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उत्तर प्रदेश में मिलावटी खाद्य पदार्थों पर सख्त एक्शन, योगी सरकार ने एनालॉग पनीर, क्रीम और घी पर लगाया प्रतिबंधउत्तर प्रदेश
15 अग॰ 2026, 4:03 pm (28 दिन पहले)· 0

उत्तर प्रदेश में मिलावटी खाद्य पदार्थों पर सख्त एक्शन, योगी सरकार ने एनालॉग पनीर, क्रीम और घी पर लगाया प्रतिबंध

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य भर में एनालॉग पनीर, क्रीम, घी, छेना और खोवा पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कड़ा फैसला लिया गया है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य भर में मिलावटी और कृत्रिम डेयरी उत्पादों की बिक्री पर नकेल कसने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया है। शासन ने एनालॉग पनीर, क्रीम, घी, छेना और खोवा के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। राजधानी लखनऊ समेत सभी जिलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को इस निर्देश का सख्ती से पालन कराने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

एनालॉग डेयरी उत्पादों पर क्यों लगा प्रतिबंध

बाजार में असली दुग्ध उत्पादों के नाम पर वनस्पति तेल, स्टार्च और रसायनों से तैयार एनालॉग उत्पाद बेचे जा रहे थे। ये उत्पाद देखने और स्वाद में असली पनीर या खोवा जैसे लगते हैं, लेकिन इनमें दूध का वसा यानी मिल्क फैट नहीं होता। सेहत के लिए हानिकारक माने जाने वाले इन मिलावटी विकल्पों से आम लोगों को बचाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने यह कदम उठाया है।

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कार्रवाई और सख्त निरीक्षण के निर्देश

प्रदेश भर की मंडियों, डेयरी इकाइयों और विनिर्माण केंद्रों पर विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यापारियों और निर्माताओं के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को स्पष्ट कहा गया है कि आम जनता को शुद्ध दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराना प्राथमिक जिम्मेदारी है।

सवाल-जवाब

योगी सरकार ने किन डेयरी उत्पादों पर बैन लगाया है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने एनालॉग पनीर, क्रीम, घी, छेना और खोवा के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है।
एनालॉग पनीर या घी क्या होता है?
एनालॉग डेयरी उत्पाद असली दूध के फैट की जगह वनस्पति तेल, स्टार्च और रसायनों का उपयोग करके तैयार किए जाते हैं।
यह प्रतिबंध किस राज्य में लागू हुआ है?
यह प्रतिबंध पूरे उत्तर प्रदेश राज्य में लागू किया गया है।
एनालॉग उत्पादों की बिक्री करने वालों पर क्या कार्रवाई होगी?
नियम का उल्लंघन करने वाले निर्माताओं और विक्रेताओं पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 1

Karan Malhotra@karan-malhotra·28 दिन पहले

यह प्रशासनिक कदम जनस्वास्थ्य के लिहाज से एक मजबूत कानूनी पहल है, क्योंकि ऐसे कृत्रिम खाद्य पदार्थों में मिल्क फैट न होने से उपभोक्ताओं को गंभीर स्वास्थ्य जोखिम होते हैं। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत केवल प्रतिबंध लगाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रवर्तन एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि मिलावटखोरों के खिलाफ समयबद्ध तरीके से मुकदमे चलाए जाएँ ताकि बाजार में इस अवैध कारोबार पर दीर्घकालिक रोक लग सके।

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