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उत्तराखंड की पहाड़ियों में स्कूटी से डिलीवरी कर महिलाएं कमा रहीं ₹20,000 महीनाउत्तराखंड
25 सित॰ 2026, 3:59 pm (42 दिन पहले)· 1

उत्तराखंड की पहाड़ियों में स्कूटी से डिलीवरी कर महिलाएं कमा रहीं ₹20,000 महीना

बागेश्वर में महिलाएं दोपहिया वाहन चलाकर ई-कॉमर्स कंपनियों के पार्सल घर-घर पहुंचा रही हैं और हर महीने ₹15,000 से ₹20,000 कमाकर पलायन की चुनौती को मात दे रही हैं।

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में रोजगार के अवसरों की कमी अक्सर युवाओं और परिवारों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर करती रही है, लेकिन बागेश्वर के घुमावदार पहाड़ी रास्तों पर अब एक नई और सकारात्मक तस्वीर उभर रही है। यहां की स्थानीय महिलाएं अपनी स्कूटी और बाइक के सहारे ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में सक्रिय डिलीवरी पार्टनर बनकर उभरी हैं। दोपहिया वाहन संभालने का हुनर और हाथ में वैध ड्राइविंग लाइसेंस लेकर वे न केवल हर महीने सम्मानजनक कमाई कर रही हैं, बल्कि पहाड़ों से होने वाले पलायन को रोकने में भी एक मजबूत मिसाल पेश कर रही हैं। घर की चारदीवारी से निकलकर खुले रास्तों पर रफ्तार भरती ये महिलाएं आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था में अपनी स्वतंत्र पहचान बना रही हैं।

सरिता पपोला का एक साल का प्रेरक सफर

बागेश्वर में इस जमीनी बदलाव का सबसे प्रमुख चेहरा सरिता पपोला बनी हैं। सरिता को डिलीवरी फील्ड में सक्रिय रूप से कार्य करते हुए एक पूरा साल बीत चुका है। वे पूरी लगन, समय की पाबंदी और निष्ठा के साथ रोजमर्रा के ऑर्डर्स को ग्राहकों के पते तक पहुंचाती हैं। उनके अनुसार, हाल के वर्षों में इंटरनेट और स्मार्टफोन के बढ़ते प्रसार ने पर्वतीय कस्बों में भी ऑनलाइन खरीदारी की आदतों को पूरी तरह बदल दिया है। आज ग्रोसरी, तैयार कपड़े, जरूरी दवाइयां, खान-पान की वस्तुएं और घरेलू उत्पाद सीधे घर के दरवाजे पर मंगवाने की मांग लगातार बढ़ रही है।

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सरिता बताती हैं कि जब ऑनलाइन ऑर्डर्स की संख्या बढ़ती है, तो लॉजिस्टिक्स कंपनियों को समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए विश्वसनीय फील्ड वर्कर्स की भारी जरूरत होती है। पहले इस पूरे काम पर केवल पुरुषों का एकाधिकार माना जाता था और पहाड़ी क्षेत्रों में महिलाओं का डिलीवरी कार्य में उतरना दुर्लभ था। लेकिन सरिता ने इस संकोच को तोड़ते हुए अपनी राह खुद बनाई। वे कहती हैं कि पर्वतीय कस्बों में अधिकांश डिलीवरी दिन के उजाले में पूरी कर ली जाती हैं। महिलाएं दिन के समय अपनी सुरक्षा की निगरानी स्वयं कर लेती हैं, इसलिए पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा से जुड़ी कोई घबराहट या भय का माहौल बिल्कुल नहीं रहता।

फैशन से लेकर क्विक कॉमर्स तक विभिन्न कंपनियों के अवसर

ई-कॉमर्स के विस्तार के चलते बागेश्वर जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में भी कई प्रमुख कंपनियों के प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं, जहां स्थानीय डिलीवरी पार्टनर्स के लिए रोजगार के रास्ते खुले हैं। उम्मीदवार अपनी पसंद और स्थानीय मांग के हिसाब से अलग-अलग श्रेणियों में काम चुन सकते हैं

  • फैशन एवं लाइफस्टाइल प्लेटफॉर्म्स: फ्लिपकार्ट, मीशो, नायका, मिंत्रा और सवाना जैसी प्रमुख कंपनियां अपने परिधानों, सौंदर्य प्रसाधनों और घरेलू सामानों की डिलीवरी के लिए स्थानीय पार्टनर्स को जोड़ती हैं।
  • फूड एवं क्विक कॉमर्स सेवाएं: स्विगी और ब्लिंकिट जैसे क्विक कॉमर्स नेटवर्क, जहां खाने-पीने के सामान और त्वरित डिलीवरी वाले उत्पादों को तय समय सीमा के भीतर ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है।

