प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों के प्राध्यापकों और शिक्षकों से नशा मुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा करते हुए उन्होंने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों से आग्रह किया कि वे युवा पीढ़ी को नशे की दुष्प्रवृत्तियों से बचाने और कैंपस में जागरूकता फैलाने के लिए आगे आएं। इसके साथ ही, देश भर के स्कूलों को भी इस अभियान के तहत नशा मुक्त परिसर बनाने की दिशा में विशेष कदम उठाए जा रहे हैं।
नशे को हराने वाला युवा असली योद्धा: पीएम मोदी का संदेश
नशा मुक्ति के इस व्यापक अभियान के दौरान प्रधानमंत्री ने समाज की सोच में बदलाव लाने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जो युवा नशे की गर्त से बाहर निकलकर अपनी जिंदगी को दोबारा संवारते हैं, वे वास्तव में असली योद्धा हैं। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि ऐसे युवाओं का बहिष्कार करने के बजाय उन्हें स्वीकार किया जाए और आगे बढ़ने का दूसरा अवसर दिया जाए। प्रधानमंत्री के अनुसार, समाज की सहानुभूति और समर्थन ही एक पूर्व-पीड़ित को पुनर्वसन की राह पर मजबूती से टिकाए रख सकता है।
स्कूलों और विश्वविद्यालयों में जागरूकता अभियान
देशभर के शिक्षण संस्थानों को नशे के खिलाफ एक मजबूत ढाल बनाने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर पहल की जा रही है। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के स्कूलों से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों तक, नशा मुक्त विद्यालय और कैंपस तैयार करने के लिए विशेष गाइडलाइंस और गतिविधियां संचालित करने की योजना बनाई गई है। इस पहल के तहत शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है ताकि वे छात्रों के व्यवहार और संगति पर नजर रखने के साथ-साथ उन्हें नशे के सामाजिक, शारीरिक और मानसिक दुष्प्रभावों से लगातार अवगत करा सकें।
सामाजिक परिवर्तन और नेतृत्वकर्ताओं की राय
हरियाणा के सिरसा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व राज्यपाल प्रोफेसर गणेशी लाल ने प्रधानमंत्री के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि पीएम मोदी द्वारा शुरू किया गया यह नशा मुक्ति अभियान समाज में दूरगामी और सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समाज का हर वर्ग और शिक्षक इस लड़ाई में साथ नहीं आएंगे, तब तक पूरी तरह से नशा मुक्त भारत का सपना साकार नहीं हो सकता। नशा मुक्ति के लिए जनभागीदारी को सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।
जनता की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री के इस सोशल मीडिया संदेश पर आम नागरिकों और उपयोगकर्ताओं की ओर से व्यापक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कई लोगों ने इस पहल का समर्थन करते हुए इसे युवाओं के भविष्य के लिए एक आवश्यक कदम बताया, वहीं कई उपयोगकर्ताओं ने जमीनी स्तर पर सख्त कदम उठाने की मांग की। कुछ लोगों ने शराब के ठेकों और तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर कड़े नियम लागू करने, शिक्षण संस्थानों व धार्मिक स्थलों से ठेके दूर स्थानांतरित करने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने का सुझाव दिया।


























