गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों को स्पेन की राजधानी मैड्रिड में गिरफ्तार कर लिया गया है। पंजाब एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स के इनपुट पर स्पेन की सुरक्षा एजेंसियों ने उसे हिरासत में लिया। लंबे समय से भारत की जांच एजेंसियां विदेश में छिपे इस गैंगस्टर को पकड़ने के ऑपरेशन में जुटी थीं और आखिरकार यह कामयाबी हाथ लगी। गोल्डी ढिल्लों काफी वक्त से मैड्रिड में रहकर पुलिस की नजरों से बचता रहा, लेकिन पंजाब की एजेंसियों की लगातार निगरानी और सूचनाओं के दम पर आखिरकार वह स्पेन की सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ ही गया।
चंडीगढ़ हत्याकांड से जुड़ा है नाम
गोल्डी ढिल्लों पर 13 जून को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 में स्थित श्री कुमार मेडिकल हॉल के कैशियर जानकी दास की गोली मारकर हत्या करवाने का आरोप है। इस वारदात के बाद से पंजाब पुलिस समेत कई एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी थीं और उसके ठिकाने का पता लगाने की कोशिश कर रही थीं।
पहले साथी, अब लॉरेंस बिश्नोई का धुर विरोधी
गोल्डी ढिल्लों कभी गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के गैंग का हिस्सा हुआ करता था। बाद में दोनों के बीच विवाद हो गया और गोल्डी ढिल्लों उसका कट्टर विरोधी बन गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक कनाडा में हुई फायरिंग की कई वारदातों में गोल्डी ढिल्लों का नाम सामने आया था। इसके अलावा पंजाब में भी संगठित अपराध की कई घटनाओं में वह आरोपी है, जिससे साफ है कि उसका नेटवर्क सिर्फ भारत तक सीमित नहीं बल्कि विदेश तक भी फैला हुआ था।
10 लाख और 5 लाख का इनाम, एनआईए भी कर रही थी तलाश
गोल्डी ढिल्लों नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी एनआईए का भी वांटेड आरोपी है, जिस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अलावा पंजाब पुलिस ने भी उस पर 5 लाख रुपये का इनाम रखा हुआ था। दोनों एजेंसियों के इनाम को मिलाकर गोल्डी ढिल्लों पर कुल 15 लाख रुपये का इनाम था, जो यह बताता है कि जांच एजेंसियां उसे कितनी गंभीरता से खोज रही थीं।
अब वतन वापसी की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक अब भारतीय एजेंसियां गोल्डी ढिल्लों की वतन वापसी यानी प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया पर जल्द काम शुरू कर सकती हैं। अगर प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी होती है तो गोल्डी ढिल्लों से पंजाब और दूसरे राज्यों में हुए कई अपराध और गैंगवार की घटनाओं को लेकर पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि उससे पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिल सकती हैं, जो दूसरे गैंगस्टरों तक पहुंचने में मददगार साबित हो सकती हैं।
24 साल पुरानी है भारत-स्पेन प्रत्यर्पण संधि
भारत और स्पेन के बीच प्रत्यर्पण संधि साल 2002 में मैड्रिड में साइन हुई थी। यह संधि आतंकवाद, संगठित अपराध और अन्य गंभीर अपराधों से निपटने के साथ ही भगोड़े अपराधियों को कानून के कटघरे में लाने के लिए दोनों देशों को कानूनी ढांचा मुहैया कराती है। यह संधि आधिकारिक तौर पर साल 2003 से पूरी तरह लागू हुई थी, यानी गोल्डी ढिल्लों के मामले में भारत के पास प्रत्यर्पण की मांग उठाने का पूरा कानूनी आधार मौजूद है।













