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छुट्टा पशुओं पर 14 दिन के वादे का हिसाब मांगा अखिलेश यादव ने, 'दिल्ली की पर्ची' से दिया बड़ा सियासी संदेशनेता जी
18 जून 2026, 7:48 pm (45 दिन पहले)· 3

छुट्टा पशुओं पर 14 दिन के वादे का हिसाब मांगा अखिलेश यादव ने, 'दिल्ली की पर्ची' से दिया बड़ा सियासी संदेश

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने X पर पोस्ट कर उन नेताओं को घेरा जिन्होंने छुट्टा पशुओं की समस्या 14 दिन में हल करने का वादा किया था। उन्होंने 'दिल्ली की पर्ची' का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि यह पर्ची केवल बनाने के लिए नहीं, बिगाड़ने के लिए भी आती है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच X पर एक छोटी लेकिन वज़नदार पोस्ट के ज़रिए सत्तापक्ष पर करारा हमला बोला। उनका निशाना उन नेताओं पर था जिन्होंने उत्तर प्रदेश की जनता से वादा किया था कि छुट्टा पशुओं की समस्या केवल 14 दिनों में पूरी तरह खत्म कर दी जाएगी।

14 दिन का वादा और चुनाव से पहले सफाए का डर

अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में साफ कहा कि जब इन नेताओं को उनका वही 14 दिन वाला बयान दोबारा सुनाया जाएगा, तो हालत यह हो सकती है कि चुनाव के मैदान में उतरने से पहले ही उनका सियासी सफाया हो जाए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर ये नेता अपनी खुद की बात का सम्मान नहीं कर सकते, तो कम से कम अपने से वरिष्ठ नेताओं की बात का तो लिहाज़ रखें।

'दिल्ली की पर्ची' और उसका राजनीतिक अर्थ

इस पोस्ट का सबसे धारदार हिस्सा 'दिल्ली की पर्ची' वाला इशारा था। अखिलेश यादव ने स्पष्ट तौर पर कहा कि दिल्ली से आने वाली यह राजनीतिक मंज़ूरी केवल किसी को ऊपर उठाने के लिए नहीं होती। उनका संकेत यह था कि जो नेतृत्व किसी को बनाने की ताकत रखता है, वही उसे हटाने की भी क्षमता रखता है। इस टिप्पणी को व्यापक रूप से भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और उत्तर प्रदेश में पार्टी के राज्य नेताओं के बीच की राजनीतिक निर्भरता पर कटाक्ष के रूप में देखा गया।

जनता की प्रतिक्रिया

इस पोस्ट पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई। एक वर्ग ने अखिलेश के सवालों को सही ठहराया, जबकि दूसरे वर्ग ने यह भी याद दिलाया कि उनके अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में भी आवारा पशुओं की समस्या बनी रही थी।

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सवाल-जवाब

अखिलेश यादव ने किस 14 दिन के वादे का ज़िक्र किया?
उन्होंने उस वादे की बात की जिसमें सत्तापक्ष के नेताओं ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में छुट्टा पशुओं की समस्या केवल 14 दिनों में पूरी तरह खत्म कर दी जाएगी।
'दिल्ली की पर्ची' से अखिलेश का क्या तात्पर्य था?
इससे उनका इशारा भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा राज्य नेताओं को दी जाने वाली राजनीतिक मंज़ूरी की तरफ था, यह बताने के लिए कि जो शक्ति दिल्ली देती है, उसे दिल्ली वापस भी ले सकती है।
क्या छुट्टा पशुओं की समस्या अखिलेश यादव के कार्यकाल में भी थी?
हाँ, सोशल मीडिया पर कई उपयोगकर्ताओं ने यह बात उठाई कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्वकाल के दौरान भी यह समस्या बनी रही थी।
अखिलेश यादव ने यह पोस्ट कहाँ और किस अकाउंट से किया?
उन्होंने यह पोस्ट X (पूर्व में Twitter) पर अपने आधिकारिक अकाउंट @yadavakhilesh से किया।
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