय विद्युत अधिनियम और सुरक्षा मानकों के क्रियान्वयन की जमीनी विफलता का परिदृश्य है। ग्रामीण इलाकों में बिजली के तारों के नजदीक अनियंत्रित पेड़ों की छांटाई के लिए कोई नियमित तंत्र सक्रिय नहीं दिखता। विधिक दृष्टिकोण से, यदि स्थानीय बिजली वितरण निगम या संबंधित अनुभाग के अधिकारियों की ओर से रखरखाव में कोताही या कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही प्रमाणित होती है, तो यह भारतीय न्याय संहिता के तहत गैर-इरादतन हत्या या लापरवाही से मौत का मामला बन सकता है। पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर इस पहलू की भी गहन जांच करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों पर जवाबदेही तय हो सके।

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