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उत्तराखंड में बदला मौसम का मिजाज, चोटियों पर बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश से बढ़ी ठिठुरनउत्तराखंड
26 सित॰ 2026, 2:52 pm (41 दिन पहले)· 2

उत्तराखंड में बदला मौसम का मिजाज, चोटियों पर बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश से बढ़ी ठिठुरन

उत्तराखंड में पिछले 12 घंटों से लगातार बारिश और बर्फबारी के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब की चोटियों पर हिमपात हुआ है, जबकि कई प्रमुख हाईवे मलबा गिरने से बंद कर दिए गए हैं।

उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों से लेकर मैदानी इलाकों तक मौसम ने अचानक करवट ले ली है, जिसके परिणामस्वरूप समूचे प्रदेश में ठंड का प्रकोप काफी बढ़ गया है। बीते 12 घंटों से लगातार जारी मूसलाधार बारिश और ऊंचे पहाड़ों पर शुरू हुई बर्फबारी ने आम जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। एक तरफ जहां धार्मिक स्थलों की ओर जाने वाले रास्ते जोखिम भरे हो गए हैं, वहीं दूसरी तरफ लगातार गिर रहे मलबे ने यातायात को बुरी तरह बाधित कर रखा है।

हेमकुंड और बदरीनाथ में बर्फबारी से सुरक्षा बढ़ाई गई

चमोली जिले के ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड के बीच भारी हिमपात दर्ज किया गया है। प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम की चोटियों के साथ-साथ हेमकुंड साहिब में भी बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है। लगातार हो रही बर्फबारी की वजह से हेमकुंड साहिब के पैदल ट्रैक पर फिसलन खतरनाक हद तक बढ़ गई है, जिससे वहां आने वाले तीर्थयात्रियों का सफर बेहद जोखिम भरा बन गया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत सुरक्षा उपायों को कड़ा कर दिया है। एहतियात के तौर पर यात्रा मार्ग पर राज्य आपदा मोचन बल यानी एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस बल को पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

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नैनीताल और अल्मोड़ा में मूसलाधार बारिश के चलते स्कूल बंद

मौसम विभाग की चेतावनी के बाद नैनीताल तथा उसके आसपास के क्षेत्रों में बीती रात से ही झमाझम बारिश का दौर जारी है। तापमान में आई भारी गिरावट के कारण लोगों को सिहरन का सामना करना पड़ रहा है। इस तेज बरसात के चलते नैनीताल-हल्द्वानी और अल्मोड़ा-हल्द्वानी मार्ग पर कई स्थानों पर पहाड़ियों से भारी-भरकम बोल्डर और मलबा सड़कों पर आ गिरा है, जिससे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह थम गई है। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नैनीताल और अल्मोड़ा जिलों के सभी स्कूलों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। अल्मोड़ा के जिलाधिकारी ने सभी सरकारी महकमों को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रहने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा, अल्मोड़ा-बागेश्वर हाईवे पर कालीमठ के समीप गिरे एक विशाल पेड़ को फायर ब्रिगेड की टीम ने काटकर रास्ते से हटाया, जिसके बाद वहां यातायात सुचारu हो सका।

चीन सीमा पर भारी हिमपात और टनकपुर-पिथौरागढ़ ऑलवेदर रोड ठप

पिथौरागढ़ के सीमांत क्षेत्रों में मौसम का सबसे आक्रामक रूप देखने को मिल रहा है। चीन सीमा से लगे नाभीढ़ाग और गुंजी इलाके पूरी तरह से बर्फ से पट चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार चीन के तकलाकोट क्षेत्र में भी जबर्दस्त बर्फबारी दर्ज की गई है। इस बीच, लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पिथौरागढ़ की जीवन रेखा कही जाने वाली टनकपुर-पिथौरागढ़ ऑलवेदर रोड बीते दिन से पूरी तरह ठप पड़ी है। घाट के पास पहाड़ी से लगातार पत्थरों और मलबे की बारिश हो रही है, जिसकी वजह से सीमा को जोड़ने वाले इस इकलौते हाईवे पर सैकड़ों यात्री फंसे हुए हैं। अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया है। हाईवे प्राधिकरण का स्पष्ट कहना है कि जब तक पहाड़ी से बोल्डर गिरना पूरी तरह बंद नहीं होते, तब तक मार्ग को यातायात के लिए खोलना संभव नहीं होगा।

उत्तरकाशी, गंगोत्री और यमुनोत्री में बढ़ी ठिठुरन

उत्तरकाशी जिले में शनिवार की सुबह से ही हल्की और रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला बना हुआ है। इसके प्रभाव से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जिससे वहां दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को भारी कंपकंपी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी तीन दिनों तक उत्तरकाशी सहित आसपास के इलाकों में मौसम का यह सर्द मिजाज ऐसा ही बना रहेगा और तापमान में और भी अधिक गिरावट दर्ज किए जाने की पूरी संभावना है।

