ओडिशा के गंजाम जिले के तनरजीपल्ली गांव से एक बेहद भावुक और अदम्य साहस की खबर सामने आई है, जहां 11 वर्षीय एक स्कूली छात्र ने भयानक हादसे के बाद जीवन रक्षा की अनोखी मिसाल पेश की है. हादसा इतना गंभीर था कि बच्चे के पेट में गहरा घाव हो गया और उसकी आंतें शरीर से बाहर आ गईं. इसके बावजूद 11 साल का यह मासूम जरा भी पैनिक नहीं हुआ और बेहद ठंडे दिमाग से काम लेते हुए अपनी जान बचाने में कामयाब रहा.
स्कूल जाते समय हुआ भयानक हादसा
यह घटना 17 अगस्त की है, जब तनरजीपल्ली निवासी 11 वर्षीय चिनू मलिक सुबह अपने घर से स्कूल के लिए निकला था. रास्ते में वह एक भयानक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया. इस टक्कर के कारण चिनू के पेट में गहरा जख्म हो गया और उसकी आंतें बाहर निकल आईं. ऐसी दर्दनाक स्थिति में सामान्यतः कोई भी बच्चा आपा खो बैठता, लेकिन चिनू ने साहस का परिचय दिया. उसने तुरंत अपनी स्कूल यूनिफॉर्म की शर्ट से बाहर निकली आंतों को कसकर बांधा और संभाला. इसके बाद वह उसी अवस्था में दो किलोमीटर की कठिन दूरी पैदल तय करके अपने गांव तक पहुंचा.
सड़क के अभाव में बाइक से पहुंचाया गया बड़गड़ा मेडिकल सेंटर
जब चिनू पेट को अपनी शर्ट से थामे हुए गांव पहुंचा, तो उसकी हालत देखकर परिजन और ग्रामीण हैरान रह गए. ग्रामीणों ने तुरंत एम्बुलेंस को संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन तनरजीपल्ली गांव तक पक्की सड़क न होने के कारण आपातकालीन वाहन मौके पर नहीं पहुंच सका. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए परिजनों ने बिना एक पल गंवाए चिनू को मोटरसाइकिल पर बैठाया और 10 किलोमीटर दूर स्थित बड़गड़ा मेडिकल सेंटर ले गए. वहां प्राथमिक उपचार देने के पश्चात डॉक्टरों ने बच्चे को तुरंत एम्बुलेंस के माध्यम से ब्रह्मपुर के एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के लिए रेफर कर दिया.
दो घंटे चली जटिल सर्जरी, डॉक्टरों ने बताया चमत्कार
ब्रह्मपुर के एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल पहुंचते ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने चिनू का इलाज शुरू किया. डॉक्टरों ने तुरंत आपातकालीन ऑपरेशन करने का फैसला लिया. लगभग दो घंटे तक चली बेहद जटिल सर्जरी के जरिए डॉक्टरों ने पेट से बाहर निकली आंतों को वापस सुरक्षित स्थान पर स्थापित किया. इस दौरान बच्चे को आवश्यक रक्त भी चढ़ाया गया. शल्य चिकित्सा के बाद चिनू को गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में डॉक्टरों की निरंतर देखरेख में रखा गया. बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मानस रंजन दास ने बताया, "ईश्वर की कृपा से बच्चा बच गया है और अब वह पूरी तरह खतरे से बाहर है." डॉक्टरों के अनुसार घाव पूरी तरह भरने के बाद बच्चे को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा.
तीन दिन बाद सेहत में सुधार, परिजनों से की बात
सर्जरी के तीन दिन बीत जाने के बाद चिनू की शारीरिक स्थिति में काफी सुधार देखा जा रहा है. उसने आईसीयू में अपनी मां और मामा से बातचीत करना शुरू कर दिया है, जिससे परिजनों ने राहत की सांस ली है. चिकित्सा टीम ने उसे हल्का तरल भोजन देना भी शुरू कर दिया है. हादसे के अपने अनुभव के बारे में बताते हुए चिनू मलिक ने कहा, "जब मेरी आंतें बाहर आ गईं तो मैं घबराया नहीं और अपनी शर्ट से उन्हें पकड़कर घर चल दिया." चिनू के अनुसार कपड़े से आंतों को कसकर पकड़े रहने से उसे शारीरिक दर्द में थोड़ी राहत महसूस हो रही थी. फिलहाल बच्चे की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है.



















