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उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए खुशखबरी, मिर्जापुर के देवरी में 15 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा ड्रैगन फ्रूट एक्सीलेंस सेंटरउत्तर प्रदेश
13 अग॰ 2026, 9:08 am (31 दिन पहले)· 1

उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए खुशखबरी, मिर्जापुर के देवरी में 15 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा ड्रैगन फ्रूट एक्सीलेंस सेंटर

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में प्रदेश का पहला और देश का दूसरा ड्रैगन फ्रूट एक्सीलेंस सेंटर बनने जा रहा है। 40 बीघा भूमि में बनने वाले इस केंद्र के लिए 5 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है।

उत्तर प्रदेश के बागवानी क्षेत्र को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के मिर्जापुर जिले में स्थित देवरी में प्रदेश का पहला और देश का दूसरा ड्रैगन फ्रूट एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल 15 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। शासन की ओर से मंजूरी मिलने के बाद जुलाई में इसके लिए 5 करोड़ रुपये का फंड भी जारी कर दिया गया है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही 40 बीघा भूमि पर फैले इस अत्याधुनिक केंद्र का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

किसानों को मिलेगी रोगमुक्त पौधे और आधुनिक बीज की सुविधा

देवरी में स्थापित होने वाले इस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का मुख्य उद्देश्य ड्रैगन फ्रूट की उन्नत खेती को प्रोत्साहन देना है। इस केंद्र के माध्यम से किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले, प्रमाणित और रोगमुक्त ड्रैगन फ्रूट के पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। अक्सर किसान पौधे खरीदने के बाद उनके जल्द खराब होने या बीमारियों की वजह से नुकसान झेलते हैं। इस केंद्र से मिलने वाले स्वस्थ पौधे किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाएंगे और उनकी पैदावार बढ़ाकर आय बढ़ाने में सीधे मददगार साबित होंगे।

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40 बीघा में अनुसंधान और हाई-टेक पॉलीहाउस की तैयारी

यह एक्सीलेंस सेंटर लगभग 40 बीघा में विकसित किया जा रहा है। केवल पौधे तैयार करने तक ही यह सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहां विस्तृत अनुसंधान, बीज उत्पादन और आधुनिक बागवानी तकनीकों का विकास भी होगा। परिसर में अत्याधुनिक पॉलीहाउस का निर्माण किया जाएगा ताकि विभिन्न मौसमों में पौधों की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। इससे मिर्जापुर और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को एक ही स्थान पर सभी आधुनिक कृषि सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

वैज्ञानिक तरीकों और उन्नत सिंचाई का दिया जाएगा प्रशिक्षण

इस केंद्र पर केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि विभिन्न राज्यों से आने वाले किसानों को भी ड्रैगन फ्रूट की खेती का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। किसानों को वैज्ञानिक प्रबंधन, मृदा पोषण, आधुनिक सिंचाई पद्धतियों और फसल की सही कटाई के तरीके सिखाए जाएंगे। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खेती के दौरान किसानों को किसी प्रकार की तकनीकी या व्यावहारिक समस्याओं का सामना न करना पड़े और वे अधिकतम लाभ हासिल कर सकें।

बेंगलुरु के बाद देश का दूसरा बड़ा केंद्र

वर्तमान में भारत का पहला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ड्रैगन फ्रूट बेंगलुरु स्थित भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान में संचालित हो रहा है। इसके बाद मिर्जापुर का यह केंद्र देश में अपनी तरह का दूसरा और उत्तर प्रदेश का पहला संस्थान होगा। जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम के अनुसार, मिर्जापुर जिला धीरे-धीरे ड्रैगन फ्रूट की खेती के प्रमुख हब के रूप में पहचान बना चुका है। ऐसे में यहां एक्सीलेंस सेंटर बनने से क्षेत्रीय किसानों को बहुत बड़ी सहूलियत मिलेगी। 25 जुलाई को पहली किस्त के रूप में 5 करोड़ रुपये जारी होने के बाद अब निर्माण की प्रशासनिक औपचारिकताएं तेजी से पूरी की जा रही हैं।

