उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काशी यानी वाराणसी के विकास में भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री के यशस्वी मार्गदर्शन और अविनाशी काशी के प्रति उनके अटूट जुड़ाव ने इस प्राचीन नगरी के विकास को नई दिशा दी है, और आज काशी अपनी सनातन आत्मा को अक्षुण्ण रखते हुए 'विकसित भारत' की आकांक्षाओं का नेतृत्व कर रही है।
पोस्ट में योगी आदित्यनाथ ने क्या लिखा
अपने एक्स हैंडल से किए गए इस पोस्ट में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री का मार्गदर्शन और काशी के प्रति उनका जुड़ाव नगरी के विकास की दिशा बदल चुका है। उन्होंने आगे लिखा कि इसी भावना को और अधिक सशक्त करने के मकसद से यह संदेश साझा किया जा रहा है, यानी काशी में चल रहे विकास और सांस्कृतिक कार्यों को लेकर उनका यह बयान एक बड़ी कड़ी का हिस्सा है।
काशी विश्वनाथ में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का प्रतिरूप
खबरों के मुताबिक हाल ही में काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का एक प्रतिरूप स्थापित किया गया है। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन संस्कृति को कोई पराजित नहीं कर सकता। इससे यह साफ होता है कि योगी आदित्यनाथ की सोशल मीडिया पोस्ट काशी में हो रहे धार्मिक और सांस्कृतिक विकास कार्यों की उसी लगातार चल रही कड़ी का हिस्सा है।
पीएम मोदी सबसे लंबे कार्यकाल वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री
इसी दौर में एक अन्य सोशल मीडिया संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सबसे लंबे कार्यकाल वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर बधाई और शुभकामनाएं दी गई हैं। यह संदेश भी उसी समय सामने आया है जब काशी सहित पूरे देश में मोदी के नेतृत्व से जुड़ी उपलब्धियों की चर्चा जोरों पर है।
काशी के बारे में
काशी नगरी वर्तमान वाराणसी शहर में स्थित एक पौराणिक नगरी है और इसे दुनिया के सबसे पुराने शहरों में गिना जाता है। यह गंगा नदी के उत्तरी तट पर उत्तर प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में वरुणा और असी नदियों के गंगा से संगम के बीच बसी है। इसी जगह गंगा करीब चार मील तक दक्षिण से उत्तर की ओर मुड़ती है, और इसी मोड़ पर काशी नगरी बसी हुई है। शहर का पुराना नाम 'वाराणसी' बोलचाल में बिगड़कर 'बनारस' हो गया था, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने आधिकारिक तौर पर फिर से 'वाराणसी' कर दिया। यहां के राजा राज ऋषि राम कोल नागवंश से थे।


















