तमिलनाडु में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने रविवार को एक शादी समारोह के मंच से साफ कर दिया कि द्रविड़ मुनेत्र कझगम अल्पसंख्यक समुदायों के साथ अपने रिश्ते में कोई समझौता नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी बांटने वाली राजनीति के आगे कभी नहीं झुकेगी और इन समुदायों के अधिकारों तथा हितों की रक्षा के लिए डटी रहेगी. उनके मुताबिक डीएमके और अल्पसंख्यकों के बीच बना भरोसा इतना गहरा है कि राजनीतिक फायदे के लिए चलाए गए किसी भी अभियान से उसमें दरार नहीं आ सकती.
भरोसे की सियासत, डीएमके का दावा
थिरुवेरकाडु में डीएमके मुख्यालय के सचिव थुरईमुगम काजा की पोती की शादी रिसेप्शन में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि पार्टी शुरू से अल्पसंख्यक समुदायों के साथ खड़ी रही है और आगे भी यही रुख बनाए रखेगी. उन्होंने दोहराया कि डीएमके की धर्मनिरपेक्ष सोच और सबको साथ लेकर चलने का नजरिया उसकी राजनीति का सबसे बड़ा आधार है, और यही वजह है कि पार्टी हर दौर में इस लाइन पर टिकी रही.
कुर्सी के लालच में साथ छोड़ने वालों पर निशाना
बिना किसी का सीधा नाम लिए उदयनिधि स्टालिन ने अपने पूर्व सहयोगियों की तरफ इशारा करते हुए तीखी बात कही कि कुछ लोग सत्ता में हिस्सेदारी मिलते ही डीएमके का साथ छोड़कर चले गए. लेकिन उन्होंने साफ किया कि पार्टी के वफादार कार्यकर्ता और अल्पसंख्यक समुदायों के लोग हर मुश्किल राजनीतिक दौर में डीएमके के साथ मजबूती से खड़े रहे. उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों का यह अटूट साथ पार्टी और लोगों के बीच बरसों पुराने और मजबूत रिश्ते का सबूत है. उन्होंने राजनीतिक विरोधियों पर भी सीधा आरोप लगाया कि वे गलत जानकारी फैलाकर समाज में बंटवारा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनका कहना था कि ऐसी कोशिशें कभी कामयाब नहीं होंगी. उदयनिधि स्टालिन के शब्दों में, कोई कितनी भी बदनामी फैलाए या अलग करने की कोशिश करे, डीएमके हमेशा अल्पसंख्यकों और मुस्लिम समुदाय के लिए एक सुरक्षा कवच बनकर खड़ी रहेगी.
पिता की जगह मंच पर, स्टालिन को लेकर भरोसा
उदयनिधि स्टालिन ने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन हमेशा लोगों के साथ खड़े रहेंगे, तमिलनाडु के हितों की हिफाजत करेंगे और हर मुश्किल घड़ी में मजबूत नेतृत्व देंगे. उन्होंने मेहमानों को बताया कि वे इस शादी समारोह में असल में अपने पिता एमके स्टालिन का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, क्योंकि मूल रूप से इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले एमके स्टालिन खुद नहीं आ सके.
सीमन को खुद अंदर लेकर गए उदयनिधि, दिखी सियासी सौहार्द
इसी शादी समारोह में राजनीतिक सौहार्द की एक दुर्लभ झलक भी देखने को मिली. उदयनिधि स्टालिन खुद नाम तमिलर काची यानी एनटीके के मुख्य समन्वयक सीमन को लेकर अंदर तक पहुंचे. सीमन भी इस शादी में मेहमान के तौर पर मौजूद थे. यह वाकया दिखाता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत रिश्तों में गर्मजोशी बनी रह सकती है.
1989 के चुनाव की वह पुरानी कहानी
थुरईमुगम काजा के डीएमके से जुड़े लंबे रिश्ते को याद करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने 1989 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का एक पुराना किस्सा भी सुनाया. उस समय काजा एआईएडीएमके के उम्मीदवार थे और हार्बर सीट से डीएमके के दिवंगत नेता एम. करुणानिधि के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे थे. दिलचस्प बात यह रही कि वोटों की गिनती पूरी होने से पहले ही काजा ने खुद करुणानिधि के पास जाकर उन्हें माला पहनाई और बधाई दी थी. यह वाकया दिखाता है कि चुनावी मुकाबले में एक दूसरे के खिलाफ होने के बावजूद उस दौर में कैसी राजनीतिक शिष्टाचार निभाई जाती थी. उदयनिधि स्टालिन ने बताया कि इसके बाद काजा डीएमके में शामिल हो गए और पार्टी के सबसे समर्पित कार्यकर्ताओं में गिने जाने लगे.
अन्ना अरिवलयम के दो स्तंभ
उदयनिधि स्टालिन ने यह भी बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अक्सर काजा और पार्टी के वरिष्ठ नेता पूची एस. मुरुगन को डीएमके मुख्यालय अन्ना अरिवलयम के दो स्तंभ बताते हैं. यह पार्टी के प्रति दोनों नेताओं की बरसों की अटूट सेवा को सम्मान देने का उनका तरीका है. इस शादी समारोह में डीएमके के कई वरिष्ठ नेता, पार्टी कार्यकर्ता और मुस्लिम समुदाय के बड़ी तादाद में लोग शामिल हुए. इस मौके ने उदयनिधि स्टालिन को एक बार फिर अल्पसंख्यक कल्याण के प्रति डीएमके सरकार की प्रतिबद्धता और तमिलनाडु में समावेशी तथा धर्मनिरपेक्ष शासन बनाए रखने के अपने वादे को दोहराने का अवसर दिया.











