अमेरिका में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने के आरोप में हैरी बॉक्सर की गिरफ्तारी की खबर आने के बाद राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले के बानसूर स्थित उसके पैतृक गांव चतरपुरा में रहने वाले परिवार का दर्द खुलकर सामने आया है। परिजनों ने स्पष्ट किया है कि हैरी बॉक्सर के कथित आपराधिक कृत्यों से उनका दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उसके नाम की वजह से उन्हें लगातार पुलिस की पूछताछ और भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। परिवार के सदस्यों ने बेहद भावुक अंदाज में अपील करते हुए कहा कि वे सिर्फ हरिचंदपुर को जानते हैं और हैरी बॉक्सर नाम के व्यक्ति से उनका कोई वास्ता नहीं है। परिजनों का कहना है कि घर पर पुलिस के बार-बार चक्कर लगाने की वजह से छोटे बच्चे भी अब बुरी तरह डरने लगे हैं। हालांकि, अब इस गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद परिवार को इस बात की उम्मीद बंध गई है कि शायद उन्हें इस मानसिक प्रताड़ना और परेशानी से हमेशा के लिए राहत मिल जाएगी।
साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि और बॉक्सिंग से अपराध की दुनिया तक
अमेरिकी एजेंसियों द्वारा हैरी बॉक्सर को गिरफ्तार किए जाने के बाद उसका परिवार एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है। इस शख्स का असली नाम हरिचंद जाट है और वह कोटपूतली-बहरोड़ जिले के अंतर्गत आने वाली बानसूर तहसील के चतरपुरा गांव का मूल निवासी है। उसके पिता एक साधारण किसान हैं और पूरा परिवार एक सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखता है। अपराध की इस अंधेरी दुनिया में उतरने से पहले वह जयपुर शहर में रहकर बॉक्सिंग का प्रशिक्षण लिया करता था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ जयपुर, अलवर, सीकर, धौलपुर और करौली समेत राजस्थान के तमाम अलग-अलग इलाकों में लूट, हत्या के प्रयास और मारपीट जैसी गंभीर धाराओं के तहत 10 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसे कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ भी बताया जाता है।
करीब पांच साल पहले ही परिवार से टूट गया था संपर्क
परिवार के सदस्य राहुल जाट ने मीडिया से बात करते हुए जानकारी दी कि लगभग पांच साल पहले ही हरिचंद से उनका संपर्क पूरी तरह से टूट चुका था। इसके बाद से ही परिवार ने उससे सभी रिश्ते खत्म कर लिए थे और उसे अपने परिवार से आधिकारिक तौर पर बेदखल कर दिया था। परिजनों का यह भी दावा है कि इस सबके बावजूद राजस्थान सहित कई अन्य राज्यों की पुलिस समय-समय पर उनके घर पर आ धमकती है और हरिचंद के ठिकानों तथा गतिविधियों के बारे में पूछताछ करती है। पुलिस के इस प्रकार बार-बार घर आने से परिवार के सभी लोग बुरी तरह मानसिक तनाव और परेशानी के दौर से गुजर रहे हैं। परिजनों ने दोहराया कि उन्होंने बहुत लंबे समय से हरिचंद से किसी भी तरह का कोई संपर्क नहीं रखा है, फिर भी पुलिस की तरफ से पूछताछ का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। उन्होंने दर्द बयां करते हुए बताया कि इस पूरी स्थिति का सबसे बुरा और गहरा असर घर के छोटे-छोटे मासूम बच्चों पर पड़ रहा है। जैसे ही पुलिस की गाड़ियां उनके घर के सामने पहुंचती हैं या पुलिसकर्मी पूछताछ करने लगते हैं, तो बच्चे बुरी तरह सहम जाते हैं और खौफ के साए में जीने को मजबूर हो जाते हैं।
कानून अपना काम करे, लेकिन बेकसूर परिवार को न सताया जाए
अपनी गहरी पीड़ा को जाहिर करते हुए परिजनों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि हरिचंद ने किसी भी प्रकार का कोई अपराध किया है और वह अब गिरफ्तार हो चुका है, तो देश के कानून के मुताबिक उसे सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्हें उसकी गिरफ्तारी से किसी भी तरह की कोई आपत्ति या ऐतराज नहीं है, लेकिन केवल उसके नाम की वजह से पूरे निर्दोष परिवार को बार-बार परेशान किया जाना बिल्कुल गलत है। परिवार का कहना है कि वे हरिचंदपुर को अच्छी तरह जानते हैं लेकिन हैरी बॉक्सर को नहीं पहचानते और उससे उनका कोई संबंध नहीं बचा है। पिछले करीब पांच सालों से उनका उससे कोई वास्ता नहीं रहा है, इसके बावजूद पुलिस बार-बार घर आकर पूछताछ करने चली आती है।
गिरफ्तारी की खबर के बाद परिवार को जगी राहत की उम्मीद
हैरी बॉक्सर की गिरफ्तारी की खबर मिलने के बाद अब परिवार के भीतर यह उम्मीद जागी है कि शायद अब पुलिस की पूछताछ और उनके घर पर आने-जाने का सिलसिला कम हो जाएगा या पूरी तरह बंद हो जाएगा। परिजनों ने मीडिया के माध्यम से पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से यह गुहार लगाई है कि किसी अन्य व्यक्ति के कथित अपराधों की सजा उसके मासूम परिवार और बच्चों को न दी जाए। उनका कहना है कि परिवार के बाकी अन्य सदस्यों का अपराध की दुनिया से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है और वे सभी केवल एक सामान्य व शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं। परिवार की केवल यही एक मांग है कि पुलिस अपनी जांच और कानूनी कार्रवाई को अपने तरीके से जारी रखे, लेकिन बेवजह उनके घर के लोगों को बार-बार पूछताछ के नाम पर प्रताड़ित न किया जाए।

















