700 नौकरियां अपने क्षेत्र में बंटवाने के दावे पर हर्षवर्धन चौहान विवादों में, भाजपा ने जांच की उठाई मांगराजनीति
2 घंटे पहले· 0

700 नौकरियां अपने क्षेत्र में बंटवाने के दावे पर हर्षवर्धन चौहान विवादों में, भाजपा ने जांच की उठाई मांग

हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के अपने क्षेत्र के 700 लोगों को नौकरी दिलाने वाले बयान पर भाजपा ने बैकडोर भर्ती का आरोप लगाकर जांच की मांग की, जबकि मंत्री ने सभी नियुक्तियां तय प्रक्रिया से होने की बात कही.

हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान का एक बयान अब सूबे की सियासत में तूफान खड़ा कर चुका है. मंत्री ने खुद स्वीकार किया कि उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के करीब 700 लोगों को सिफारिश के आधार पर नौकरी दिलवाई है. यह बयान वायरल होते ही भाजपा ने इसे बैकडोर भर्ती करार दे दिया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर डाली. दूसरी ओर मंत्री खुद इस पूरे विवाद पर बेहद सहज नजर आए और उन्होंने साफ कहा कि इसमें गलत क्या है, बल्कि इसके लिए तो भाजपा नेताओं को उन्हें बधाई देनी चाहिए.

क्या है पूरा विवाद

दरअसल हर्षवर्धन चौहान के एक बयान का वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के करीब 700 लोगों को नौकरी दिलाने का जिक्र किया. यह वीडियो सामने आते ही विपक्षी भाजपा ने इसे लपक लिया और सरकार पर सीधा हमला बोल दिया. भाजपा का कहना है कि अगर कोई मंत्री खुले मंच से यह दावा कर रहा है कि उसने अपने क्षेत्र के सैकड़ों लोगों को नौकरी दिलाई, तो यह भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है. इसी को आधार बनाकर भाजपा ने इसे बैकडोर भर्ती की संज्ञा दी है.

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मंत्री की सफाई, आउटसोर्स भर्ती में इंटरव्यू नहीं होता

विवाद बढ़ता देख उद्योग मंत्री ने खुद सामने आकर पूरी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि जिन नियुक्तियों की बात हो रही है, वे सब आउटसोर्स व्यवस्था के तहत हुई हैं और इस व्यवस्था में इंटरव्यू जैसी कोई प्रक्रिया होती ही नहीं है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह व्यवस्था नई नहीं है, बल्कि इससे पहले की भाजपा सरकार के दौरान भी इसी तरह से आउटसोर्स के जरिए भर्तियां होती रही हैं. उनके मुताबिक, भाजपा शासन में भी मंत्रियों ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों के युवाओं को आउटसोर्स व्यवस्था के माध्यम से रोजगार दिलाया था. मंत्री ने सवाल किया कि जब यही तरीका पहले भी अपनाया जाता रहा है, तो अब उन पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं. उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर पूर्व की भाजपा सरकार के मंत्री और विधायक अपने-अपने क्षेत्र के लोगों को इस तरह नौकरियां नहीं दिलवा पाए, तो यह उनकी अपनी नाकामी मानी जानी चाहिए, न कि किसी और की गलती.

क्षेत्र में कहां-कितनी नियुक्तियां हुईं

हर्षवर्धन चौहान ने यह भी बताया कि उनका विधानसभा क्षेत्र बड़े पैमाने पर पिछड़े और दुर्गम इलाकों से घिरा है, जहां लंबे समय से कई सरकारी पद खाली पड़े रहते हैं. उन्होंने कहा कि इसी वजह से उनके क्षेत्र में आउटसोर्स के माध्यम से अपेक्षाकृत ज्यादा नियुक्तियां हुई हैं. आंकड़े गिनाते हुए मंत्री ने बताया कि उनके क्षेत्र के स्कूलों में करीब 85 नियुक्तियां हुई हैं, जबकि जल शक्ति विभाग में लगभग 67 लोगों को आउटसोर्स के जरिए रोजगार मिला है. इसके अलावा योगा इंस्ट्रक्टर, आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी और कुछ अन्य विभागों में भी आउटसोर्स के तहत नियुक्तियां की गई हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि आउटसोर्स के सभी पद कैबिनेट की मंजूरी और तय प्रक्रिया के तहत ही भरे जाते हैं, इसमें किसी तरह की मनमानी की गुंजाइश नहीं है.

