शुक्रवार के शुरुआती यूरोपीय कारोबारी सत्र में न्यूजीलैंड डॉलर और अमेरिकी डॉलर (NZD/USD) की मुद्रा जोड़ी में मजबूती देखी गई। यह जोड़ी 0.5960 के स्तर के पास कारोबार कर रही है, जबकि लाइव बाजार में इसके भाव 0.5963 तक पहुंचे हैं, जो पिछले कारोबारी दिन के बंद भाव 0.5948 के मुकाबले 0.24% की बढ़त दर्शाते हैं। रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड (RBNZ) की आगामी मौद्रिक नीति बैठक से पहले निवेशकों और व्यापारियों की सकारात्मक धारणा के कारण न्यूजीलैंड डॉलर (जिसे वित्तीय बाजारों में कीवी भी कहा जाता है) को मजबूत समर्थन मिल रहा है। यह मुद्रा जोड़ी अपने 52 हफ्तों के दायरे 0.5584 से 0.6093 के बीच बनी हुई है, जिसे तकनीकी संकेतकों और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियों से लगातार गति मिल रही है।
मौद्रिक नीति का प्रभाव: RBNZ द्वारा सितंबर में ब्याज दर बढ़ाने की प्रबल उम्मीद
न्यूजीलैंड डॉलर की हालिया तेजी के पीछे सबसे प्रमुख कारण यह है कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस बात की व्यापक सहमति बन चुकी है कि रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड 2 सितंबर को होने वाली अपनी आगामी बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा। अर्थशास्त्रियों के एक हालिया सर्वेक्षण से यह स्पष्ट हुआ है कि बाजार विशेषज्ञों को केंद्रीय बैंक द्वारा सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने की पूरी उम्मीद है।
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने जुलाई में न्यूजीलैंड के केंद्रीय बैंक ने तीन साल से अधिक समय में पहली बार आधिकारिक कैश रेट (OCR) में बढ़ोतरी की थी। इस महत्वपूर्ण फैसले के साथ ही केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट संकेत दिया था कि मध्यम अवधि में मुद्रास्फीति को 1% से 3% के लक्षित दायरे में वापस लाने और इसे 2% के मध्य बिंदु के पास स्थिर रखने के लिए आगे भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी जरूरी होगी। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जुलाई की दर वृद्धि विदेशी मुद्रा बाजार के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुई। उस फैसले के बाद व्यापारियों ने अमेरिकी डॉलर और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले न्यूजीलैंड डॉलर पर लगाई गई अपनी बिकवाली की पोजिशन (शॉर्ट पोजिशन) को तेजी से बंद करना शुरू कर दिया।
जुलाई के बाद से न्यूजीलैंड से जारी हुए आर्थिक आंकड़ों ने भी केंद्रीय बैंक के सख्त रुख का समर्थन किया है। रोजगार आंकड़े, उपभोक्ता खर्च और आर्थिक वृद्धि से जुड़े आंकड़े यह साबित करते हैं कि अर्थव्यवस्था ऊंची ब्याज दरों का दबाव झेलने में सक्षम है। चूंकि जारी आंकड़ों ने केंद्रीय बैंक के दिशा-निर्देशों से अलग कोई संकेत नहीं दिया है, इसलिए 2 सितंबर की नीतिगत बैठक में दर वृद्धि की उम्मीदें पूरी तरह से कायम हैं।
फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और अमेरिकी डॉलर की स्थिति
एक तरफ जहां न्यूजीलैंड डॉलर को अपनी घरेलू मौद्रिक नीति से बल मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी डॉलर को भी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों से मजबूती मिल रही है। फेडरल रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारी हैमॉक ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति पर अपना सख्त दृष्टिकोण व्यक्त किया। मौद्रिक नीति से जुड़े भाषणों के सूचकांक पर उनके बयान को 8/10 का स्कोर दिया गया, जो ऐतिहासिक औसत 7.5/10 से अधिक है। हैमॉक ने इस बात पर जोर दिया कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए "अब कार्रवाई करने का समय आ गया है"।
हैमॉक ने कहा कि भले ही हाल के मुद्रास्फीति आंकड़े उम्मीद के मुताबिक रहे हैं, लेकिन वर्तमान मौद्रिक नीति अभी तक इतनी सख्त नहीं हुई है कि महंगाई को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उपभोक्ताओं और व्यवसायों के बीच महंगाई की मानसिकता गहराई से घर कर गई, तो जीवन जीने की लागत लंबे समय तक ऊंची बनी रहेगी। इसलिए फेडरल रिजर्व के अधिकारियों का मानना है कि तटस्थ ब्याज दर (न्यूट्रल रेट) पहले के अनुमान से अधिक हो सकती है। यह स्थिति अमेरिका में लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रखने के पक्ष में तर्क देती है।
फेडरल रिजर्व की नीतिगत धारणा को मापने वाला सूचकांक 0.51 अंक बढ़कर 131.55 पर पहुंच गया है, जो 100 के तटस्थ स्तर से काफी ऊपर है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि फेडरल रिजर्व का यह रुख अमेरिकी डॉलर को मजबूती प्रदान कर रहा है, जिससे न्यूजीलैंड डॉलर जैसी उच्च प्रतिफल वाली मुद्राओं के साथ इसका संतुलन बना हुआ है।
तकनीकी विश्लेषण: मूविंग एवरेज और आरएसआई के संकेत
डेली चार्ट पर NZD/USD का तकनीकी ढांचा खरीदारों के पक्ष में दिखाई दे रहा है। यह मुद्रा जोड़ी अपने 20-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) और 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज के ऊपर मजबूती से टिकी हुई है। इसके अलावा, कीमत बोलिंजर बैंड के ऊपरी हिस्से में बनी हुई है, जो बाजार में खरीदारी के बने रहने और तेजी के रुझान का संकेत देती है।
मोमेंटम सूचकांक भी इस सकारात्मक दृष्टिकोण की पुष्टि करते हैं। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 63 के स्तर पर है। आरएसआई का 63 पर होना यह दर्शाता है कि बाजार में तेजी की गति बनी हुई है, लेकिन अभी यह ओवरबॉट्स स्थिति (जो 70 से ऊपर मानी जाती है) में नहीं पहुंचा है। इसका मतलब है कि जब तक कीमत प्रमुख मूविंग एवरेज सपोर्ट से ऊपर बनी रहती है, तब तक इसमें और बढ़ोतरी की गुंजाइश है।
लाइव तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 0.5862 पर है और यह 200-दिवसीय EMA (0.5832) के ऊपर बना हुआ है, जो एक गोल्डन क्रॉस संरचना को दर्शाता है। इसके साथ ही 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 0.5845 और 50-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 0.5812 पर है। 14-दिवसीय एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) 25 पर है, जो बाजार में स्पष्ट ट्रेंड की मौजूदगी दिखाता है, जबकि स्टोकेस्टिक इंडिकेटर 84 के स्तर पर मजबूत खरीदारी का संकेत दे रहा है।
व्यापारियों के लिए प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर
NZD/USD में कारोबार करने वाले निवेशक तकनीकी स्तरों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। नीचे की ओर, पहला मुख्य सपोर्ट बोलिंजर बैंड के मध्य स्तर 0.5910 के पास है, जो 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (0.5909) के बेहद करीब है। यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है और कीमत इससे नीचे आती है, तो अगला सपोर्ट 100-दिवसीय मूविंग एवरेज (0.5845) और निचले बोलिंजर बैंड (0.5830) के पास मिलेगा। विश्लेषकों का मानना है कि इन निचले स्तरों पर खरीदार दोबारा सक्रिय हो सकते हैं।
ऊपर की ओर, पहला बड़ा रेजिस्टेंस बोलिंजर बैंड के ऊपरी सिरे 0.5990 के पास है। यह 0.5990 से 0.6000 का एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक रेजिस्टेंस क्षेत्र बनाता है। यदि डेली चार्ट पर कीमत 0.6000 के ऊपर बंद होने में सफल रहती है, तो तेजी का दायरा और बढ़ सकता है। हालांकि, यदि कीमत इस रेजिस्टेंस को पार करने में विफल रहती है, तो बाजार में कुछ समय के लिए स्थिरता देखी जा सकती है या कीमत वापस 0.5910 के सपोर्ट स्तर तक आ सकती है।
इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए दैनिक पीवॉट पॉइंट 0.5960 पर स्थित है। रेजिस्टेंस के स्तर 0.5970 (R1) और 0.5976 (R2) पर हैं, जबकि सपोर्ट के स्तर 0.5954 (S1) और 0.5944 (S2) पर स्थित हैं। व्यापारी जोखिम प्रबंधन के लिए इन स्तरों का उपयोग कर सकते हैं।
न्यूजीलैंड डॉलर को प्रभावित करने वाले मुख्य आर्थिक कारक
केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों के अलावा, कई मूलभूत कारक न्यूजीलैंड डॉलर के मूल्य को निर्धारित करते हैं। चीन की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि चीन न्यूजीलैंड का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। चीन में आर्थिक गतिविधियों में सुधार होने से न्यूजीलैंड के निर्यात की मांग बढ़ती है, जिससे न्यूजीलैंड डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती से न्यूजीलैंड के निर्यात पर असर पड़ता है और उसकी मुद्रा कमजोर होती है।
दूसरा प्रमुख कारक डेयरी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय कीमतें हैं। डेयरी उद्योग न्यूजीलैंड के कुल निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा है। जब वैश्विक बाजार में डेयरी उत्पादों की कीमतें बढ़ती हैं, तो न्यूजीलैंड की निर्यात आय में इजाफा होता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और उसकी मुद्रा दोनों को मजबूती मिलती है।
इसके अलावा, वैश्विक बाजार की जोखिम धारणा (रिस्क सेंटिमेंट) भी न्यूजीलैंड डॉलर पर असर डालती है। न्यूजीलैंड डॉलर को जोखिम वाली संपत्तियों (कमोडिटी करेंसी) की श्रेणी में रखा जाता है। जब वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल होता है, तो निवेशक ऐसी मुद्राओं में निवेश करना पसंद करते हैं। लेकिन जब अनिश्चितता या तनाव बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित संपत्तियों (जैसे अमेरिकी डॉलर) की ओर रुख करते हैं, जिससे न्यूजीलैंड डॉलर में गिरावट आती है।
वैश्विक फॉरेक्स बाजार का परिदृश्य: GBP/USD, EUR/USD और जैक्सन होल सम्मेलन
NZD/USD में यह हलचल ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया के अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ों में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं। दो दिनों की गिरावट के बाद GBP/USD संभलता हुआ 1.3600 के पास कारोबार कर रहा है। हालांकि, ब्रांड कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी के कारण ब्रिटेन में महंगाई की चिंताएं थोड़ी कम हुई हैं, जिसके चलते वित्तीय बाजारों ने बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा अगली दर वृद्धि के अनुमान को 2026 के अंत से खिसकाकर 2027 की शुरुआत कर दिया है।
वहीं दूसरी ओर, EUR/USD मामूली बढ़त के साथ 1.1650 के स्तर के पास कारोबार कर रहा है। यूरोपियन सेंट्रल बैंक के सख्त नीतिगत रुख के कारण यूरो को समर्थन मिल रहा है, जिससे यूरोपीय ब्याज दरों के ऊंचे बने रहने की संभावना है।
इसके साथ ही, वैश्विक वित्तीय बाजारों की निगाहें आगामी जैक्सन होल सम्मेलन पर टिकी हुई हैं। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष के रूप में केविन वॉर्श 27 से 29 अगस्त तक आयोजित होने वाले इस वार्षिक सम्मेलन में अपना पहला संबोधन देने की तैयारी कर रहे हैं। इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य विषय "वित्तीय नवाचार: भुगतान और नीति के निहितार्थ" रखा गया है, जिसमें केंद्रीय बैंक की भावी नीतियों और वैश्विक तरलता पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है।



















