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उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने पकड़ी कोडीन सिरप की तीस हजार शीशियां, चार तस्कर दबोचेउत्तर प्रदेश
4 सित॰ 2026, 12:18 am (9 दिन पहले)· 2

उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने पकड़ी कोडीन सिरप की तीस हजार शीशियां, चार तस्कर दबोचे

यूपी एसटीएफ ने बांदा में एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन करोड़ रुपये कीमत की अवैध कोडीन कफ सिरप की तीस हजार शीशियां बरामद की हैं। इस कार्रवाई के दौरान चार तस्करों को भी गिरफ्तार किया गया है जो दिल्ली और हरियाणा से माल लाकर विभिन्न राज्यों में आपूर्ति करते थे।

उत्तर प्रदेश में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार और कफ सिरप की तस्करी पर लगाम कसने के लिए राज्य सरकार लगातार कठोर कदम उठा रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स यानी यूपी एसटीएफ ने एक अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए बांदा जिले में चार तस्करों को धर दबोचा है। छापेमारी के दौरान टीम ने आरोपियों के कब्जे से करीब तीन करोड़ रुपये मूल्य की 30 हजार शीशियां अवैध कोडीन कफ सिरप बरामद की हैं। पकड़े गए आरोपियों की पहचान बांदा के रहने वाले धीरेन्द्र कुमार, अतर्रा निवासी प्रवीण कुमार उर्फ लकी और रोहित पांडेय तथा हापुड़ के शेखर सिंह के रूप में हुई है।

बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर हुई घेराबंदी

खुफिया तंत्र से मिली जानकारी के आधार पर एसटीएफ को इस बात की भनक लगी थी कि एक संगठित गिरोह दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ से प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप की खेप उठाकर उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के तमाम जिलों में सप्लाई कर रहा है। इसी इनपुट पर कार्रवाई करते हुए प्रयागराज स्थित एसटीएफ फील्ड इकाई की टीम गुरुवार को बांदा क्षेत्र में मुस्तैद थी।

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जांच टीमों को पुख्ता सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध एक डीसीएम वाहन में भरकर अवैध कोडीन सिरप बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के रास्ते बिसंडा बाईपास से अतर्रा और बांदा की तरफ ले जाने वाले हैं। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए बिसंडा-अतर्रा मार्ग पर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के उत्तरी गोल चौराहे के पास जाल बिछाया गया। अधिकारियों ने डीसीएम के ठीक आगे चल रही एक लाल रंग की टाटा नेक्सॉन कार और डीसीएम दोनों को रुकवाकर उनकी गहन तलाशी ली। इस तलाशी अभियान में दोनों वाहनों से भारी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप की पेटियां बरामद की गईं और मौके पर मौजूद चारों आरोपियों को तुरंत हिरासत में ले लिया गया।

मेडिकल स्टोर के बजाय नशे के कारोबार में होती थी आपूर्ति

गिरफ्तार किए गए आरोपियों से जब कड़ाई से पूछताछ की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि वे एक सक्रिय सिंडिकेट का हिस्सा हैं जो इस सिरप का इस्तेमाल चिकित्सीय उपयोग की बजाय नशे के अवैध कारोबार के लिए करते हैं। यह गिरोह उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विभिन्न इलाकों में इस सामग्री की सप्लाई करता था।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि ये लोग दिल्ली के द्वारका इलाके में स्थित एक फार्मा प्रतिष्ठान से सिरप की खेप प्राप्त करते थे। इसके बाद इसे बांदा, अतर्रा, चित्रकूट और मध्य प्रदेश से सटे सीमावर्ती जिलों में वैध मेडिकल स्टोरों तक पहुंचाने के बजाय सीधे नशे के अवैध नेटवर्क में खपाया जाता था। आरोपी सिरप की बोतलों के रैपर बदलकर उन्हें ऊंचे दामों पर बेचते थे और अवैध मुनाfफे को आपस में बांट लेते थे। खास बात यह है कि वाहन चालक को यह खेप सुरक्षित ठिकाने तक पहुंचाने के एवज में अलग से 25 हजार रुपये का इनाम दिया जाता था।

फर्जी जीएसटी बिलों के सहारे चल रहा था खेल

एसटीएफ की पूछताछ में इस अवैध कारोबार से जुड़ा एक और सनसनीखेज पहलू सामने आया है। आरोपियों ने बताया कि कोडीन कफ सिरप की खरीद-फरोख्त और परिवहन के लिए तैयार किए जाने वाले जीएसटी इनवॉइस व दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया जाता था। ये बिल हमीरपुर की एक मेडिकल एजेंसी के नाम पर बनाए जा रहे थे। इसके लिए कागजों पर ऐसी फर्म का इस्तेमाल किया जा रहा था जिसे वाणिज्य कर विभाग द्वारा पहले ही निष्क्रिय या बोगस घोषित किया जा चुका है। इन फर्जी कागजातों की ढाल बनाकर ही कोडीन सिरप का यह अवैध साम्राज्य संचालित किया जा रहा था।

सोनभद्र में अस्सी लाख की हेरोइन के साथ तस्कर गिरफ्तार

उधर, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की वाराणसी यूनिट ने भी एक अन्य कार्रवाई में सोनभद्र के करमा थाना क्षेत्र से एक मादक पदार्थ तस्कर को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान हिमांशु गौतम के रूप में हुई है जिसके पास से लगभग 80 लाख रुपये मूल्य की हेरोइन बरामद की गई है। आरोपी ने पूछताछ में कुबूला कि वह छोटी-छोटी पुड़िया बनाकर हेरोइन की खुदरा सप्लाई करने का अवैध धंधा करता आ रहा था। पुलिस इस मामले से जुड़े अन्य तमाम पहलुओं की गहराई से छानबीन कर रही है।

