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महिला सरकारी कर्मचारियों को तमिलनाडु में राहत, तीसरे बच्चे के जन्म पर भी मंजूर हुई 365 दिनों की मैटरनिटी लीवभारत
19 अग॰ 2026, 6:42 am (1 दिन पहले)· 3

महिला सरकारी कर्मचारियों को तमिलनाडु में राहत, तीसरे बच्चे के जन्म पर भी मंजूर हुई 365 दिनों की मैटरनिटी लीव

तमिलनाडु सरकार ने महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए 365 दिनों के मातृत्व अवकाश का दायरा तीसरे बच्चे तक बढ़ा दिया है। गिरती प्रजनन दर और बुजुर्ग आबादी की चुनौतियों को देखते हुए विधानसभा में यह अहम फैसला लिया गया।

तमिलनाडु में काम करने वाली महिला सरकारी कर्मचारियों को राज्य सरकार ने एक बड़ा तोहफा दिया है। अब महिला कर्मचारियों को तीसरे बच्चे के जन्म पर भी पूरे एक साल यानी 365 दिनों की मैटरनिटी लीव प्रदान की जाएगी। मंगलवार को राज्य सरकार द्वारा की गई इस अहम घोषणा के बाद तीसरे बच्चे की स्थिति में मिलने वाले मातृत्व अवकाश को पहले दो बच्चों के समान कर दिया गया है। इससे पहले राज्य में तीसरे बच्चे के जन्म पर महिला कर्मचारियों को केवल 12 हफ्तों की छुट्टी देने का प्रावधान लागू था।

विधानसभा में मानव संसाधन प्रबंधन मंत्री का ऐलान

राज्य विधानसभा में अपने विभाग से जुड़ी अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान मानव संसाधन प्रबंधन मंत्री डी. सरथकुमार ने इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने सदन में स्पष्ट किया कि तमिलनाडु सरकार सामाजिक कल्याण और महिला सशक्तिकरण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध एक कल्याणकारी प्रशासन चला रही है। इसी सोच के तहत महिला कर्मचारियों के लिए तीसरे बच्चे के जन्म पर मिलने वाले प्रसूति अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 365 दिन करने का निर्णय लिया गया है। इस कदम से राज्य सेवा में कार्यरत महिलाओं को अपने परिवार और नवजात शिशु की देखभाल के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।

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तमिलनाडु में मातृत्व अवकाश का ऐतिहासिक सफर

राज्य में महिला कर्मचारियों के मातृत्व अवकाश की अवधि में समय-समय पर बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। साल 2011 से पहले राज्य में मातृत्व अवकाश की अवधि केवल 90 दिनों की हुआ करती थी, जिसे वर्ष 2011 में तत्कालीन सरकार ने बढ़ाकर छह महीने कर दिया था। इसके बाद वर्ष 2016 में इस अवधि को बढ़ाकर नौ महीने किया गया। आगे चलकर जुलाई 2021 में सरकार ने इसे एक कदम और आगे बढ़ाते हुए पूरे एक साल यानी 365 दिनों में बदल दिया था। हालांकि सामान्य नियमों के तहत 365 दिनों की यह सुविधा अब तक केवल उन्हीं नियमित महिला कर्मचारियों को मिल पा रही थी जिनके दो से कम जीवित बच्चे थे। अब नए फैसले के बाद तीसरे बच्चे पर भी यह समानता लागू कर दी गई है।

प्रजनन दर में गिरावट और बदलती जनसांख्यिकी

मातृत्व अवकाश की अवधि बढ़ाने का यह फैसला राज्य में तेजी से बदल रहे जनसांख्यिकीय ढांचे को ध्यान में रखकर लिया गया है। हाल ही में रविवार को साउथ इंडिया की ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी की एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के.जी. अरुणराज ने चिंताजनक आंकड़े साझा किए थे। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु का कुल प्रजनन दर (टीएफआर) गिरकर 1.4 से भी नीचे चला गया है। यह आंकड़ा जनसंख्या के रिप्लेसमेंट लेवल यानी 2.1 के स्तर से काफी कम है।