'मेरे क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिला, यह गर्व की बात'

उद्योग मंत्री ने कहा कि अगर उनके विधानसभा क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिला है तो यह उनके लिए गर्व और खुशी की बात है. उन्होंने साफ-साफ कहा कि आगे भी अगर उनके क्षेत्र में आउटसोर्स के पद निकलेंगे, तो वह अपने विधानसभा क्षेत्र के युवाओं को रोजगार दिलाने की पूरी कोशिश करेंगे. मंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने उन्हें चुनकर विधानसभा भेजा है, उनके प्रति उनकी जवाबदेही बनती है, और अगर इसी जवाबदेही के तहत उनके क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिलता है तो इसमें गलत कुछ भी नहीं है. उन्होंने भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि अगर भाजपा नेता अपनी सरकार के दौरान अपने-अपने क्षेत्रों के युवाओं को आउटसोर्स के जरिए रोजगार नहीं दिला पाए, तो यह उनकी खुद की विफलता है. मंत्री ने यह भी कहा कि भाजपा को आरोप लगाने के बजाय उन्हें इस बात के लिए बधाई देनी चाहिए कि उन्होंने पिछड़े और दूरदराज क्षेत्रों के करीब 700 युवाओं को रोजगार दिलाने में मदद की है.

भाजपा का पलटवार, निष्पक्ष जांच की मांग

मंत्री के इस बयान पर भाजपा ने पलटवार करते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं. पूर्व उद्योग मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ विधायक बिक्रम ठाकुर ने कहा कि अगर कोई मंत्री सार्वजनिक मंच से यह दावा कर रहा है कि उसने अपने क्षेत्र के 700 लोगों को नौकरी दिलाई है, तो यह बेहद गंभीर मामला बन जाता है. बिक्रम ठाकुर ने आरोप लगाया कि अगर ये नियुक्तियां किसी मंत्री की सिफारिश या उसके प्रभाव के आधार पर हुई हैं, तो यह बैकडोर भर्ती का मामला माना जाएगा. उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए, ताकि यह साफ हो सके कि नियुक्तियां वाकई तय प्रक्रिया से हुई हैं या किसी सिफारिश के आधार पर.

सवाल-जवाब

हर्षवर्धन चौहान कौन हैं?
वे हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री हैं, जिनके बयान से यह पूरा विवाद शुरू हुआ.
विवाद किस बात को लेकर है?
मंत्री ने कहा था कि उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के करीब 700 लोगों को सिफारिश के आधार पर नौकरी दिलाई है, जिसके बाद यह बयान वायरल हो गया.
मंत्री ने अपनी सफाई में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि सभी नियुक्तियां आउटसोर्स व्यवस्था के तहत तय प्रक्रिया और कैबिनेट की मंजूरी से हुई हैं और इसमें इंटरव्यू जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती.
भाजपा का आरोप क्या है?
भाजपा ने इसे बैकडोर भर्ती करार दिया है और पूरे मामले की निष्पक्ष व पारदर्शी जांच की मांग की है.
जांच की मांग किसने की?
पूर्व उद्योग मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ विधायक बिक्रम ठाकुर ने सरकार से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.
मंत्री के क्षेत्र में किन-किन विभागों में कितनी नियुक्तियां हुईं?
स्कूलों में करीब 85 और जल शक्ति विभाग में करीब 67 नियुक्तियां हुईं, इसके अलावा योगा इंस्ट्रक्टर व आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी में भी आउटसोर्स के जरिए नियुक्तियां हुई हैं.
मंत्री ने भविष्य को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि आगे भी अगर उनके क्षेत्र में आउटसोर्स के पद निकलेंगे तो वे अपने क्षेत्र के युवाओं को रोजगार दिलाने की कोशिश करते रहेंगे.
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