भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रसेल्स की अपनी आधिकारिक यात्रा शुरू की, जहां उन्होंने यूरोपीय संघ की उच्च प्रतिनिधि और उपाध्यक्ष काजा कालास से मुलाकात की। यह मुलाकात भारत और यूरोपीय संघ के बीच लगातार बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता की एक और कड़ी है।
पश्चिम एशिया और सुरक्षित व्यापार मार्गों पर चर्चा
इस बैठक में जयशंकर और कालास ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और वहां शांति व स्थिरता बनाए रखने की जरूरत पर विस्तार से बातचीत की। दोनों नेताओं ने समुद्री व्यापार को सुरक्षित और बाधारहित बनाए रखने के महत्व पर भी विचार साझा किए। यह मुद्दा हाल के वर्षों में और संवेदनशील हो गया है, क्योंकि एशिया, खाड़ी और यूरोप को जोड़ने वाले समुद्री मार्ग क्षेत्रीय संघर्षों और सुरक्षा खतरों से लगातार प्रभावित रहे हैं।
भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक भागीदारी फिर एजेंडे में
जयशंकर ने बताया कि बातचीत में भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक भागीदारी को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। यह यात्रा उन खबरों के कुछ ही समय बाद हुई है, जिनमें बताया गया था कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल इस साल की शुरुआत में बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ब्रसेल्स गए थे। दोनों यात्राओं को साथ रखकर देखें तो साफ है कि नई दिल्ली और ब्रसेल्स के बीच व्यापार, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर सक्रियता काफी बढ़ी है।
ब्रसेल्स में कूटनीतिक हलचल तेज
जयशंकर की यह यात्रा बेल्जियम की राजधानी में हाल में हुई इकलौती बड़ी बैठक नहीं है। हंगरी के मैग्यार ने भी ब्रसेल्स में एक बैठक की, जिसे बेहद रचनात्मक बताया गया और जो हंगरी के लिए यूरोपीय संघ के फंड को रोक से मुक्त कराने की कोशिशों का हिस्सा थी। इससे पहले यह भी सामने आया था कि एक यूरोपीय नेता ने मार-अ-लागो में हुई मुलाकात के बाद डोनाल्ड ट्रंप की मानसिक स्थिति को लेकर हैरानी जताई थी। इन घटनाओं से साफ है कि ब्रसेल्स इस समय जटिल ट्रांसअटलांटिक और यूरोपीय कूटनीति के केंद्र में बना हुआ है।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा
जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर काजा कालास के साथ अपनी मुलाकात की जानकारी साझा की और अपनी ब्रसेल्स यात्रा की शुरुआत के साथ ही पश्चिम एशिया, समुद्री सुरक्षा और भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक भागीदारी जैसे अहम मुद्दों का जिक्र किया।
जनता की प्रतिक्रिया
इस पोस्ट पर ज्यादातर प्रतिक्रियाएं सकारात्मक रहीं, कई लोगों ने पश्चिमी देशों और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ भारत की व्यापार व सुरक्षा से जुड़ी लगातार सक्रियता की सराहना की। वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या इतनी बड़ी बातचीत के ठोस नतीजे भी सामने आएंगे, जबकि कुछ टिप्पणियां यात्रा के मूल विषय से हटकर थीं।



















