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सोलन से चुनावी दावेदारी और संन्यास के सवाल पर मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने साधी चुप्पी, बोले हर उम्र में काम जरूरीहिमाचल प्रदेश
2 अक्तू॰ 2026, 9:01 am (35 दिन पहले)· 4

सोलन से चुनावी दावेदारी और संन्यास के सवाल पर मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने साधी चुप्पी, बोले हर उम्र में काम जरूरी

हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने अंतरराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस पर राजनीति से संन्यास के कयासों को टालते हुए कहा कि चुनाव लड़ने का निर्णय पार्टी आलाकमान तय करेगा।

हिमाचल प्रदेश सरकार में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल के सियासी भविष्य को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं एक बार फिर गर्म हो गई हैं। 86 वर्ष की आयु पार कर चुके डॉ. शांडिल ने अंतरराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस के अवसर पर शिमला में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित बुजुर्गों को शुभकामनाएं प्रेषित कीं और स्वयं को नई ऊर्जा तथा उत्साह से भरा हुआ बताया। जब उनसे सार्वजनिक जीवन तथा चुनावी राजनीति से विश्राम लेने को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कोई सीधा जवाब न देते हुए अपने पत्ते नहीं खोले। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी जिम्मेदारी को संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, जिससे उनके सक्रिय राजनीति में बने रहने के कयासों को नया बल मिला है।

सोलन सीट पर दावेदारी और आलाकमान का निर्णय

सोलन विधानसभा क्षेत्र से आगामी चुनाव में उनकी अपनी उम्मीदवारी अथवा उनके पुत्र के चुनावी मैदान में उतरने को लेकर पूछे गए प्रश्न पर कैबिनेट मंत्री ने गेंद पार्टी नेतृत्व के पाले में डाल दी। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाए जाने का अंतिम निर्णय पार्टी का आलाकमान ही करेगा। हालांकि पूर्व में वे कई अवसरों पर बातों ही बातों में राजनीति से निवृत्ति की ओर इशारा करते रहे हैं, लेकिन शिमला के इस मंच से उन्होंने अपने भावी राजनीतिक कदमों पर कोई अंतिम या स्पष्ट रुख जाहिर नहीं किया।

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सेना का अनुभव और निरंतर सक्रियता का संकल्प

अपने लंबे सार्वजनिक जीवन का उल्लेख करते हुए डॉ. शांडिल ने कहा कि वे वर्ष 1999 से जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और विधायक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि आयु कभी भी उनके जनसेवा के कार्यों में रुकावट बनकर सामने नहीं आई। अपने पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि जब उन्होंने 19 वर्ष की अल्पायु में युद्ध लड़ा था, तब से उनका यह दृढ़ विश्वास रहा है कि व्यक्ति की उम्र चाहे जो भी हो, उसे निरंतर कर्मशील रहना चाहिए और समाज के लिए कार्य करते रहना चाहिए।

सैनिक पृष्ठभूमि से लेकर सियासी सफर तक

डॉ. धनीराम शांडिल का जीवन सैन्य सेवा और उच्च शिक्षा का अनूठा संगम रहा है। वे भारतीय सेना में कर्नल के पद से सेवानिवृत्त होने के पश्चात लोकतांत्रिक राजनीति में दाखिल हुए थे। उन्होंने वर्ष 1996 में एचपीयू से पीएचडी की उपाधि भी प्राप्त की थी। विधानसभा में प्रवेश करने से पूर्व वे संसद के निचले सदन यानी लोकसभा के सदस्य भी रह चुके हैं तथा पूर्ववर्ती वीरभद्र सरकार में भी कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। चुनावी समीकरणों की बात करें तो सोलन विधानसभा सीट पर उन्होंने पिछले दो चुनावों में अपने ही दामाद राजेश कश्यप को शिकस्त देकर विधानसभा में अपनी जगह बनाई है। उनके पारिवारिक दायरे में उनकी धर्मपत्नी, एक पुत्र तथा एक पुत्री शामिल हैं।

सवाल-जवाब

डॉ. धनीराम शांडिल की वर्तमान आयु कितनी है?
डॉ. धनीराम शांडिल की वर्तमान आयु 86 वर्ष है।
क्या डॉ. शांडिल ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की है?
नहीं, उन्होंने संन्यास पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं और कहा है कि वे हर काम के लिए तैयार हैं।
सोलन सीट से अगला चुनाव कौन लड़ेगा?
डॉ. शांडिल ने कहा है कि सोलन सीट से वे खुद लड़ेंगे या उनका बेटा, इसका अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान करेगा।
डॉ. शांडिल राजनीति में आने से पहले किस पद पर थे?
वे राजनीति में आने से पहले भारतीय सेना में कर्नल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
डॉ. शांडिल कब से विधायक हैं?
डॉ. धनीराम शांडिल वर्ष 1999 से विधायक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
सोलन से उन्होंने पिछले दो चुनावों में किसे हराया है?
उन्होंने सोलन सीट से पिछले दो विधानसभा चुनावों में अपने दामाद राजेश कश्यप को चुनाव हराया है।
डॉ. शांडिल ने पीएचडी कब और कहां से की थी?
उन्होंने वर्ष 1996 में एचपीयू से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी।
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टिप्पणियाँ 5

Michael Anderson@michael-anderson·34 दिन पहले

उम्र वाकई सिर्फ एक नंबर है जब जज्बा ऐसा हो। 86 की उम्र में भी आलाकमान पर फैसला छोड़ना और खुद को तैयार बताना गजब की फौलादी जिद है। राजनीति में ऐसे लोग कम ही मिलते हैं जो पीछे हटने से साफ मना कर दें।

Ravikash Gupta@ravikash·34 दिन पहले

अस्सी पार करने के बाद भी ऐसा जज्बा वाकई हैरान करता है। मुझे अपने फौजी दादा याद आ गए, वे भी कहते थे कि काम रुकना नहीं चाहिए, चाहे उम्र जो भी हो। आलाकमान क्या तय करेगा वो तो वक्त बताएगा, पर ऊर्जा उम्र की मोहताज नहीं होती।

Arjun Mehta@arjun-mehta·34 दिन पहले

रविकेश जी, बात तो आपकी ठीक है पर चुनावी राजनीति में उम्र का पैमाना सिर्फ जोश से तय नहीं होता, आलाकमान के अपने समीकरण होते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·35 दिन पहले

अस्सी पार करने के बाद भी चुनाव लड़ने का जोश हैरान करने वाला है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 दिन पहले

रोहन जी, बिल्कुल सही कहा आपने। मैंने एक बार चुनाव ड्यूटी के दौरान 82 साल के एक बुजुर्ग को सुबह से शाम तक बिना थके लगातार काम करते देखा था, उनकी ऊर्जा देखकर आज भी हैरानी होती है।

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