पाकिस्तान सरकार अपने कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और गिलगित-बाल्टिस्तान के प्रशासनिक एवं संवैधानिक ढांचे में बड़े बदलाव की रूपरेखा तैयार कर रही है। इस्लामाबाद के शीर्ष सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन दोनों क्षेत्रों को अंतरिम तौर पर राज्य या प्रांत जैसा संवैधानिक दर्जा देने के प्रस्ताव पर गंभीर मंथन चल रहा है। यह कदम पाकिस्तान द्वारा प्रस्तावित बहुचर्चित 28वें संविधान संशोधन के माध्यम से उठाया जा सकता है या फिर इसके लिए एक अलग विशेष कानून संसद में लाया जा सकता है।
पाकिस्तान के 28वें संविधान संशोधन और अनुच्छेद 1(2) में बदलाव की तैयारी
वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था के तहत पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान पाकिस्तान के प्रत्यक्ष नियंत्रण में तो हैं, लेकिन देश के मूल संविधान में उन्हें पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे पूर्ण राज्यों की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। इसी वजह से इन क्षेत्रों की प्रशासनिक स्थिति बाकी पाकिस्तान से अलग बनी हुई है। पाकिस्तान के संविधान का अनुच्छेद 1(2) उन सभी क्षेत्रों की सूची निर्धारित करता है जिन्हें आधिकारिक रूप से देश का हिस्सा माना जाता है। अब सूत्रों का कहना है कि इस अनुच्छेद में बदलाव करने की संभावनाओं पर उच्च स्तरीय बातचीत चल रही है। हालांकि, अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि अनुच्छेद 1(2) में सीधे संशोधन होगा अथवा 28वें संविधान संशोधन विधेयक के जरिए यह बदलाव अमलीजामा पहनेगा।
भारत और चीन के सुधरते संबंधों पर पाकिस्तान की नजर
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पाकिस्तान केवल अपने घरेलू संवैधानिक बदलावों तक सीमित नहीं है। इस्लामाबाद की नजरें भारत और चीन के बीच जारी सीमा वार्ता और दोनों एशियाई महाशक्तियों के बीच सुधरते द्विपक्षीय संबंधों पर भी टिकी हुई हैं। जिस तरह भारत ने वर्ष 2019 में ऐतिहासिक संवैधानिक संशोधन करते हुए जम्मू और कश्मीर से धारा 370 को समाप्त कर दिया था, उसी की तर्ज पर पाकिस्तान भी अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करना चाहता है।
कश्मीर विवाद पर आधिकारिक रुख और अंतरिम राज्य का दर्जा
फिलहाल जिस नई रूपरेखा पर विचार किया जा रहा है, उसके तहत पीओके तथा गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान के अन्य राज्यों के समान अंतरिम अधिकार और पहचान प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही, पाकिस्तान सरकार कश्मीर मुद्दे पर अपने पारंपरिक और आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय रुख को भी बरकरार रखने का दावा कर रही है। इस नए कदम से पाकिस्तान अपने प्रशासनिक नियंत्रण को विधिक मजबूती देने के साथ-साथ क्षेत्रीय कूटनीतिक बदलावों का मुकाबला करने की कोशिश में है।



