बता दें कि इससे पहले इसी साल मार्च महीने में कोडीन युक्त कफ सिरप तस्करी मामले में साढ़े बारह करोड़ से अधिक की संपत्ति सीज की गई थी। उस दौरान पुलिस ने तस्करों के पास से कार, ट्रक और 20 लाख रुपये नकद भी बरामद किए थे। इसके अलावा जनवरी में वाराणसी में भोला जायसवाल की पांच करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति कुर्क की गई थी, जबकि जून में सुपौल के प्रतापगंज थाने में जब्त कफ सिरप बेचने के मामले में थानाध्यक्ष को निलंबित कर चार पुलिसकर्मियों को भी गिरफ्तार किया गया था।

सवाल-जवाब

यूपी एसटीएफ ने कितनी कोडीन सिरप की शीशियां बरामद की हैं?
यूपी एसटीएफ ने बांदा में 30 हजार शीशियां अवैध कोडीन कफ सिरप बरामद की हैं।
इस कार्रवाई में कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है?
इस मामले में कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
बरामद की गई कोडीन सिरप की कुल कीमत कितनी है?
बरामद की गई अवैध कोडीन सिरप की कीमत करीब तीन करोड़ रुपये है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम क्या हैं?
गिरफ्तार आरोपियों के नाम धीरेन्द्र कुमार, प्रवीण कुमार उर्फ लकी, रोहित पांडेय और शेखर सिंह हैं।
यह गिरोह सिरप कहां से लेकर आता था?
यह गिरोह दिल्ली के द्वारका स्थित एक फार्मा प्रतिष्ठान से सिरप लेकर आता था।
तस्कर कागजों में किस फर्म का इस्तेमाल कर रहे थे?
तस्कर हमीरपुर की एक ऐसी मेडिकल एजेंसी के नाम का इस्तेमाल कर रहे थे जिसे वाणिज्य कर विभाग द्वारा बोगस घोषित किया जा चुका था।
सोनभद्र में एंटी नारकोटिक्स टीम ने क्या बरामद किया?
सोनभद्र में एंटी नारकोटिक्स यूनिट ने लगभग 80 लाख रुपये मूल्य की हेरोइन बरामद की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·8 दिन पहले

यह मामला भारत और दक्षिण एशिया में कफ सिरप के अवैध सीमापार व अंतरराज्यीय डायवर्जन के बढ़ते संकट को उजागर करता है। दिल्ली जैसे प्रमुख केंद्रों से फार्मा उत्पादों का वैध आपूर्ति श्रृंखला से बाहर होना और ग्रामीण इलाकों के नशा नेटवर्क में खपना इस बात का संकेत है कि विनियामक तंत्र में गंभीर खामियां हैं। आगे की जांच में इस सिंडिकेट के वित्तीय लिंक और फार्मा कंपनियों की मिलीभगत की तह तक जाना अनिवार्य होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

यह मामला केवल स्थानीय तस्करी का नहीं, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला की गहरी खामियों को उजागर करता है। दिल्ली के फार्मा प्रतिष्ठान से लेकर बुंदेलखंड तक फैला यह अवैध नेटवर्क यह दर्शाता है कि कैसे विनियामक तंत्र को दरकिनार किया जा रहा है। यदि वितरकों और फर्जी जीएसटी बिलों की कड़ाई से जांच नहीं की गई, तो वित्तीय अपराध और नशा तस्करी का यह गठजोड़ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता दोनों के लिए गंभीर खतरा बनता रहेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

यह घटना न केवल संगठित अपराध की ओर इशारा करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे अंतरराज्यीय समन्वय की कमी का फायदा उठाकर तस्कर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों तक अपने पैर पसार रहे हैं। दिल्ली के फार्मा हब से उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड तक फैला यह सिंडिकेट इस बात का प्रमाण है कि अवैध ड्रग ट्रेड पर प्रभावी लगाम कसने के लिए केवल स्थानीय पुलिस कार्रवाई नाकाफी है, बल्कि राज्यों की सीमाओं से परे एक सख्त और एकीकृत विनियामक निगरानी तंत्र की तत्काल आवश्यकता है, ताकि इस तरह के वित्तीय और आपराधिक गठजोड़ को शुरुआत में ही तोड़ा जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

यह कार्रवाई दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में नशे का यह अवैध नेटवर्क किस हद तक फैला हुआ है। दिल्ली के फार्मा प्रतिष्ठानों से इस तरह बड़े पैमाने पर कोडीन सिरप की डायवर्जन और फर्जी बिलिंग इस बात का संकेत है कि आपूर्ति श्रृंखला के मूल स्रोतों और मास्टरमाइंड तक पहुंचना अभी बाकी है, जो आगामी दिनों में इस सिंडिकेट की और कड़ियां खोल सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

यह मामला साफ तौर पर इस बात की ओर इशारा करता है कि तस्कर अब केवल स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि संगठित और सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिस तरह से दिल्ली के एक फार्मा प्रतिष्ठान से बड़े पैमाने पर माल निकाला जा रहा था, उससे यह स्पष्ट होता है कि इस पूरे सिंडिकेट की जड़ें फार्मास्यूटिकल सेक्टर के भीतर तक फैली हुई हैं। कानून-व्यवस्था की एजेंसियों को अब इस अवैध कारोबार की रीढ़ तोड़ने के लिए उन लाइसेंस प्राप्त संस्थानों और वितरकों की गहराई से वित्तीय और कागजी जांच करनी होगी, जो इस तरह के प्रतिबंधित पदार्थों को आधिकारिक आपूर्ति श्रृंखला से डायवर्ट करके अपराधियों तक पहुंचा रहे हैं।

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