कनाडा की बेरोजगारी दर और बैंक ऑफ कनाडा के फैसलों पर टिकी निवेशकों की निगाहेंसेनहाइजर अकेंटम क्लिप रिव्यू (2026): ओपन-इयर डिज़ाइन और फिटनेस प्रेमियों के लिए खास ऑडियो डिवाइससैमसंग एचडब्लू-क्यू900एच साउंडबार रिव्यू (2026): बेहतरीन ऑडियो और दमदार फीचर्स वाला शानदार डिवाइसइंदौर के रावजी बाजार में महिला को जबरन ले जाने की कोशिश, गुस्साई भीड़ ने आरोपी असलम को अर्धनग्न कर पीटायूएस ओपन में बड़ा उलटफेर, तीसरे सीड फेलिक्स ओगर-अलियासिम को कारेन खाचानोव ने दी मातहल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद कथित शुद्धीकरण का विवाद पहुंचा उत्तराखंड हाई कोर्टब्रेविले द कॉम्पैक्ट स्मार्ट ओवन रिव्यू: जानें इस छोटे काउंटरटॉप ओवन की परफॉर्मेंसजीपीटी-6 अस्त्र के साथ एजीआई युग की शुरुआत, ओपनएआई का बड़ा दावाजावेद अख्तर ने बताया, जब 8 साल के फरहान अख्तर ने पूछा था कि क्या हम मुसलमान हैंतमिलनाडु में 35 रुपये प्रति किलो बिक रहा प्याज, इन जगहों से आसानी से करें खरीदारी
शशि थरूर ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भारत, चीन और नेपाल से की मिलकर काम करने की अपीलनेता जी
3 सित॰ 2026, 8:49 pm (4 घंटे पहले)· 1

शशि थरूर ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भारत, चीन और नेपाल से की मिलकर काम करने की अपील

शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर अपने नए स्तंभ के माध्यम से भारत, चीन और नेपाल के बीच साझा हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के प्रबंधन पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि के लिए अन्य देश जिम्मेदार हैं, जबकि नेपाल बिना किसी गलती के इसका खामियाजा भुगत रहा है।

शशि थरूर ने हिमालयी क्षेत्र की पर्यावरणीय स्थिरता पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सीमा पार पर्यावरण प्रबंधन की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया है। एक्स पर अपने आधिकारिक हैंडल के जरिए इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित अपने नवीनतम स्तंभ थरूराथिंक के प्रमुख विचारों को साझा करते हुए, उन्होंने यह महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि क्या भारत, चीन और नेपाल अपने साझा हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के प्रबंधन के लिए एक साथ मिलकर सहयोग कर सकते हैं। उनका मुख्य तर्क यह रेखांकित करता है कि इस क्षेत्र के छोटे और संवेदनशील देश बिना किसी बड़ी भूमिका के वैश्विक जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों का भारी बोझ उठा रहे हैं।

नेपाल पर जलवायु परिवर्तन का असमान प्रभाव

इस चर्चा का मुख्य बिंदु यह है कि नेपाल वर्तमान में वैश्विक तापमान में वृद्धि की भारी कीमत चुका रहा है, जबकि इस समस्या में उसका अपना योगदान बेहद कम है। तेजी से पिघलते ग्लेशियर, अनिश्चित मानसून, नाजुक पहाड़ी ढलान और अचानक आने वाली बाढ़ नेपाल के स्थानीय समुदायों के लिए लगातार बड़ा खतरा बन रहे हैं। थरूर ने जोर देकर कहा कि दुनिया के बड़े औद्योगिक देशों द्वारा उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसों का खामियाजा हिमालयी देशों को भुगतना पड़ रहा है। इस बढ़ते पारिस्थितिक असंतुलन से निपटने के लिए जलवायु न्याय और पड़ोसी देशों के बीच एक ठोस सहयोग व्यवस्था की सख्त जरूरत है।

क्षेत्रीय पारिस्थितिक सहयोग की आवश्यकता

नाजुक हिमालयी पर्वत श्रृंखला की सुरक्षा के लिए भारत, चीन और नेपाल के बीच कूटनीतिक और वैज्ञानिक समन्वय अनिवार्य है। इन तीनों देशों के बीच नदियां, ग्लेशियर और नदी बेसिन प्राकृतिक रूप से आपस में जुड़े हुए हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि किसी एक क्षेत्र में पर्यावरण का नुकसान या अचानक होने वाली प्राकृतिक आपदा का असर निचले इलाकों और पड़ोसी सीमाओं पर तुरंत पड़ता है। संयुक्त निगरानी तंत्र के अभाव में बुनियादी ढांचों के अनियंत्रित निर्माण और वनों की कटाई से प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम और बढ़ जाता है। एक साझा सीमा पार व्यवस्था के जरिए जल विज्ञान संबंधी महत्वपूर्ण डेटा साझा करने, ग्लेशियर झील टूटने के खतरों को प्रबंधित करने और आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने में मदद मिल सकती है।

जनता की प्रतिक्रिया और ऑनलाइन चर्चा

सोशल मीडिया पर इस विचार के सामने आने के बाद आम लोगों और विश्लेषकों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि नदियां और मौसम संबंधी खतरे राजनीतिक सीमाओं को नहीं मानते, इसलिए पर्यावरण सुरक्षा में एकजुटता जरूरी है। कुछ उपयोगकर्ताओं ने यह सुझाव दिया कि बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं की अग्रिम सूचना देने के लिए भारत और नेपाल जैसे देशों में एकीकृत मोबाइल आपातकालीन चेतावनी प्रणाली लागू की जानी चाहिए। वहीं, कुछ अन्य लोगों ने रणनीतिक चुनौतियों और चीन के साथ भू-राजनीतिक तनावों का जिक्र करते हुए कहा कि विकसित देशों को जलवायु क्षतिपूर्ति देनी चाहिए और पर्यावरण नीतियों को धरातल पर उतारने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर क्या मुख्य प्रस्ताव रखा?
उन्होंने भारत, चीन और नेपाल के बीच साझा हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संयुक्त प्रबंधन के लिए सहयोग का प्रस्ताव रखा।
नेपाल जलवायु परिवर्तन के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील क्यों है?
वैश्विक औद्योगिक ग्रीनहाउस उत्सर्जन में न्यूनतम योगदान के बावजूद नेपाल वैश्विक तापमान वृद्धि के गंभीर परिणामों का सामना कर रहा है।
हिमालयी नदियों के प्रबंधन में सीमा पार सहयोग कैसे मदद कर सकता है?
सहयोग से जल स्तर, ग्लेशियर पिघलने और मौसम संबंधी डेटा को तुरंत साझा किया जा सकता है, जिससे बाढ़ के पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन में सुधार होगा।
इस पर्यावरणीय प्रस्ताव पर जनता की क्या प्रतिक्रिया रही?
प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं; कई लोगों ने आपातकालीन चेतावनी प्रणाली का समर्थन किया, जबकि कुछ ने भू-राजनीतिक चुनौतियों और जलवायु क्षतिपूर्ति का मुद्दा उठाया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR