मणिपुर में बिगड़ती कानून व्यवस्था और विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक निर्देशों के अनुसार, 20 अगस्त से राज्य भर के सभी सरकारी व निजी स्कूलों, कॉलेजों और अन्य सभी शिक्षण संस्थानों को अगले तीन दिनों तक पूरी तरह से बंद रखने का आदेश जारी किया गया है। क्षेत्र में तनाव की स्थिति को नियंत्रित करने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है।
NRC अपडेट और 48 घंटे की हड़ताल
इस फैसले की मुख्य वजह राज्य में जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को अपडेट करने की लगातार उठ रही मांग है। इस अभियान का नेतृत्व कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डिलिमिटेशन (JFD) नाम का संगठन कर रहा है। संगठन ने अपनी मांगों के समर्थन में 48 घंटे के व्यापक आम हड़ताल की घोषणा की थी, जिससे घाटी क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन पर गहरा असर पड़ा है।
सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी और राजनीतिक विरोध
हड़ताल के दूसरे दिन मणिपुर के घाटी वाले जिलों के विभिन्न हिस्सों में तनाव और बढ़ गया। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने विशाल रैलियां निकालीं और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करते हुए अनेक राजनेताओं के पुतले भी फूंके। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक राज्य में जनसंख्या गणना से पहले नागरिकों का रजिस्टर अद्यतन नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
सरकारी कार्यालयों के बहिष्कार का ऐलान
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब JFD ने अपने आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की। संगठन ने साफ कर दिया है कि गुरुवार से राज्य भर के सभी सरकारी कार्यालयों का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा। प्रदर्शनकारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस और उचित कदम नहीं उठाती, तब तक यह बंद और बहिष्कार अनिश्चितकाल के लिए जारी रहेगा।



















