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राजस्थान में भजनलाल सरकार की बढ़ी मुश्किलें, एक के बाद एक विवादों में घिरी प्रशासन की कार्यप्रणालीराजनीति
13 जुल॰ 2026, 3:01 pm (106 दिन पहले)· 1

राजस्थान में भजनलाल सरकार की बढ़ी मुश्किलें, एक के बाद एक विवादों में घिरी प्रशासन की कार्यप्रणाली

राजस्थान की भजनलाल सरकार इन दिनों स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों से बुरी तरह घिर गई है। प्रसूताओं की मौतों से लेकर पेपर लीक माफिया के साथ जुड़ाव के विवाद तक, सरकार के लिए चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं।

राजस्थान की बीजेपी सरकार, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा कर रहे हैं, इन दिनों चौतरफा मुश्किलों का सामना कर रही है। पिछले कुछ समय में प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर एक के बाद एक कई गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं से लेकर कानून-व्यवस्था और सरकारी फैसलों तक, हर मोर्चे पर सरकार को आलोचना का शिकार होना पड़ रहा है। कोटा, बीकानेर, जोधपुर के बाद अब भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में प्रसूताओं की लगातार मौतों ने चिकित्सा तंत्र की पोल खोलकर रख दी है। इसके अतिरिक्त, जयपुर की नीरजा मोदी स्कूल की छात्रा अमायरा की मौत का मामला हो, या फिर पेपर लीक मामले के फरार आरोपी सुरेश ढाका के पिता को ब्यावर में 20 करोड़ रुपये का बजरी खनन ठेका आवंटित करना, इन घटनाओं ने विपक्ष को सरकार के खिलाफ आक्रामक होने का मौका दे दिया है।

सरकार के शुरुआती ढाई साल और सक्रियता

भजनलाल शर्मा की सरकार का लगभग आधा कार्यकाल अब बीत चुका है। शुरुआती समय में इस सरकार ने बहुत तेज़ी से काम किया था। जब यह सरकार सत्ता में आई, तब इसके एजेंडे में पेपर लीक माफिया के खिलाफ कार्रवाई और महिला सुरक्षा, विशेषकर दुष्कर्म की घटनाओं को नियंत्रित करना सबसे बड़ी प्राथमिकताएं थीं। उस समय सरकार ने इन मुद्दों पर कांग्रेस को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया था। सरकार ने आते ही पेपर लीक मामलों की जांच के लिए स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया और अपराधियों पर कड़ा रुख अपनाया। इसके अलावा, सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने और अपराधियों के ठिकानों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई ने एक मजबूत छवि बनाने की कोशिश की थी।

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प्रोजेक्ट्स और विकास के दावे

इन विवादों से पहले सरकार ने कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर काफी सुर्खियां बटोरी थीं। पूर्वी राजस्थान के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ERCP) को संशोधित रूप देकर पार्वती-कालसिंध-चंबल पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (PKC-ERCP) के तहत मध्य प्रदेश के साथ एमओयू करना सरकार की एक बड़ी उपलब्धि माना गया। इसे 'राम जल सेतु लिंक परियोजना' का नाम दिया गया। साथ ही, वर्षों से लंबित 'यमुना जल समझौते' को अंतिम रूप देकर हरियाणा सरकार के साथ एमओयू करना भी शेखावाटी के लिए एक बड़ी राहत माना गया। इन सब के बावजूद, बीते डेढ़ महीने से राजनीतिक और प्रशासनिक हवा का रुख पूरी तरह बदल गया है।

स्वास्थ्य विभाग और प्रसूताओं की मौत का संकट

वर्तमान में भजनलाल सरकार के लिए सबसे बड़ी मुसीबत स्वास्थ्य विभाग की असफलताएं बनी हुई हैं। प्रसूताओं की मौत के मामले किसी गले की फांस से कम नहीं हैं। कोटा से शुरू होकर बीकानेर और जोधपुर तक फैली यह स्थिति तब और गंभीर हो गई, जब भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में भी ऐसी दुखद घटनाएं हुईं। इन मामलों ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर कई सवाल खड़े किए हैं। चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींमसर का इस पर बयान कि 'पता नहीं मौतें कैसे हो रही हैं', स्थिति को और अधिक भड़काऊ बनाने वाला रहा। अब प्रसूताओं को दिए जाने वाले इंजेक्शनों और दवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी गहरा संदेह पैदा हो गया है, जिसने सरकार के प्रति लोगों का अविश्वास बढ़ा दिया है।

पेपर लीक माफिया और विवादित ठेके

सरकार के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका पेपर लीक माफिया के मामले में लगा है। टीचर भर्ती और एसआई भर्ती समेत 10 से अधिक पेपर लीक करने वाला मोस्ट वांटेड सुरेश ढाका, जिस पर पांच लाख का इनाम है, उसके पिता को बजरी खनन का ठेका मिलना सरकार की कार्यप्रणाली पर सीधे तौर पर सवाल उठाता है। यह मामला सामने आने के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है। हालांकि गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने खुद इस पर सवाल उठाकर सरकार की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।

राजनीतिक घेराबंदी और अन्य मुद्दे

इन सब के बीच कांग्रेस ने सरकार को पंचायत चुनाव में देरी और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के मुद्दे पर घेर रखा है। सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी दी है। नीट पेपर लीक और छात्रों द्वारा आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं भी सरकार के लिए गले का कांटा बनी हैं। इसके साथ ही जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल की छात्रा अमायरा की मौत के मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद पुलिस जांच पर जो सवाल उठे हैं, उसने सरकार की साख को और नुकसान पहुंचाया है। वंशिका की मौत का मामला भी अब चर्चा में है, जिससे सरकार के सामने कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चुनौतियां उत्पन्न हो गई हैं।

सवाल-जवाब

भजनलाल सरकार किन प्रमुख मामलों को लेकर घिरी हुई है?
सरकार प्रसूताओं की मौतों, पेपर लीक माफिया सुरेश ढाका के पिता को मिले ठेके, और छात्रों की आत्महत्या जैसे मामलों के कारण घिरी हुई है।
प्रसूताओं की मौत का मामला किन जिलों से जुड़ा है?
यह मामला कोटा, बीकानेर, जोधपुर, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जिलों से संबंधित है।
पेपर लीक माफिया सुरेश ढाका के मामले में क्या विवाद है?
विवाद यह है कि पांच लाख के इनामी अपराधी सुरेश ढाका के पिता को ब्यावर में 20 करोड़ रुपये का बजरी खनन ठेका दिया गया है।
क्या सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कुछ किया है?
सरकार ने सत्ता में आते ही पेपर लीक मामलों की जांच के लिए स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया था।
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