इन सभी कंपनियों के साथ काम करने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि कर्मियों को अपनी सुविधा के अनुसार काम के घंटे तय करने की सहूलियत मिलती है। डिलीवरी पार्टनर चाहें तो इसे फुल टाइम करियर बना सकते हैं या फिर अपनी सुविधा अनुसार पार्ट टाइम विकल्प चुनकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। ब्लिंकिट जैसे क्विक कॉमर्स मंचों पर आधिकारिक ऑनलाइन फॉर्म और मोबाइल ऐप्लिकेशन के माध्यम से पंजीकरण कर तुरंत ऑनबोर्डिंग की जा सकती है।

पात्रता नियम, जरूरी दस्तावेज और आवश्यक संसाधन

डिलीवरी पार्टनर के तौर पर काम शुरू करने के लिए इच्छुक महिला या पुरुष उम्मीदवार को कुछ बुनियादी मानकों को पूरा करना होता है

  • आयु सीमा: आवेदक की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होनी अनिवार्य है।
  • आवश्यक उपकरण एवं वाहन: उम्मीदवार के पास स्वयं का दोपहिया वाहन होना जरूरी है, जिसमें स्कूटी या बाइक शामिल हो सकती है। इसके अलावा जीपीएस ट्रैकिंग और कंपनी ऐप संचालन के लिए एक एक्टिव एंड्रॉयड स्मार्टफोन होना आवश्यक है।
  • वाहन संबंधी दस्तावेज: आवेदक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) और चालू वाहन बीमा होना चाहिए।
  • पहचान और बैंकिंग प्रमाण: पहचान और आवासीय पते की पुष्टि के लिए आधार कार्ड अथवा वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड तथा अर्जित आय प्राप्त करने के लिए एक सक्रिय बैंक खाता पासबुक या चेक की आवश्यकता होती है।

कमाई के दो मुख्य मॉडल: फिक्स्ड और कमीशन आधार

लॉजिस्टिक्स सेक्टर में डिलीवरी पार्टनर्स के लिए भुगतान की व्यवस्था दो अलग-अलग मॉडल्स पर संचालित होती है, जिसे समझकर कार्यकर्ता अपने लिए उपयुक्त विकल्प चुन सकते हैं

  • फिक्स्ड पेमेंट व्यवस्था: इस मॉडल के अंतर्गत कंपनी हर महीने एक निर्धारित निश्चित राशि का भुगतान करती है। हालांकि, इस व्यवस्था में प्रतिदिन लगने वाले पेट्रोल का खर्च, वाहन की नियमित सर्विसिंग और मेंटेनेंस का समस्त दायित्व डिलीवरी पार्टनर को अपने स्वयं के स्तर पर संभालना पड़ता है।
  • कमीशन आधारित व्यवस्था: इस व्यवस्था में डिलीवरी पार्टनर को प्रति पार्सल के हिसाब से भुगतान किया जाता है। प्रत्येक सफलतापूर्वक डिलीवर किए गए पार्सल पर ₹10 का सीधा कमीशन मिलता है। वर्कर को इसी कमीशन की कुल आय में से अपने वाहन का ईंधन और मेंटेनेंस खर्च निकालना होता है।

यदि कोई कार्यकर्ता पूरी लगन और अनुशासन से फील्ड में काम करे, तो वह हर महीने ₹15,000 से लेकर ₹20,000 तक की कमाई सहजता से कर सकता है। काम शुरू करते समय कंपनी की तरफ से आधिकारिक डिलीवरी बैग और एक आधिकारिक पहचान पत्र (आईडी कार्ड) प्रदान किया जाता है, जबकि वाहन की पूरी व्यवस्था स्वयं वर्कर को ही करनी होती है।

बागेश्वर में नदीगांव रोड पर ऑफलाइन आवेदन की सीधी सुविधा

जो उम्मीदवार बागेश्वर में रहकर सीधे व्यक्तिगत रूप से इस कार्य से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए ऑफलाइन आवेदन की प्रक्रिया बेहद सरल है। इच्छुक आवेदकों को बागेश्वर स्थित नदीगांव वाली रोड पर जाना होगा, जहां ‘डिलीवरी कोरियर’ नाम से एक अधिकृत स्थानीय कार्यालय संचालित हो रहा है। यह ऑफिस मुख्य ई-कॉमर्स कंपनी और डिलीवरी पार्टनर्स के बीच एक सक्रिय कड़ी के रूप में कार्य करता है, जिससे ऑर्डर्स का वितरण और कर्मियों का समन्वय बिना किसी बाधा के सुचारु रूप से चलता है।

इस कार्यालय में औपचारिकताएं पूरी करने और आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद कंपनी की तरफ से उम्मीदवारों को तीन दिनों का विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। इस तीन दिवसीय ट्रेनिंग सत्र के दौरान डिलीवरी पार्टनर्स को पार्सल का सुरक्षित प्रबंधन, पहाड़ी सड़कों पर सटीक रूट प्लानिंग, मोबाइल ऐप के इस्तेमाल और ग्राहकों के साथ पेशेवर संवाद के सभी जरूरी कौशल सिखाए जाते हैं।

घर बैठे डिजिटल माध्यम से कैसे जुड़ें?

