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उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में H1N1 जांच निशुल्क, योगी आदित्यनाथ ने निजी लैब की फीस पर भी लगाई रोकउत्तर प्रदेश
2 सित॰ 2026, 11:19 pm (10 दिन पहले)· 2

उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में H1N1 जांच निशुल्क, योगी आदित्यनाथ ने निजी लैब की फीस पर भी लगाई रोक

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू (H1N1) की मुफ्त जांच का निर्देश जारी किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निजी पैथोलॉजी लैब द्वारा अधिक फीस वसूलने पर पाबंदी लगाते हुए स्वास्थ्य विभाग को हाई अलर्ट पर रहने के आदेश दिए हैं।

उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू यानी इन्फ्लूएंजा-A (H1N1) संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए राज्य प्रशासन ने बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य इंतजाम लागू किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर H1N1 की जांच पूरी तरह निशुल्क की जाएगी। इसके साथ ही, जिन जिलों में स्वाइन फ्लू के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं, वहां निगरानी नेटवर्क और चिकित्सीय सुविधाओं को अधिक सुदृढ़ बनाने के स्पष्ट आदेश दिए गए हैं।

निजी लैब पर नकेल और अस्पतालों में ICU वार्ड की तैयारी

राज्य में इन्फ्लूएंजा-A और मौसमी फ्लू की वर्तमान स्थिति का जायजा लेते हुए समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने सख्त हिदायत दी कि निजी स्वास्थ्य संस्थान H1N1 जांच के लिए सरकार द्वारा निर्धारित दर से ज्यादा फीस न वसूलें। उन्होंने अस्पतालों को पर्याप्त मात्रा में दवाइयां, जांच किट तथा पृथक वास (आइसोलेशन) सुविधाएं उपलब्ध रखने का आदेश दिया। गंभीर स्थिति वाले मरीजों के त्वरित उपचार के लिए चिकित्सा संस्थानों में अलग से आईसीयू (ICU) वार्ड आरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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आशा और ANM कर्मियों से डोर-टू-डोर स्क्रीन, टेली-कंसल्टेशन सेवा

बैठक के दौरान H1N1 संक्रमण से बचाव और उपचार से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए। संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान करने के लिए एएनएम (ANM), आशा कार्यकर्ताओं और अन्य मैदानी स्वास्थ्य कर्मियों के सहयोग से घर-घर जाकर जांच व स्क्रीनिंग प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया है। इसके अतिरिक्त, घर पर उपचार ले रहे मरीजों के लिए प्रभावी टेली-कंसल्टेशन सेवाएं शुरू की जा रही हैं ताकि उन्हें घर बैठे डॉक्टरी सलाह मिल सके।

राज्य में 685 मामलों की पुष्टि, जानें लक्षण और फैलाव का तरीका

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने समीक्षा के दौरान बताया कि बुधवार तक उत्तर प्रदेश में प्रयोगशाला से पुष्टि किए गए इन्फ्लूएंजा-A (H1N1) के कुल 685 मरीज दर्ज किए जा चुके हैं। यह श्वसन तंत्र से संबंधित संक्रामक बीमारी मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने के दौरान हवा में फैलने वाली सूक्ष्म बूंदों से प्रसारित होती है। इसके मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, नाक बहना, लगातार खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में ऐंठन व दर्द, ठंड लगना और आंखों का लाल होना शामिल है।

हाई-रिस्क समूहों की सुरक्षा और ओपीडी में अलग काउंटर

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि हल्के लक्षण वाले मरीजों को चिकित्सीय परामर्श के अनुसार घर पर विश्राम करने और स्वयं को आइसोलेट रखने की सलाह दी जाए, जबकि गंभीर मरीजों को बिना किसी देरी के अस्पताल में भर्ती कर इलाज दिया जाए। छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों को हाई-रिस्क श्रेणी में रखते हुए विशेष देखभाल देने के आदेश दिए गए हैं। अस्पतालों में फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों के लिए अलग काउंटर बनाए जा रहे हैं और मरीजों की स्थिति के अनुसार रेफरल प्रणाली लागू की जा रही है ताकि बड़े अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर: डिप्टी सीएम ब्रिजेश पाठक

