केजरीवाल का तीखा सवाल: जनता की गाड़ी में एथेनॉल, अडानी के लिए 10 अरब डॉलर का फॉरेक्स क्यों?नेता जी
3 घंटे पहले· 2

केजरीवाल का तीखा सवाल: जनता की गाड़ी में एथेनॉल, अडानी के लिए 10 अरब डॉलर का फॉरेक्स क्यों?

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि 10 अरब डॉलर के फॉरेक्स का इंतजाम कहां से होगा, और आरोप लगाया कि सरकार आम लोगों को एथेनॉल से गाड़ी खराब करने को कहती है जबकि वही रकम अडानी को अमेरिका ले जाने के लिए दी जा रही है।

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट डालकर केंद्र सरकार से सीधा सवाल पूछा है कि 10 अरब डॉलर के फॉरेक्स का इंतजाम आखिर कहां से हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार आम लोगों से एथेनॉल मिला ईंधन इस्तेमाल कर विदेशी मुद्रा बचाने की अपील करती है, वहीं दूसरी तरफ वही रकम अडानी को अमेरिका ले जाने के लिए मुहैया करा दी जाती है। उनके इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और हजारों यूजर्स ने अपनी राय जाहिर की।

केजरीवाल ने पोस्ट में क्या लिखा

अपने पोस्ट में अरविंद केजरीवाल ने लिखा

इस 10 अरब डॉलर के लिए विदेशी मुद्रा कहां से आएगी? मोदी जी हमसे कहते हैं कि एथेनॉल इस्तेमाल करके फॉरेक्स बचाओ, अपनी गाड़ियां खराब करो। और वही फॉरेक्स अडानी को अमेरिका ले जाने के लिए दे दिया जाता है? यह सरासर गलत है।

इस छोटे से पोस्ट में केजरीवाल ने दो अलग-अलग बातों को आपस में जोड़ने की कोशिश की है, एथेनॉल के जरिए फॉरेक्स बचाने की सरकारी अपील और अडानी से जुड़े किसी मामले में कथित तौर पर बड़ी विदेशी मुद्रा के इस्तेमाल की बात। उन्होंने इसे नीति में विरोधाभास बताते हुए सवाल उठाया कि आखिर आम आदमी से त्याग की उम्मीद क्यों की जाती है जब बड़े कॉरपोरेट घरानों के लिए वही संसाधन आसानी से उपलब्ध करा दिए जाते हैं।

एथेनॉल नीति पर उठाया सवाल

केजरीवाल के तर्क का आधार एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर सरकार की नीति है। उनका कहना है कि सरकार लगातार लोगों से कहती रही है कि एथेनॉल मिला पेट्रोल इस्तेमाल करें ताकि तेल आयात पर होने वाला विदेशी मुद्रा खर्च कम हो सके, भले ही इससे कुछ वाहनों के इंजन पर असर पड़ने की शिकायतें सामने आती रही हों। केजरीवाल के मुताबिक आम आदमी से यह त्याग करवाकर बचाई गई विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल जब बड़े औद्योगिक घरानों के अमेरिका से जुड़े किसी काम के लिए किया जाता दिखे, तो यह नीति के मकसद पर ही सवाल खड़ा करता है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर गलत करार दिया है।

10 अरब डॉलर के आंकड़े का जिक्र

अपने पोस्ट में केजरीवाल ने सिर्फ यह पूछा है कि इस 10 अरब डॉलर के लिए विदेशी मुद्रा कहां से आएगी, इससे आगे उन्होंने न तो कोई दस्तावेज साझा किया है और न ही यह बताया है कि यह रकम किस लेनदेन या किस परियोजना से जुड़ी है। पोस्ट में सिर्फ इतना संकेत दिया गया है कि यह रकम अडानी से जुड़े किसी काम के लिए अमेरिका ले जाई जा रही है। चूंकि पोस्ट में इससे ज्यादा विस्तार नहीं है, इसलिए यह पूरी तरह केजरीवाल का अपना आरोप है, जिस पर सरकार या अडानी समूह की तरफ से इस पोस्ट में कोई सीधा जवाब शामिल नहीं है।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का ताजा हाल

केजरीवाल का यह सवाल ऐसे समय आया है जब देश के विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर लगातार खबरें आती रही हैं। खबरों के मुताबिक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3.82 अरब डॉलर बढ़ा और 700 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया, और यह जानकारी रिजर्व बैंक की ओर से दी गई। इसके बाद आई खबरों में बताया गया कि अप्रैल के पहले दो हफ्तों में ही भंडार में 12 अरब डॉलर से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई और यह दोबारा 700 अरब डॉलर के पार पहुंच गया। इससे पहले जनवरी में एक अलग खबर में बताया गया था कि भंडार 9.81 अरब डॉलर घटकर 686.8 अरब डॉलर रह गया था, यानी बीच के महीनों में भंडार में उतार-चढ़ाव दर्ज होता रहा। वहीं अक्टूबर 2025 की एक खबर के मुताबिक भंडार 4.5 अरब डॉलर बढ़कर 702 अरब डॉलर के पार निकल गया था। इन आंकड़ों से साफ है कि देश का फॉरेक्स भंडार लगातार बदलता रहा है, और इसी बड़े आर्थिक परिदृश्य के बीच केजरीवाल का सवाल यह जानने की कोशिश करता है कि इस भंडार का इस्तेमाल किस तरह और किसके लिए हो रहा है।

जनता की प्रतिक्रिया

केजरीवाल के इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने उनके सवाल का समर्थन करते हुए एथेनॉल नीति और फॉरेक्स के इस्तेमाल में तालमेल न होने पर चिंता जताई, तो वहीं एक बड़े तबके ने अडानी समूह की देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार में भूमिका का हवाला देते हुए केजरीवाल की आलोचना की। कुछ यूजर्स ने सवाल किया कि विदेशी मुद्रा किसी कंपनी को सीधे सरकार से नहीं मिलती और नियमों के तहत ही विदेशी निवेश होता है, जबकि कुछ अन्य ने सरकार से इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण की मांग की।

संयुक्त राज्य अमेरिका के बारे में

केजरीवाल के पोस्ट में जिस अमेरिका का जिक्र है, वह उत्तरी अमेरिका महाद्वीप में स्थित एक देश है, जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड स्टेट्स या सिर्फ अमेरिका कहा जाता है। यह 50 राज्यों, एक संघीय जिले और कई स्व-शासित क्षेत्रों से मिलकर बना है। इसके 48 राज्य और संघीय जिला कनाडा और मेक्सिको के बीच उत्तरी अमेरिका के मध्य भाग में स्थित हैं, जबकि अलास्का राज्य उत्तर-पश्चिमी अमेरिका में है और हवाई राज्य मध्य-प्रशांत महासागर में स्थित है। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल यह देश भारत समेत कई देशों के साथ बड़े व्यापारिक और आर्थिक रिश्ते रखता है, यही वजह है कि भारत से जुड़े विदेशी निवेश और फॉरेक्स से जुड़े मामलों में अमेरिका का जिक्र बार-बार आता है।

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सवाल-जवाब

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट किया?
उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर पूछा कि 10 अरब डॉलर के फॉरेक्स के लिए पैसा कहां से आएगा, और आरोप लगाया कि यह रकम अडानी को अमेरिका ले जाने के लिए दी जा रही है।
केजरीवाल के पोस्ट में एथेनॉल का जिक्र क्यों है?
उन्होंने कहा कि सरकार आम लोगों से एथेनॉल मिला ईंधन इस्तेमाल कर फॉरेक्स बचाने को कहती है, भले ही इससे गाड़ियां खराब हों, जबकि वही फॉरेक्स कहीं और इस्तेमाल हो रहा है।
10 अरब डॉलर की रकम किस चीज से जुड़ी है?
पोस्ट में केजरीवाल ने इस बारे में ज्यादा विस्तार नहीं दिया, उन्होंने बस इतना कहा कि यह रकम अडानी को अमेरिका ले जाने के लिए दी जा रही है।
क्या सरकार या अडानी समूह की तरफ से कोई जवाब आया?
पोस्ट में इसका कोई जिक्र नहीं है, सरकार या अडानी समूह की ओर से इस आरोप पर कोई सीधा बयान शामिल नहीं है।
क्या हाल में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बदलाव हुआ है?
खबरों के मुताबिक अप्रैल में भंडार 700 अरब डॉलर के पार पहुंचा और दो हफ्तों में 12 अरब डॉलर से ज्यादा बढ़ा, जबकि जनवरी में यह 9.81 अरब डॉलर घटकर 686.8 अरब डॉलर रह गया था।
पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रिया कैसी रही?
प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं, कुछ ने केजरीवाल के सवाल का समर्थन किया तो कई ने अडानी समूह की आर्थिक भूमिका का हवाला देकर उनकी आलोचना की।
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