विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया पर केंद्रीय कैबिनेट के एक बड़े फैसले की जानकारी साझा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में देश के रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 9,450 करोड़ रुपये की चार प्रमुख मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को हरी झंडी दी गई है। यह इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट चार प्रमुख राज्यों में रेल कनेक्टिविटी और माल ढुलाई को रफ्तार देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
चार राज्यों के 8 जिलों को जोड़ेगा नया रेल नेटवर्क
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत इन परियोजनाओं के तहत कुल 410 किलोमीटर लंबी नई रेलवे लाइनें और मल्टीट्रैकिंग कार्य किए जाएंगे। इससे पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के आठ जिले सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। सरकार ने इस पूरे प्रोजेक्ट को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस विस्तार से न केवल यात्री ट्रेनों की आवाजाही सुगम होगी, बल्कि प्रमुख औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों से माल परिवहन की क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
आर्थिक विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में तेजी
इन नई रेल लाइनों के निर्माण से संबंधित राज्यों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। मल्टीट्रैकिंग के जरिए ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी और व्यस्त रूटों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। सरकार लगातार देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को आधुनिक बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
जनता की प्रतिक्रिया
इस फैसले पर आम लोगों की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। सोशल मीडिया पर जहां कई उपभोक्ताओं ने इस बुनियादी ढांचे के विकास को क्षेत्रीय आर्थिक समृद्धि के लिए ऐतिहासिक कदम बताया, वहीं कुछ लोगों ने रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छ पेयजल, गुणवत्तापूर्ण भोजन और ट्रेनों में साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं में सुधार की मांग भी उठाई।



