सवाल-जवाब

उत्तर प्रदेश का पहला ड्रैगन फ्रूट एक्सीलेंस सेंटर कहाँ बनाया जा रहा है?
यह केंद्र उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के देवरी क्षेत्र में 40 बीघा भूमि पर स्थापित किया जा रहा है।
मिर्जापुर ड्रैगन फ्रूट सेंटर के निर्माण पर कुल कितनी लागत आएगी?
इस परियोजना की कुल स्वीकृत लागत 15 करोड़ रुपये है, जिसमें से 5 करोड़ रुपये की पहली किस्त 25 जुलाई को जारी की जा चुकी है।
भारत का पहला ड्रैगन फ्रूट एक्सीलेंस सेंटर कहाँ स्थित है?
देश का पहला ड्रैगन फ्रूट एक्सीलेंस सेंटर बेंगलुरु स्थित भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान में संचालित है।
इस केंद्र से किसानों को क्या-क्या लाभ मिलेंगे?
किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले रोगमुक्त पौधे, बीज, आधुनिक पॉलीहाउस तकनीक, वैज्ञानिक सिंचाई और फसल प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Karan Malhotra@karan-malhotra·30 दिन पहले

हालांकि यह खबर मुख्य रूप से कृषि विकास से जुड़ी है, लेकिन एक क्राइम संवाददाता के दृष्टिकोण से इस तरह की बड़ी सरकारी परियोजनाओं में वित्तीय पारदर्शिता और टेंडर प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखना आवश्यक हो जाता है। 15 करोड़ रुपये के कुल बजट और 5 करोड़ की पहली किस्त के आवंटन के बाद, यह देखना होगा कि निविदाएं पूरी तरह पारदर्शी हों ताकि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग न हो सके और परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी हो।

Rohan Verma@rohan-verma·30 दिन पहले

वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर मेरा मानना है कि इस 15 करोड़ की परियोजना का जमीनी असर तभी दिखेगा जब यह केंद्र सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे। देवरी में 40 बीघा भूमि पर बनने वाले इस संस्थान को मिलने वाली 5 करोड़ की पहली किस्त के बाद, यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि मिर्जापुर और आसपास के जिलों के किसानों तक रोगमुक्त पौधे और वैज्ञानिक प्रशिक्षण पारदर्शी तरीके से पहुंचे। यदि स्थानीय स्तर पर बिचौलियों की दखलंदाजी रोकी गई, तो यह पहल वास्तव में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बागवानी परिदृश्य को बदलने में मील का पत्थर साबित होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·30 दिन पहले

यद्यपि यह कृषि अवसंरचना और किसानों की आय से जुड़ी एक सकारात्मक विकास गाथा है, लेकिन एक अपराध और सार्वजनिक सुरक्षा संवाददाता के रूप में मेरा ध्यान इस बात पर भी रहेगा कि 15 करोड़ रुपये के इस बड़े सरकारी बजट और टेंडर प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। देश के इस दूसरे बड़े केंद्र के निर्माण के दौरान सार्वजनिक धन के सदुपयोग की निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी होगा, ताकि किसानों तक योजनाओं का लाभ बिना किसी वित्तीय अनियमितता के पहुँचे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·30 दिन पहले

यद्यपि यह एक सकारात्मक कृषि विकास है, तथापि एक क्राइम रिपोर्टर के रूप में मेरा ध्यान इस बात पर रहेगा कि 15 करोड़ रुपये के इस बड़े बजट और पहली किस्त के 5 करोड़ रुपये के सही उपयोग पर पूरी पारदर्शिता बरती जाए। प्रशासनिक निगरानी और टेंडर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता न हो, यह सुनिश्चित करना सार्वजनिक धन की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·30 दिन पहले

यह परियोजना उत्तर प्रदेश के बागवानी परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती है, विशेषकर तब जब मिर्जापुर पहले से ही इस फल की खेती का क्षेत्रीय केंद्र बन रहा है। 40 बीघा भूमि पर बनने वाले इस संस्थान में बेंगलुरु के भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान की तर्ज पर होने वाले अनुसंधान से किसानों को वैज्ञानिक सहायता मिलेगी। अब यह देखना होगा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य कितनी तेजी से आगे बढ़ता है और क्या यह केंद्र समय सीमा के भीतर अपनी पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर पाता है या नहीं।

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