यदि कोई उम्मीदवार ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाना चाहता है, तो वह संबंधित कंपनी जैसे ब्लिंकिट या अन्य डिलीवरी प्लेटफॉर्म की आधिकारिक वेबसाइट अथवा पार्टनर मोबाइल ऐप डाउनलोड कर सकता है। ऐप में अपना मोबाइल नंबर दर्ज करने के बाद शहर का चयन करना होता है और व्यक्तिगत ब्योरा भरना होता है। इसके उपरांत ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, आधार कार्ड और बैंक खाते की जानकारी अपलोड की जाती है। कंपनी द्वारा इन डिजिटल दस्तावेजों के सत्यापन और संक्षिप्त ऑनलाइन ट्रेनिंग पूरी होते ही डिलीवरी का काम तुरंत शुरू किया जा सकता है।

सवाल-जवाब

बागेश्वर में डिलीवरी पार्टनर बनकर प्रति माह कितनी कमाई हो सकती है?
मेहनत और नियमितता से काम करने पर एक डिलीवरी पार्टनर हर महीने ₹15,000 से लेकर ₹20,000 तक कमा सकता है।
डिलीवरी पार्टनर बनने के लिए न्यूनतम आयु सीमा क्या है?
इस कार्य से जुड़ने के लिए आवेदक की उम्र कम से कम 18 वर्ष या उससे अधिक होनी अनिवार्य है।
काम शुरू करने के लिए कौन-से व्यक्तिगत संसाधन आवश्यक हैं?
उम्मीदवार के पास स्वयं का दोपहिया वाहन (स्कूटी या बाइक) और एक एक्टिव एंड्रॉयड स्मार्टफोन होना जरूरी है।
वाहन और पहचान से जुड़े किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है?
आवेदक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी, वाहन बीमा, आधार कार्ड या वोटर आईडी, पैन कार्ड और बैंक खाता विवरण होना चाहिए।
कमीशन मॉडल के तहत प्रति पार्सल कितना भुगतान मिलता है?
कमीशन मॉडल में सफलतापूर्वक डिलीवर किए गए प्रत्येक पार्सल के लिए ₹10 का भुगतान किया जाता है, जिससे पेट्रोल और मेंटेनेंस खर्च निकालना होता है।
बागेश्वर में ऑफलाइन आवेदन करने का पता क्या है?
इच्छुक उम्मीदवार बागेश्वर में नदीगांव वाली रोड पर स्थित 'डिलीवरी कोरियर' के अधिकृत कार्यालय में जाकर संपर्क कर सकते हैं।
आवेदन के बाद कंपनी कितने दिनों की ट्रेनिंग देती है?
कंपनी द्वारा तीन दिनों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें पार्सल मैनेजमेंट, रूट प्लानिंग और कस्टमर डीलिंग सिखाई जाती है।
महिला डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को लेकर क्या स्थिति है?
पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकांश डिलीवरी का कार्य दिन के उजाले में पूरा किया जाता है, जिससे सुरक्षा संबंधी कोई डर या चिंता नहीं रहती।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Riya Menon@riya-menon·41 दिन पहले

पहाड़ों में क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी का इस तरह बढ़ना बहुत बढ़िया है। अब घर बैठे ऑनलाइन मंगवाए गए खाने और ग्रोसरी की डिलीवरी महिलाएं खुद स्कूटी पर कर रही हैं, देखकर दिल खुश हो गया।

Arjun Mehta@arjun-mehta·41 दिन पहले

पिछले साल जब मैं बागेश्वर गया था, तो मैंने देखा था कि यहाँ के घुमावदार रास्तों पर सफर करना कितना मुश्किल होता है। ऐसे में इन महिलाओं ने जिस तरह खुद स्कूटी चलाकर पार्सल पहुँचाने का काम शुरू किया है, वह वाकई कमाल है। इससे न सिर्फ उनकी आमदनी हो रही है, बल्कि पहाड़ छोड़ने की मजबूरी भी कम हो रही है।

Ravikash Gupta@ravikash·41 दिन पहले

अ अर्जुन जी, बात तो बिल्कुल सही है आपकी। पर क्या सर्दियों की बर्फबारी में भी ये स्कूटी से डिलीवरी कर पाती होंगी?

Karan Malhotra@karan-malhotra·41 दिन पहले

पहाड़ों की घुमावदार सड़कों पर स्कूटी लेकर सामान पहुँचाना आसान नहीं होता, खासकर तब जब रास्ते ऊबड़-खाबड़ हों। सरिता और बाकी महिलाओं की हिम्मत वाकई कमाल है। बस यह समझ नहीं आया कि इन पहाड़ी रास्तों पर सर्दियों की बर्फबारी या भारी बारिश के वक्त ये लोग कैसे डिलीवरी संभालती होंगी?

Rohan Verma@rohan-verma·41 दिन पहले

करन भाई, बात तो सही है तुम्हारी, पर बारिश या बर्फबारी का डर दिखाकर इन्हें घर बैठने की सलाह देना ठीक नहीं। रास्ते मुश्किल हैं तो क्या, हिम्मत भी तो है उनके पास।

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