कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी है। उन्होंने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस अखबार में प्रकाशित अपने उस संबोधन का जिक्र किया है, जो उन्होंने रामनाथ गोएन्का साहित्य सम्मान के लिए जूरी के अध्यक्ष के रूप में दिया था। अपने इस बयान में उन्होंने पुस्तकों के चयन और उन्हें आंकने के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की थी।
साहित्यिक मूल्यांकन पर विचार
शशि थरूर ने जूरी के अध्यक्ष की भूमिका निभाते हुए पुस्तकों के चयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सामने रखा। उन्होंने उन तमाम मुश्किलों और मापदंडों का जिक्र किया, जिनका सामना किसी भी साहित्यिक कृति का मूल्यांकन करते समय करना पड़ता है। उनके इस संबोधन के मुख्य अंशों को अखबार में प्रमुखता से जगह दी गई थी, जिसे उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से पाठकों के साथ साझा किया।
सार्वजनिक प्रतिक्रिया
इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर अपनी-अपनी राय रखी है। कई लोगों ने इस विषय पर खुलकर अपने विचार साझा किए हैं और साहित्य जगत से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी है।



























