लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री के समक्ष खुली बहस की बार-बार उठाई जा रही मांग पर केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री किरेन रिजिजू ने बेहद तीखा सियासी कटाक्ष किया है। विपक्षी खेमे को चुनावी मैदान में बेहतर प्रदर्शन और अतिरिक्त सीटें हासिल करने का एक व्यंग्यात्मक रास्ता सुझाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की जनता का विश्वास जीतने के लिए सबसे पहले नेताओं के आचरण और प्राथमिकताओं में बुनियादी बदलाव आना आवश्यक है।
विदेशी दौरों और भारत विरोधी तत्वों पर सीधा प्रहार
सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विस्तृत बयान जारी करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस सांसद के सामने सात प्रमुख बिंदुओं की सूची पेश की। उन्होंने कहा कि अगर मुख्य विपक्षी दल वाकई चुनावी नतीजों में अपनी सीटों का आंकड़ा बढ़ाना चाहता है, तो उसके शीर्ष नेता को देश की धरती पर रहकर काम करना होगा। गुपचुप तरीके से बार-बार विदेश यात्राओं पर निकलने के बजाय अपने देश के नागरिकों के बीच वक्त गुजारना पहली आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्होंने कड़े शब्दों में चेताया कि विदेशी दौरों के दौरान देश विरोधी ताकतों और उनके एजेंडे को आगे बढ़ाने वाले व्यक्तियों से मुलाकात का सिलसिला पूरी तरह थामना होगा।
बुजुर्गों का आदर और राजनीतिक दुश्मनी की भावना मिटाने की सीख
अपनी प्राथमिकताओं में सामाजिक मूल्यों और लोकतांत्रिक गरिमा को रेखांकित करते हुए रिजिजू ने सलाह दी कि भारतीय परंपरा के अनुरूप अपनी ही पार्टी और सार्वजनिक जीवन के वरिष्ठ लोगों का सम्मान किया जाना चाहिए। बुजुर्ग नेताओं के लंबे अनुभवों से सीख लेकर आगे बढ़ना किसी भी राजनेता के लिए हितकारी होता है। इसके अलावा उन्होंने राजनीतिक कड़वाहट पर प्रहार करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रधानमंत्री के प्रति मन में भरी गहरी दुर्भावना का परित्याग किया जाना जरूरी है। सत्तापक्ष को केवल एक वैचारिक प्रतिद्वंद्वी की तरह देखा जाना चाहिए, न कि किसी स्थायी शत्रु की तरह।
संसदीय कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक संगठन की वकालत
विधायी कामकाज पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संसद की गरिमा और वहां होने वाली गंभीर चर्चाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। सदन के भीतर सांसदों को रचनात्मक चर्चा और बहसों में भाग लेने का पूरा अवसर दिया जाना आवश्यक है। अपनी अंतिम दो शर्तों में उन्होंने संविधान और सभी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सच्ची निष्ठा रखने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने वंशवादी व्यवस्था को त्यागकर अपनी पार्टी को पूरी तरह आंतरिक लोकतंत्र के आधार पर संचालित करने की सलाह दी। इससे पहले संसद में अपने संबोधन का एक वीडियो साझा करते हुए उन्होंने विपक्षी नेताओं के सदन से वॉकआउट करने के रवैये पर भी सवाल खड़े किए थे।
बहस की चुनौती पर मचा सियासी घमासान
यह पूरा वाकया उस समय तेज हुआ जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आमने-सामने की खुली बहस के लिए ललकारा। बुधवार को अपनी बात रखते हुए कांग्रेस नेता ने दावा किया था कि यदि यह संवाद संभव हुआ, तो वे महज पांच मिनट में यह साबित कर देंगे कि सरकार देशहित के विपरीत निर्णय ले रही है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रभाव में काम कर रही है। इसी दावे के जवाब में अब सत्तापक्ष की ओर से यह सियासी पलटवार सामने आया है।