बुजुर्ग आबादी और नीतिगत बदलावों की जरूरत

स्वास्थ्य मंत्री के.जी. अरुणराज ने इस बात पर जोर दिया कि तमिलनाडु की कुल आबादी का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा अब 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र का हो चुका है। युवा आबादी की कमी और बुजुर्गों की बढ़ती संख्या सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन के सामने एक नई और बड़ी चुनौती खड़ी कर रही है। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य सरकार आबादी में आ रहे इस असंतुलन को रोकने के लिए आंध्र प्रदेश जैसी नीतियों पर भी विचार कर सकती है। गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश में दंपतियों को तीसरा बच्चा पैदा करने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहन दिए जाते हैं, ताकि जन्म दर में सुधार किया जा सके।

सवाल-जवाब

तमिलनाडु सरकार ने मैटरनिटी लीव को लेकर क्या बड़ा फैसला लिया है?
तमिलनाडु सरकार ने महिला सरकारी कर्मचारियों को तीसरे बच्चे के जन्म पर 12 हफ्ते के बजाय 365 दिन (एक साल) की मैटरनिटी लीव देने का फैसला किया है।
पहले तीसरे बच्चे के लिए कितनी मैटरनिटी लीव मिलती थी?
पहले महिला सरकारी कर्मचारियों को दो या उससे अधिक जीवित बच्चे होने पर तीसरे बच्चे के लिए केवल 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव मिलती थी।
तमिलनाडु में मैटरनिटी लीव की अवधि का इतिहास क्या रहा है?
तमिलनाडु में मैटरनिटी लीव 2011 में 90 दिन से बढ़ाकर 6 महीने, 2016 में 9 महीने और जुलाई 2021 में 365 दिन की गई थी।
तमिलनाडु का कुल प्रजनन दर (TFR) कितना है?
तमिलनाडु का कुल प्रजनन दर 1.4 से नीचे गिर गया है, जो 2.1 के रिप्लेसमेंट लेवल से काफी कम है।
राज्य में बुजुर्ग आबादी का क्या प्रतिशत है?
तमिलनाडु की कुल आबादी का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा 60 साल या उससे अधिक उम्र का है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

तमिलनाडु सरकार का यह कदम केवल सामाजिक कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे आर्थिक और श्रम बाजार निहितार्थ हैं। गिरता टीएफआर (1.4 से नीचे) और 16 प्रतिशत बुजुर्ग आबादी भविष्य में कामकाजी उम्र की जनसंख्या को प्रभावित कर सकती है। हालांकि एक साल का मातृत्व अवकाश महिलाओं के कार्यबल में बने रहने और लैंगिक समानता के लिए सकारात्मक है, लेकिन नियोक्ताओं और राज्य के राजकोषीय स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों का प्रबंधन भी करना होगा।

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·1 दिन पहले

अंक ज्योतिष और पारिवारिक ऊर्जा के दृष्टिकोण से, यह नीति जनसांख्यिकीय असंतुलन को संतुलित करने का एक सशक्त माध्यम है। जब समाज में जन्म दर 1.4 तक गिरती है और बुजुर्गों की आबादी 16 प्रतिशत तक पहुँच जाती है, तो यह अंकों के चक्र में ठहराव का संकेत है। इस तरह के दीर्घकालिक अवकाश से न केवल पारिवारिक बंधन मजबूत होंगे, बल्कि कामकाजी महिलाओं को मानसिक और आत्मिक स्थिरता भी मिलेगी, जिससे आने वाले समय में एक स्वस्थ और ऊर्जावान नई पीढ़ी का सृजन हो सकेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

यह नीतिगत बदलाव केवल महिला कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि गिरती प्रजनन दर (1.4 टीएफआर) और 16 प्रतिशत बुजुर्ग आबादी के जनसांख्यिकीय संकट से निपटने की एक प्रशासनिक कोशिश भी है। हालांकि, राज्य सेवा में इसके दीर्घकालिक प्रभाव और कार्यबल प्रबंधन पर पड़ने वाले असर का आकलन करना आगामी वर्षों में प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

यह निर्णय दक्षिण भारत के राज्यों में उभरते जनसांख्यिकीय असंतुलन की ओर बड़ा संकेत है। उत्तर प्रदेश जैसे उच्च प्रजनन दर वाले राज्यों के विपरीत, तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों को अब बुजुर्ग आबादी बढ़ने और कार्यबल में संभावित कमी से जूझना पड़ रहा है। इस प्रकार के कल्याणकारी उपाय कार्यस्थल पर महिलाओं की भागीदारी बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन इनका असर प्रशासनिक ढांचे और मानव संसाधन प्रबंधन पर भी पड़ सकता है, जिसकी दीर्घकालिक समीक्षा आवश्यक होगी।

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