स्वाइन फ्लू की स्थिति पर उपमुख्यमंत्री ब्रिजेश पाठक ने भी जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को अलर्ट मोड पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि सभी चिकित्सा अधिकारी अपने जिलों में दवाइयों की उपलब्धता और वार्डों की तैयारियों पर लगातार नजर रख रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

सवाल-जवाब

उत्तर प्रदेश के किन अस्पतालों में H1N1 की जांच मुफ्त होगी?
राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वाइन फ्लू (H1N1) की जांच पूरी तरह मुफ्त होगी।
निजी लैब में H1N1 टेस्ट का कितना शुल्क लगेगा?
निजी लैब के लिए सरकार ने फीस की अधिकतम सीमा तय की है, और वे तय फीस से अधिक राशि नहीं वसूल सकते।
उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू के कितने मामले दर्ज किए गए हैं?
बुधवार तक उत्तर प्रदेश में प्रयोगशाला से पुष्टि किए गए स्वाइन फ्लू (H1N1) के कुल 685 मामले दर्ज किए गए हैं।
स्वाइन फ्लू के मुख्य लक्षण क्या हैं?
इसके मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना और आंखें लाल होना शामिल हैं।
किन लोगों को स्वाइन फ्लू का सबसे अधिक खतरा है?
छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग और पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज हाई-रिस्क श्रेणी में आते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Tanvi Desai@tanvi-desai·9 दिन पहले

स्वाइन फ्लू के 685 मामलों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम जनस्वास्थ्य के मोर्चे पर एक गंभीर और जरूरी प्रतिक्रिया है। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच, निजी लैब की दरों पर नियंत्रण और घर-घर स्क्रीनिंग जैसे निर्देश प्रशासनिक मुस्तैदी को दर्शाते हैं। हालांकि, असल चुनौती इन कागजी आदेशों को जमीनी स्तर पर उतारने और हाई-रिस्क समूहों तक बिना किसी देरी के चिकित्सा पहुंचाने की होगी, जिस पर आने वाले दिनों में जनता और विशेषज्ञों की पैनी नजर रहेगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·9 दिन पहले

उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू के 685 मामलों के बीच सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच और निजी लैब्स की फीस तय करना एक प्रभावी कदम है। मौसमी संक्रामक बीमारियों के दौर में जमीनी स्तर पर आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के जरिए डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग और टेली-कंसल्टेशन से मरीजों के दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, हाई-रिस्क समूहों की सुरक्षा के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकारी अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड और आईसीयू बेड की जमीनी तैयारी कितनी मजबूत रहती है।

Ravikash Gupta@ravikash·9 दिन पहले

उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू के 685 मामलों के बीच सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच और निजी लैब्स की फीस तय करना एक प्रभावी कदम है। मौसमी संक्रामक बीमारियों के दौर में जमीनी स्तर पर आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के जरिए डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग और टेली-कंसल्टेशन से मरीजों के दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, हाई-रिस्क समूहों की सुरक्षा के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकारी अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड और आईसीयू बेड की जमीनी तैयारी कितनी मजबूत रहती है। इसके अलावा, राज्य के आर्थिक परिदृश्य और स्वास्थ्य बजट पर इस बात का असर पड़ेगा कि बढ़ती मांग के बीच दवाइयों और जांच किटों की निरंतर आपूर्ति कैसे सुनिश्चित की जाती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 दिन पहले

राज्य में स्वाइन फ्लू के 685 मामलों के बीच सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच और निजी लैब्स की फीस पर रोक का यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था के दायरे में बहुत अहम है। महामारी एक्ट या उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के तहत निजी संस्थानों द्वारा अधिक वसूली पर निगरानी रखना प्रशासन के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·9 दिन पहले

करण मल्होत्रा के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, 685 पुष्ट मामलों के इस दौर में प्रशासनिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीनी स्तर पर आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं की डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग कितनी प्रभावी होती है। हाई-रिस्क समूहों जैसे कि बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा के लिए ओपीडी में अलग काउंटर और टेली-कंसल्टेशन को सुदूर जिलों तक सुचारू रूप से लागू करना स्वास्थ्य विभाग की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

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