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इलेक्ट्रिक बसों से चमकेगी सीकर की परिवहन व्यवस्था, खाटूश्यामजी दर्शन और स्थानीय यात्रियों को मिलेगा लाभराजस्थान
20 अग॰ 2026, 8:19 am (1 घंटे पहले)· 2

इलेक्ट्रिक बसों से चमकेगी सीकर की परिवहन व्यवस्था, खाटूश्यामजी दर्शन और स्थानीय यात्रियों को मिलेगा लाभ

पीएम ई-बस सेवा के तहत सीकर को प्रथम चरण में लगभग 50 इलेक्ट्रिक बसें मिलने जा रही हैं, जिससे शहर के दैनिक यात्रियों और खाटूश्यामजी जाने वाले श्रद्धालुओं को किफ़ायती व सुलभ सफर की सुविधा मिलेगी।

राजस्थान के प्रमुख शैक्षणिक केंद्र सीकर शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को जल्द ही एक नई और आधुनिक दिशा मिलने जा रही है। केंद्र सरकार की पीएम ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत पहले चरण में सीकर को करीब 50 अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसें सौंपने की तैयारी की जा चुकी है। स्थानीय नगर परिषद ने इन पर्यावरण अनुकूल बसों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए संभावित रूटों, बस स्टैंडों और अन्य प्राथमिक व्यवस्थाओं की रूपरेखा पूरी तरह तैयार कर ली है। इस पहल के क्रियान्वयन से सीकर के निवासियों और यात्रियों को सुलभ, सस्ती और प्रदूषण मुक्त यात्रा का एक बेहतर विकल्प उपलब्ध होगा।

भढ़ाडर में डिपो निर्माण और रूट का खाका

सीकर में ई-बसों के व्यवस्थित संचालन के उद्देश्य से शहर के भढ़ाडर क्षेत्र में एक नया और आधुनिक डिपो स्थापित किया जाएगा। इस डिपो परिसर से ही सभी इलेक्ट्रिक बसों का दैनिक संचालन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी रखरखाव की व्यवस्थाएं नियंत्रित की जाएंगी। नगर परिषद प्रशासन ने बसों के आगमन से पूर्व ही शहर के प्रमुख मार्गों का गहन सर्वेक्षण कर संभावित रूटों की योजना बना ली है। जैसे ही बसों की खेप सीकर पहुँचेगी, बिना किसी अनावश्यक विलंब के इनका परिचालन तुरंत शुरू कर दिया जाएगा।

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खाटूश्यामजी और धार्मिक स्थलों के लिए विशेष रूट

सीकर के लिए तैयार की गई इस परिवहन योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इन बसों को केवल शहरी सीमा तक सीमित नहीं रखा जाएगा। नगर परिषद ने क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन और श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही को ध्यान में रखते हुए लंबी दूरी के रूटों को भी शामिल किया है। इसके तहत प्रसिद्ध धार्मिक स्थल खाटूश्यामजी और आसपास के अन्य प्रमुख मंदिरों व दर्शनीय स्थलों के लिए विशेष ई-बसें चलाई जाएंगी। इस सुविधा से धार्मिक मेलों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को निजी वाहनों तथा महंगे साधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

विद्यार्थियों और दैनिक यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ

आवंटित 50 ई-बसों में से एक बड़ा हिस्सा सीकर शहर की आंतरिक नगरीय परिवहन सेवा के रूप में कार्य करेगा। योजना के अनुसार, रूटों का चयन इस प्रकार किया जा रहा है कि शहर के मुख्य व्यावसायिक बाजारों, घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों, प्रमुख कोचिंग व शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों को आपस में जोड़ा जा सके। सीकर एक बड़ा एजुकेशन हब होने के कारण यहाँ प्रतिदिन हज़ारों छात्र, कर्मचारी, व्यापारी और आम नागरिक आवागमन करते हैं। नियमित बस सेवा शुरू होने से इन सभी वर्गों को सुलभ और सुरक्षित परिवहन मिलेगा।

