अगस्त महीने का आरंभ ज्योतिषीय दृष्टिकोण से काफी उथल-पुथल भरा रहने वाला है। महीने के शुरुआती दो दिनों के भीतर ही दो बड़े अशुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जिनका सीधा प्रभाव कई जातकों की दिनचर्या, शारीरिक कष्ट और आर्थिक स्थिति पर देखने को मिल सकता है। 1 तारीख को जब चंद्रमा कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे, तब वहां पहले से मौजूद राहु के साथ उनका संयोग ग्रहण योग का निर्माण करेगा। इसके ठीक अगले दिन यानी 2 अगस्त को चंद्रमा कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में गोचर कर जाएंगे। मीन राशि में न्याय के देवता शनि देव पहले से ही विराजमान हैं। शनि और चंद्रमा की इस युति के कारण 2 अगस्त को मीन राशि में विष योग आकार लेगा। अगस्त के प्रथम सप्ताह में एक के बाद एक बनने वाले इन दो नकारात्मक योगों के चलते मुख्य रूप से तीन राशियों के जातकों को अपनी सेहत, पारिवारिक जीवन और आर्थिक फैसलों में बेहद सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।
कर्क राशि पर ग्रहण और विष योग का असर
कर्क राशि के स्वामी स्वयं चंद्रमा हैं, इसलिए चंद्रमा पर राहु और शनि के अशुभ प्रभाव का सबसे गहरा असर इसी राशि के जातकों की दिनचर्या पर पड़ सकता है। सेहत के मोर्चे पर इस अवधि में किसी भी प्रकार की लापरवाही भारी पड़ सकती है। खान-पान में संयम रखना अनिवार्य रहेगा, विशेषकर बाजार में मिलने वाले अत्यधिक तली-भुनी और वसायुक्त खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं, क्योंकि यह आपके पाचन तंत्र और समग्र स्वास्थ्य को बिगाड़ सकता है। यदि आपकी आयु 50 वर्ष से अधिक हो चुकी है, तो शरीर में दिखने वाले किसी भी छोटे लक्षण या अस्वस्थता को नजरअंदाज न करें और तुरंत योग्य डॉक्टर से परामर्श लें।
आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह समय बहुत अनुकूल नहीं कहा जा सकता है। घर या कार्यालय में उपयोग होने वाली किसी बहुमूल्य वस्तु अथवा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के अचानक खराब होने से बड़ा बिनबुलाया खर्च सामने आ सकता है, जिससे आपका तय बजट बिगड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, कार्यक्षेत्र में नौकरीपेशा लोगों के लिए स्थितियां थोड़ी असहज हो सकती हैं। प्रबंधन की ओर से आपका स्थानांतरण किसी ऐसी जगह पर किए जाने की प्रबल संभावना है, जहां आप जाना नहीं चाहते थे। इस प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए प्रतिदिन शिवलिंग पर जल अर्पित करना एक अत्यंत फलदायी और शांतिदायक उपाय सिद्ध हो सकता है।
कन्या राशि के जातकों के लिए मानसिक तनाव और खर्च का समय
ग्रहों के इस बदलाव के कारण कन्या राशि के जातकों की कुंडली के छठे और सातवें भाव सक्रिय हो रहे हैं। छठे भाव में ग्रहण योग के निर्मित होने से जातकों को मानसिक बेचैनी, अनावश्यक चिंता और जोड़ों में दर्द जैसी शारीरिक समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। ऐसे में दैनिक गतिविधियों के दौरान अपने शरीर का ध्यान रखना और तनाव से बचना बहुत जरूरी है।
वहीं सप्तम भाव में विष योग की स्थिति बनने के कारण दांपत्य जीवन में छोटी-छोटी बातों को लेकर आपस में वैचारिक मतभेद या नोकझोंक बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। जीवनसाथी के साथ संवाद बनाए रखना और संयम से काम लेना हितकर होगा। इसके साथ ही इस दौरान आपके अनचाहे खर्चों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो सकती है। वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए महीने की शुरुआत से ही एक व्यवस्थित बजट बनाकर चलना समझदारी होगी। इन नकारात्मक ग्रहों की शांति के लिए भगवान गणेश के सिद्ध मंत्रों का नियमित जप करना विशेष लाभ पहुंचाएगा।
वृश्चिक राशि के लिए पारिवारिक और वित्तीय मोर्चे पर सतर्कता की सलाह
वृश्चिक राशि के जातकों के चतुर्थ भाव में महीने की शुरुआत में ग्रहण योग की उपस्थिति बनी रहेगी। कुंडली का चौथा भाव घरेलू सुख-शांति का कारक माना जाता है, इसलिए इस दौरान पारिवारिक माहौल में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। घर के सदस्यों के साथ बातचीत करते समय अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करें, ताकि किसी प्रकार की गलतफहमी या विवाद की स्थिति न पैदा हो।
यदि आपने अतीत में किसी से उधार या कर्ज लिया था, तो इस अवधि में लेनदार अचानक धन वापसी का दबाव बना सकते हैं। अचानक बड़ी रकम लौटाने के कारण आपकी वित्तीय स्थिति डगमगा सकती है और आपको पैसों की तंगी महसूस हो सकती है। सेहत के मामले में न केवल आपको स्वयं अपनी शारीरिक स्थिति पर ध्यान देना होगा, बल्कि अपने माता-पिता के स्वास्थ्य की भी निरंतर निगरानी करनी होगी। यात्रा के दौरान अपने कीमती सामान और दस्तावेजों का विशेष ख्याल रखें, क्योंकि चोरी या गुम होने की आशंका बनी हुई है। उपाय स्वरूप वृश्चिक राशि के जातकों को शिवलिंग पर गाय का कच्चा दूध अर्पित करने की सलाह दी जाती है।



















