असम में बाढ़ की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है, हालांकि इस प्राकृतिक आपदा के बीच एक और व्यक्ति की मौत होने से इस साल राज्य में बाढ़ के कारण जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा 105 तक पहुंच गया है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, ताजा मौत शिवसागर जिले में हुई है, जहां बाढ़ के पानी में डूबने से एक व्यक्ति की जान चली गई।
कितने लोग और कौन से जिले हैं सबसे ज्यादा प्रभावित
राज्य के चार प्रमुख जिलों—गोलाघाट, जोरहाट, नगांव और शिवसागर में अभी भी लगभग 31,900 लोग बाढ़ की मार झेल रहे हैं। इनमें नगांव जिला सबसे बुरी तरह प्रभावित बना हुआ है, जहां करीब 20,000 लोग संकट में हैं। इसके बाद जोरहाट में 5,000 से अधिक और शिवसागर में 4,500 से ज्यादा प्रभावित निवासी इस आपदा का सामना कर रहे हैं। हालांकि, रविवार के आंकड़ों की तुलना में स्थिति में काफी सुधार हुआ है, जब पांच जिलों में लगभग 52,000 लोग प्रभावित थे।
राहत शिविर और बुनियादी ढांचे को नुकसान
विस्थापित हुए लोगों की मदद के लिए प्रशासन की ओर से चार जिलों में कुल 15 राहत शिविर और वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिनके जरिए 2,782 प्रभावित लोगों को सहायता पहुंचाई जा रही है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बुलेटिन के मुताबिक, वर्तमान में राज्यभर में 147 गांव पानी में डूबे हुए हैं और 3,198.77 हेक्टेयर कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा बाढ़ के पानी के कारण कई जिलों में तटबंधों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को भी क्षति पहुंची है। बाढ़ के इस प्रकोप की वजह से राज्यभर में 16,323 पालतू पशुओं और मुर्गियों पर भी बुरा असर पड़ा है।
वित्तीय सहायता और सरकारी कदम
इस बीच, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को जानकारी दी कि नुकसान का विस्तृत आकलन किए जाने के बाद अब तक 96,842 बाढ़ प्रभावित परिवारों को 15,000 रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है। सरकार ने अब तक इस सहायता के वितरण पर 146.26 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लाभार्थियों की सूची तैयार करने का काम अभी जारी है और अगले चरण में लगभग 3,000 और परिवारों को इस दायरे में शामिल किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि ओरुदोई योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 2,500 रुपये दिए गए हैं, और बाढ़ के बाद अपने घरों को लौट रहे परिवारों को सहारा देने के लिए सरकार सीधे वित्तीय सहायता का उपयोग कर रही है।





















