ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पुरुषों के जैवलिन थ्रो इवेंट के फाइनल में भारतीय एथलीट्स ने शानदार प्रदर्शन किया है। शुक्रवार रात खेले गए इस बेहद रोमांचक मुकाबले में नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर का भाला फेंककर सिल्वर मेडल अपने नाम किया, जो इस सीजन का उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा। वहीं, भारत के उभरते हुए युवा भाला फेंक खिलाड़ी यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता और पोडियम पर नीरज चोपड़ा के साथ तिरंगा लहराया। इस स्पर्धा का गोल्ड मेडल श्रीलंका के एथलीट रमेश के नाम रहा। कॉमनवेल्थ गेम्स में जैवलिन थ्रो का यह मुकाबला बेहद यादगार बन गया, क्योंकि जहां नीरज चोपड़ा से देश को पदक की पूरी उम्मीद थी, वहीं यशवीर सिंह ने अपने ऐतिहासिक प्रदर्शन से सभी खेल प्रेमियों को चौंका दिया।
बांस के भाले से हुई थी करियर की शुरुआत
राजस्थान की राजधानी जयपुर के रहने वाले यशवीर सिंह का एथलेटिक्स की दुनिया में पहुंचने का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। शुरुआती स्कूली दिनों में यशवीर की रुचि बास्केटबॉल खेलने में थी और वे नियमित रूप से बास्केटबॉल खेला करते थे। हालांकि, कुछ समय बाद स्कूली पढ़ाई के दौरान ही उनका रुझान भाला फेंक की ओर बढ़ने लगा। करियर के शुरुआती दिनों में उनके पास महंगे खेल उपकरण उपलब्ध नहीं थे, इसलिए वे शौकिया तौर पर बांस से बने साधारण भाले से अभ्यास किया करते थे।
यशवीर के बास्केटबॉल छोड़कर जैवलिन थ्रो को पेशेवर करियर के रूप में चुनने के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा। उनके पिता राय सिंह खुद एक नेशनल लेवल के जैवलिन थ्रोअर रह चुके हैं। अपने पिता के खेल और उनके अनुभव से प्रेरणा लेते हुए यशवीर ने जैवलिन थ्रो को अपना मुख्य खेल बना लिया। पिता जो सपना राष्ट्रीय स्तर पर पूरा नहीं कर पाए थे, यशवीर सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतकर उस सपने को साकार कर दिखाया है।
कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में दर्ज कराया नाम
कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पुरुषों की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में मेडल जीतने वाले यशवीर सिंह तीसरे भारतीय पुरुष एथलीट बन गए हैं। भारत के लिए इस स्पर्धा में पहला पदक साल 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में काशीनाथ नाइक ने ब्रॉन्ज मेडल के रूप में जीता था। इसके बाद साल 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज चोपड़ा ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा था। अब 2026 के ग्लासगो खेलों में नीरज चोपड़ा ने सिल्वर और यशवीर सिंह ने ब्रॉन्ज जीतकर एक ही स्पर्धा में भारत की झोली में दो पदक डाल दिए हैं।
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में केवल जैवलिन थ्रो ही नहीं, बल्कि अन्य स्पर्धाओं में भी भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। एथलेटिक्स में तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन स्पर्धा में पदक हासिल कर इतिहास रचा। वे कॉमनवेल्थ गेम्स की डेकाथलॉन स्पर्धा में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बने हैं। इसके अतिरिक्त जूडो स्पर्धा में अस्मिता डे ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा, जो कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल करने वाली भारत की पहली महिला जूडोका बनीं। अस्मिता डे भी शुरुआती दिनों में एथलेटिक्स में कड़ी मेहनत किया करती थीं।
नीरज चोपड़ा का मीट रिकॉर्ड तोड़कर आए थे सुर्खियों में
जैवलिन थ्रो के राष्ट्रीय सर्कल में यशवीर सिंह पहली बार तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने इंडियन अंडर-20 फेडरेशन कप में नीरज चोपड़ा का मीट रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया था। उस प्रतियोगिता में यशवीर ने 78.68 मीटर का थ्रो फेंककर नीरज चोपड़ा को पीछे छोड़ दिया था। इस बड़ी उपलब्धि के बाद यशवीर ने अपनी ट्रेनिंग और तकनीक पर लगातार मेहनत की, जिसके दम पर वे जल्द ही 80 मीटर की दूरी को पार करने में सफल रहे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यशवीर का प्रदर्शन लगातार सुधरता गया है। अप्रैल 2025 में दक्षिण कोरिया में आयोजित एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने भारतीय दल का प्रतिनिधित्व किया था। इस प्रतियोगिता में यशवीर ने 82.57 मीटर का थ्रो करके 5वां स्थान हासिल किया था। अपने निरंतर शानदार प्रदर्शन और विश्व रैंकिंग कोटा के बल पर उन्होंने 2025 में टोक्यो में आयोजित विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए भी क्वालीफाई किया था, जहां उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। अपनी इसी मेहनत के दम पर 85.41 मीटर का नया पर्सनल बेस्ट निकालते हुए वे अब कॉमनवेल्थ गेम्स के पोडियम तक पहुंच चुके हैं।



















