ओडिशा में सरकारी भूखंडों का दुरुपयोग कर अवैध रूप से गांजे की फसल उगाने वालों के खिलाफ राज्य प्रशासन ने आक्रामक रुख अपना लिया है। राज्य सरकार की ओर से जारी एक कड़े दिशा-निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी संपत्ति पर किसी भी प्रकार की नशीले पदार्थों की खेती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस अवैध गतिविधि पर पूरी तरह रोक लगाने के उद्देश्य से राज्य के 6 चिन्हित जिलों में जमीन की निगरानी व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से कड़ा करने के निर्देश दिए गए हैं।
6 संवेदनशील जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र जारी
राजस्व विभाग के सचिव ने राज्य के 6 प्रमुख जिलों के जिलाधिकारियों को आधिकारिक पत्र प्रेषित कर इस विषय में तत्काल और प्रभावी कदम उठाने को कहा है। जिन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने का आदेश जारी हुआ है, उनमें मलकानगिरी, कोरापुट, रायगड़ा, कंधमाल, बौध और गजपति जिले शामिल हैं। इन जिलों के प्रशासनिक प्रमुखों को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आने वाली हर सरकारी भूमि की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने और अवैध खेती की सूचना मिलते ही संबंधित एजेंसियों को सतर्क करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
तहसीलदार और राजस्व निरीक्षकों को सौंपी गई निगरानी की जिम्मेदारी
अवैध खेती की पहचान करने के लिए निचले स्तर के प्रशासनिक अमले को सीधे तौर पर जवाबदेह बनाया गया है। सरकार के नए निर्देशों के अनुसार, सभी संबंधित क्षेत्रों के तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार और राजस्व निरीक्षकों को अपने इलाकों में मौजूद सरकारी जमीनों की गहन जांच करने को कहा गया है। यह प्रशासनिक दल यह सुनिश्चित करेगा कि दूरदराज या सुनसान इलाकों में स्थित सरकारी जमीन पर गांजे के पौधे न उगाए जा रहे हों।
पुलिस और एसटीएफ के साथ त्वरित सूचना साझाकरण
सरकारी जमीन पर अवैध रूप से उगाए गए गांजे की फसल का पता चलते ही त्वरित कार्रवाई के लिए स्पष्ट कार्यप्रणाली तय की गई है। जैसे ही राजस्व अमले को ऐसी किसी खेती की जानकारी मिलेगी, उन्हें बिना किसी विलंब के स्थानीय पुलिस थाने में मामले की औपचारिक सूचना दर्ज करानी होगी। इसके साथ ही, इस घटना की विस्तृत जानकारी विशेष कार्यबल (STF) और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को भी तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। राजस्व विभाग और पुलिस बल के बीच इस बेहतर तालमेल का मुख्य उद्देश्य सूचना मिलने और मौके पर कार्रवाई करने के बीच के समय को न्यूनतम करना है।
माफिया की मदद या लापरवाही पर अफसरों पर होगी कार्रवाई
सरकार ने इस अभियान में केवल अवैध खेती में शामिल तत्वों या गांजा माफिया को ही निशाना नहीं बनाया है, बल्कि प्रशासनिक अमले की जवाबदेही भी तय की है। राजस्व सचिव ने चेतावनी दी है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी जानबूझकर गांजा माफिया का सहयोग करता पाया गया या उसने अवैध खेती की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई करने में ढिलाई बरती, तो उसके खिलाफ अत्यंत कठोर अनुशासनिक और कानूनी कदम उठाए जाएंगे। इन कड़े निर्देशों के लागू होने के बाद सभी 6 जिलों में सरकारी भूखंडों का सर्वेक्षण और निगरानी तंत्र सक्रिय कर दिया गया है।





















