डांस शूट के दौरान रश्मिका मंदाना के कूल्हे में गंभीर चोट, डॉक्टरों ने दी 6 हफ्ते कंप्लीट बेड रेस्ट की सलाहद अलायंस में कुशाल टंडन द्वारा जैद दरबार के गाल पर किस, वायरल मोमेंट पर गौहर खान का आया करारा रिएक्शनशुरुआती अगस्त में चंद्र-राहु और शनि के संयोग से 3 राशियों की बढ़ेगी मुश्किलें, स्वास्थ्य और बजट पर रखें खास नजरवर्षा ऋतु में लकड़ी का सामान दीमक से बचाए रखने के कारगर घरेलू नुस्खेमंडी सांसद कंगना रनौत का सोशल मीडिया ट्रोलर्स पर तीखा हमला, ऑनस्क्रीन अभिनय और वास्तविक जीवन के बीच स्पष्ट रेखा खींचीभारतीय रिजर्व बैंक का बड़ा फैसला 1 अक्टूबर 2026 से बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों पर लागू होंगे एक समान पारदर्शिता नियमअगस्त में 100 से ज्यादा कंपनियां बांटेंगी डिविडेंड, आईसीआईसीआई बैंक सबसे आगे, दो कंपनियां करेंगी शेयर स्प्लिटइंस्टाग्राम पर संजय दत्त के साथ नई तस्वीरें पोस्ट कर सलमान खान ने लिखा भावनात्मक संदेशराहुल गांधी पर टिप्पणी करना पश्चिम बंगाल की प्रोफेसर को पड़ा भारी, राजनीतिक पोस्ट में ग्रामर मिस्टेक्स पर घिरीं अर्पिता चटर्जीग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में यशवीर सिंह ने जीता ब्रॉन्ज मेडल, नीरज चोपड़ा के साथ पोडियम शेयर कर रचा इतिहास
Akhilesh Yadav का 'फूलों का मौसम' वाला संदेश: नफ़रत छोड़ प्रेम और अपनापन फैलाने की अपीलनेता जी
15 जून 2026, 11:38 am (47 दिन पहले)· 1

Akhilesh Yadav का 'फूलों का मौसम' वाला संदेश: नफ़रत छोड़ प्रेम और अपनापन फैलाने की अपील

समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया मंच X पर एक कविता साझा कर नफ़रत खत्म करने और हर गाँव-गली तक प्रेम, दया और अपनापन पहुँचाने का आह्वान किया।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया मंच X पर एक भावुक और काव्यात्मक संदेश साझा किया है, जिसमें उन्होंने समाज में फैली नफ़रत के बजाय प्रेम, करुणा और भाईचारे को आगे बढ़ाने की बात कही है। उनकी इन तीन पंक्तियों ने सोशल मीडिया पर तेज़ी से चर्चा बटोरी।

क्या लिखा Akhilesh Yadav ने

अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा:

नफ़रत के काँटे बहुत हुए, अब तो 'फूलों का मौसम' लाना है
'प्रेम, दया और अपनापन' लेकर, हर गाँव-गली तक जाना है
हम सबको मिलकर अपने वतन का, लिखना नया फ़साना है

संदेश का भाव

इन पंक्तियों के ज़रिए सपा प्रमुख ने यह कहने की कोशिश की कि अब समाज में कड़वाहट और विभाजन के लिए जगह नहीं होनी चाहिए। 'काँटों' का ज़िक्र वे उस माहौल के लिए करते हैं जिसे वे नफ़रत भरा मानते हैं, जबकि 'फूलों का मौसम' उनके लिए मेल-मिलाप और सकारात्मकता का प्रतीक है।

वे प्रेम, दया और अपनेपन को केवल बड़े शहरों या मंचों तक सीमित न रखकर देश के हर गाँव और हर गली तक पहुँचाने की बात करते हैं। आख़िरी पंक्ति में वे सबको साथ लेकर देश की एक नई कहानी लिखने का आह्वान करते हैं — यानी मिल-जुलकर एक बेहतर भविष्य गढ़ने का संदेश देते हैं।

जनता की प्रतिक्रिया

पोस्ट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं — कई समर्थकों ने इस भावना का स्वागत करते हुए गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी भाईचारे को मज़बूत करने की बात दोहराई, तो कुछ लोगों ने राजनीतिक तंज़ कसते हुए मौजूदा हालात और सपा के पिछले कार्यकाल को लेकर सवाल भी उठाए।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

Akhilesh Yadav ने यह पोस्ट कहाँ साझा की?
उन्होंने यह पोस्ट सोशल मीडिया मंच X पर साझा की।
पोस्ट का मुख्य संदेश क्या है?
नफ़रत को पीछे छोड़कर प्रेम, दया और अपनापन हर गाँव-गली तक पहुँचाने और मिलकर देश की नई कहानी लिखने का आह्वान।
'फूलों का मौसम' से उनका क्या आशय है?
यह मेल-मिलाप, सकारात्मकता और भाईचारे का प्रतीक है, जिसे वे नफ़रत के 'काँटों' के विपरीत रखते हैं।
पोस्ट पर लोगों ने कैसी प्रतिक्रिया दी?
प्रतिक्रियाएँ मिली-जुली रहीं — कुछ ने भावना का स्वागत किया तो कुछ ने राजनीतिक सवाल और तंज़ कसे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR