प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जुलाई 2026 को कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से फोन पर बात की और कतर के पिता अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर गहरी संवेदना जताई। मोदी ने इस बातचीत की जानकारी खुद एक्स पर पोस्ट करते हुए दी और इसे दोनों देशों के बीच बरसों पुरानी आपसी गर्मजोशी से जुड़ी बातचीत बताया।
मोदी ने पोस्ट में क्या लिखा
अपनी पोस्ट में मोदी ने बताया कि उन्होंने शेख तमीम बिन हमद अल थानी से बात की और पिता अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर दिल से संवेदना व्यक्त की। उन्होंने याद किया कि दिवंगत नेता को भारत से गहरा लगाव था और कतर में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रति भी उनका रवैया हमेशा आत्मीय रहा। मोदी की पोस्ट आगे अधूरी रह गई, लेकिन इतना साफ है कि यह कॉल पिता अमीर के भारत से जुड़े निजी रिश्ते को याद करने और मौजूदा अमीर व कतर की जनता के प्रति सहानुभूति जताने, दोनों मकसद से की गई।
कौन थे शेख हमद बिन खलीफा अल थानी
शेख हमद बिन खलीफा अल थानी को कतर का पिता अमीर कहा जाता है, यानी वह नेता जिन्होंने सत्ता अपने बेटे शेख तमीम बिन हमद अल थानी को सौंपी, जो आज कतर के अमीर हैं। उनके निधन के बाद आ रही श्रद्धांजलियों में उन्हें उदारता वाले अमीर के तौर पर याद किया जा रहा है, एक ऐसे नेता के तौर पर जिन्होंने आधुनिक कतर को दुनिया के मंच पर पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई। भारत के लिहाज से मोदी की पोस्ट में यही रेखांकित किया गया कि पिता अमीर को भारत से खास लगाव था और कतर में रह रहे बड़े भारतीय समुदाय के प्रति भी उनका नजरिया हमेशा अपनापन भरा रहा, एक ऐसा रिश्ता जिसका जिक्र भारतीय नेता दिल्ली-दोहा संबंधों की बात करते हुए बार-बार करते रहे हैं।
पूरे साल मोदी और कतर के बीच लगातार बातचीत
यह संवेदना कॉल अचानक नहीं आई। साल 2026 के दौरान पश्चिम एशिया में बार-बार बढ़े तनाव के बीच मोदी कतर के अमीर के लगातार संपर्क में रहे हैं। मार्च में मोदी ने कतर के अमीर के साथ-साथ ओमान के सुल्तान और कुवैत के क्राउन प्रिंस से भी बात की थी और अलग से यह भी कहा था कि भारत कतर के साथ मजबूती से खड़ा है। अगले महीने विदेश मंत्री जयशंकर ने खाड़ी संकट की व्यापक कूटनीति के तहत कतर, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के साथ उच्च स्तरीय बातचीत की, वहीं इसी दौर में कतर के अमीर ने अमेरिका-ईरान संघर्षविराम वार्ता को लेकर डोनाल्ड ट्रंप से भी बात की। मई में मोदी ने दोहा में हुए हमलों पर चिंता जताते हुए कतर के अमीर को फिर फोन किया, जबकि कतर के अमीर ने अलग से पश्चिम एशिया में तनाव को लेकर ट्रंप से भी संपर्क किया। इसी क्रम में 16 जुलाई की यह कॉल दोनों नेताओं के बीच चल रहे सिलसिले की ताजा कड़ी है, फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार वजह कोई सुरक्षा संकट नहीं बल्कि कतर के शाही परिवार में हुआ निधन है।
इस कॉल की अहमियत
कतर में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं और ऊर्जा, व्यापार तथा पश्चिम एशिया की क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी कतर भारत के लिए अहम साझेदार है। प्रधानमंत्री स्तर पर आया यह संवेदना कॉल बताता है कि दिल्ली कतर के शाही परिवार में हुए इस बदलाव को महज एक औपचारिक कूटनीतिक रस्म नहीं, बल्कि सीधे जुड़ाव लायक मौका मानती है। यह इस साल दिख रहे उसी पैटर्न को भी पुख्ता करता है, जिसमें मोदी संकट और शोक, दोनों मौकों पर व्यक्तिगत रूप से आगे आकर बात करते रहे हैं, जो बताता है कि यह रिश्ता महज लेन-देन वाला नहीं बल्कि दोनों अमीर और भारत के प्रधानमंत्री के बीच निजी आत्मीयता वाला भी है।
जनता की प्रतिक्रिया
मोदी की इस पोस्ट पर एक्स पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने इसे भारत-कतर के मजबूत रिश्तों की सच्ची झलक बताते हुए दिवंगत पिता अमीर को अपनी तरफ से श्रद्धांजलि दी, तो कुछ ने प्रधानमंत्री के इस कदम पर सवाल उठाए और आलोचना भी की। इसके अलावा कई कमेंट ऐसे भी रहे जिनका इस खबर से सीधा कोई लेना-देना नहीं था और वे घरेलू राजनीति से जुड़े मुद्दों की तरफ मुड़ गए, जो सोशल मीडिया पर आम बात है।



