बागेश्वर, चंपावत और खटीमा में भारी बारिश का अलर्ट

कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र के मैदानी तथा तराई वाले हिस्सों में भी बादलों का कहर लगातार जारी है। बीते 24 घंटों के दौरान उधम सिंह नगर जिले के खटीमा में 95 मिलीमीटर और पिथौरागढ़ में लगभग 65 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। बागेश्वर जिले में भी बीती रात से जारी झमाझम बरसात के बाद ठंड में इजाफा हुआ है और स्थानीय लोग पूरी तरह गर्म कपड़ों में नजर आने लगे हैं। चंपावत, देहरादून और गढ़वाल के अनेक हिस्सों में बारिश की लगातार झड़ी लगी हुई है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए राज्य के कई जिलों में भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है।

बदहाल धरमघर-लाथी मार्ग से ग्रामीण परेशान

एक तरफ जहां प्राकृतिक आपदा का पहरा बैठा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ खराब बुनियादी ढांचे और बदहाल सड़कों ने स्थानीय लोगों की मुश्किलों को दोगुना कर दिया है। इस क्षेत्र का धरमघर-चूचेर-माजखेत-लाथी मोटर मार्ग लंबे समय से दयनीय स्थिति का शिकार बना हुआ है। बरसात के इस मौसम में यह रास्ता बार-बार बंद होता रहा है, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य शहरों से कट गया है। सड़क पर बने गहरे गड्ढों और फैले मलबे के कारण राहगीरों तथा वाहन चालकों की जान हर वक्त सांसत में रहती है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि अन्य मुख्य मार्गों पर तो मशीनें लगाकर तत्काल सफाई और बहाली का काम किया जा रहा है, लेकिन इस ग्रामीण मार्ग की लगातार उपेक्षा की जा रही है जिससे उनमें गहरा रोष व्याप्त है।

सवाल-जवाब

उत्तराखंड में मौसम अचानक क्यों बदला है?
पिछले 12 घंटों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और ऊपरी इलाकों में बर्फबारी के कारण उत्तराखंड में मौसम अचानक बदल गया है।
किन धार्मिक स्थलों पर बर्फबारी दर्ज की गई है?
बद्रीनाथ धाम की चोटियों और हेमकुंड साहिब में भारी हिमपात दर्ज किया गया है।
किन जिलों में स्कूलों की छुट्टी घोषित की गई है?
खराब मौसम और भारी बारिश के खतरे को देखते हुए नैनीताल और अल्मोड़ा जिलों में स्कूलों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में छुट्टी घोषित की गई है।
कौन सा मुख्य हाईवे मलबे के कारण बंद है?
पिथौरागढ़ की लाइफलाइन कही जाने वाली टनकपुर-पिथौरागढ़ ऑलवेदर रोड भारी मलबे और पत्थरों की बारिश के कारण ठप पड़ी है।
खटीमा और पिथौरागढ़ में कितनी बारिश दर्ज की गई है?
बीते 24 घंटों के दौरान खटीमा में 95 एमएम और पिथौरागढ़ में करीब 65 एमएम बारिश दर्ज की गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·40 दिन पहले

बदरीनाथ यात्रा के दौरान अचानक मौसम बिगड़ने पर जो मुसीबत होती है, वो मैं अच्छे से जानती हूँ। इस ठंड में पहाड़ों पर सफर करना वाकई बहुत डरावना हो जाता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·40 दिन पहले

हर बार बर्फबारी और बारिश होते ही रास्ते बंद हो जाते हैं और प्रशासन के पास सिर्फ रोने के अलावा कोई काम नहीं बचता। क्या हर साल मौसम अचानक ही बदलता है या हमारी प्रशासनिक तैयारी ही खोखली है?

Ravikash Gupta@ravikash·40 दिन पहले

अर्जुन जी, बात तो सही है आपकी। हर साल यही हाल होता है और हाईवे खुलने का इंतज़ार करते रह जाते हैं सब।

Rohan Verma@rohan-verma·40 दिन पहले

बदरीनाथ यात्रा के दौरान पिछले साल ऐसी ही बर्फबारी में फंस गए थे हम। पहाड़ों का मौसम पल में बदल जाता है, सफर में बहुत सावधानी रखनी पड़ती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·40 दिन पहले

रोहन जी, बिल्कुल सही कहा आपने। पहाड़ों पर मौसम का कोई भरोसा नहीं, सुरक्षा हमेशा पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

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