राजस्थान में पीएम ई-बस सेवा का राज्यस्तरीय परिदृश्य

राजस्थान राज्य के स्तर पर देखें तो पीएम ई-बस सेवा के प्रथम चरण में राजधानी जयपुर सहित कुल 8 प्रमुख शहरों में 675 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक राज्य को 182 ई-बसें प्राप्त हो चुकी हैं। हाल ही में 24 नई बसों का सफल संचालन शुरू किया गया, जिनमें से जयपुर को 4 बसें तथा भीलवाड़ा और कोटा को 10-10 बसें आवंटित की गईं। इस आवंटन गति को देखते हुए उम्मीद है कि सीकर को भी जल्द ही उसकी 50 बसों की स्वीकृत खेप मिल जाएगी, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा।

प्रदूषण मुक्ति, संयुक्त कमेटी और ऑटो सेक्टर पर प्रभाव

वर्तमान में सीकर और आसपास के इलाकों में सार्वजनिक आवागमन का 90 प्रतिशत हिस्सा ऑटो-रिक्शा और निजी साधनों पर टिका हुआ है। ई-बसों के नियमित और निश्चित समय पर उपलब्ध होने से यात्रियों को आरामदायक सफर मिलेगा, वहीं पेट्रोल और डीजल वाहनों की कमी से वायु तथा ध्वनि प्रदूषण में भारी गिरावट आएगी। बसों के अंतिम रूट और किराए का निर्धारण जिला प्रशासन, नगर परिषद, यूआईटी, परिवहन विभाग तथा यातायात पुलिस की एक संयुक्त कमेटी द्वारा किया जाएगा। जहाँ एक ओर नगर परिषद क्षेत्र से सटी ग्रामीण ढाणियों के लोगों को इस सेवा से भारी राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ऑटो सेक्टर को इससे आर्थिक झटके का सामना करना पड़ सकता है।

सवाल-जवाब

सीकर में कितनी ई-बसें चलाने की योजना है?
पहले चरण में सीकर में लगभग 50 ई-बसें चलाने की संभावना है।
ई-बसों के लिए डिपो कहाँ बनाया जाएगा?
ई-बसों के संचालन, चार्जिंग और रखरखाव के लिए सीकर के भढ़ाडर क्षेत्र में डिपो तैयार किया जाएगा।
क्या ये बसें केवल सीकर शहर में ही चलेंगी?
नहीं, नगर परिषद ने खाटूश्यामजी जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों और आसपास के ग्रामीण इलाकों तक भी बसें चलाने का खाका तैयार किया है।
ई-बसों के रूट और किराए का निर्धारण कौन करेगा?
जिला प्रशासन, नगर परिषद, यूआईटी, परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की एक संयुक्त कमेटी रूट और किराया तय करेगी।
राजस्थान में पीएम ई-बस सेवा का क्या लक्ष्य है?
पहले चरण में राजस्थान के 8 शहरों में कुल 675 ई-बसें चलाने का लक्ष्य है, जिनमें से 182 बसें राज्य में पहुँच चुकी हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·47 मिनट पहले

सीकर में पीएम ई-बस सेवा के तहत 50 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन केवल शहरी परिवहन सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भढ़ाडर में डिपो निर्माण के साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी एक मजबूत ढांचा देता है। खाटूश्यामजी जैसे बड़े धार्मिक केंद्र को इस योजना से जोड़ना और प्रमुख शिक्षण संस्थानों व बाजारों को कवर करना स्थानीय अर्थव्यवस्था, छात्रों और श्रद्धालुओं के लिए एक दूरगामी और पर्यावरण अनुकूल कदम साबित होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·47 मिनट पहले

अपराध और कानून-व्यवस्था के एक रिपोर्टर के रूप में मेरा मानना है कि सार्वजनिक परिवहन के ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी होता है। भढ़ाडर डिपो से बसों का संचालन नियंत्रित होने और खाटूश्यामजी जैसे भारी भीड़ वाले धार्मिक स्थल तक रूट तय होने से, विशेषकर मेलों और त्योहारों के दौरान, जिला प्रशासन और पुलिस को यातायात सुचारू रखने में मदद मिलेगी। साथ ही, हजारों छात्रों और यात्रियों के लिए सुरक्षित और अधिकृत आवागमन सुनिश्चित होने से अनधिकृत वाहनों से जुड़े जोखिम भी कम होंगे।

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