तृणमूल कांग्रेस के भीतर मची उथल-पुथल को लेकर संसद के मानसून सत्र से पहले पार्टी सांसद सौगत रॉय ने खुलकर अपनी बात रखी है। पार्टी के कई नेता नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई में शामिल हो चुके हैं और इसी मुद्दे पर मानसून सत्र के दौरान संसद में चर्चा की मांग उठ रही थी। सौगत रॉय ने इस मांग को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह कोई ऐसा विषय नहीं है, जिस पर सदन में बहस होनी चाहिए।
एनसीपीआई में गए नेताओं पर याचिका, फैसला अब स्पीकर के हाथ
सौगत रॉय ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस पहले ही एनसीपीआई में शामिल होने वाले अपने नेताओं के खिलाफ अयोग्यता की याचिकाएं दाखिल कर चुकी है और अब यह मामला पूरी तरह लोकसभा स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में है। पार्टी के 28 में से 20 सांसदों के एनसीपीआई में जाकर एक अलग गुट बना लेने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसमें तृणमूल कांग्रेस की कोई भूमिका नहीं बचती, क्योंकि दल-बदल विरोधी कानून के तहत जो भी कार्रवाई होनी है, वह स्पीकर की शक्तियों के दायरे में ही होगी। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी ने अयोग्यता याचिका के अलावा स्पीकर को एक और अलग याचिका सौंपी है, ताकि पूरा मामला उनके संज्ञान में रहे। अब आगे क्या कदम उठाया जाएगा, यह पूरी तरह स्पीकर के फैसले पर निर्भर करता है।
मानसून सत्र में भाजपा को घेरने की रणनीति साफ
सौगत रॉय ने संकेत दिया कि तृणमूल कांग्रेस का पूरा ध्यान पार्टी के भीतर की टूट पर बहस कराने की बजाय संसद में भाजपा सरकार को घेरने पर रहेगा। उन्होंने कहा कि सदन में यह देखा जाएगा कि भाजपा के खिलाफ अपनी बात किस तरह मजबूती से रखी जाए। इसके साथ ही पार्टी नीट परीक्षा से जुड़े विवाद और अयोध्या के राम मंदिर के लिए जुटाए गए चंदे से जुड़े आरोपों को भी सदन में प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है।
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक से पहले चंपत राय के करीबियों पर सवाल
6 जुलाई को होने वाली राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक से पहले सौगत रॉय ने चंदे में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए मिले फंड का गलत इस्तेमाल करने के आरोपी भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोग हैं। उनके मुताबिक जिन पर आरोप लगे हैं, वे राम मंदिर ट्रस्ट के सचिव रहे चंपत राय के करीबी सहयोगी हैं और खुद चंपत राय पर भी आरोप लगे हैं। सौगत रॉय ने कहा कि उन्हें शक है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो पाएगी या नहीं, इसलिए पार्टी की मांग है कि या तो सीबीआई जांच कराई जाए या फिर न्यायिक जांच बिठाई जाए।
ममता बनर्जी के बयान पर पलटवार, बगावत नहीं बल्कि धोखा
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस बयान पर कि जिन्हें पार्टी से सब कुछ मिला, वही अब बगावत कर रहे हैं, सौगत रॉय ने अपनी राय अलग रखी। उन्होंने कहा कि जो हो रहा है, उसे बगावत नहीं कहा जा सकता, क्योंकि बगावत एक बहुत बड़ा शब्द है और यह क्रांतिकारियों से जुड़ा होता है। सौगत रॉय के मुताबिक यह असल में धोखे का काम है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को पार्टी से सबसे ज्यादा मिला, फिरहाद हकीम से लेकर चंद्रिमा भट्टाचार्य तक, वही लोग अब पार्टी छोड़कर जा रहे हैं और यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
चंद्रिमा भट्टाचार्य के जाने की वजह, लालच और डर
चंद्रिमा भट्टाचार्य के तृणमूल कांग्रेस छोड़ने पर सौगत रॉय ने कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ रहे हैं, वे मुख्य रूप से दो चीजों, लालच और डर से प्रेरित हैं। उन्होंने बताया कि ममता बनर्जी पहले ही कह चुकी हैं कि इससे पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। सौगत रॉय ने याद दिलाया कि चंद्रिमा भट्टाचार्य एक बार विधानसभा चुनाव हार चुकी थीं, इसके बाद ममता बनर्जी ने उन्हें दूसरी सीट से चुनाव लड़ने का मौका दिया, जहां से वह जीतीं। उनके मुताबिक ममता बनर्जी से इतना कुछ पाने के बावजूद चंद्रिमा भट्टाचार्य का पार्टी के साथ धोखा करना उनके अपने सिद्धांतों को उजागर करता है। सौगत रॉय ने कहा कि इससे पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।
जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में महाभियोग प्रक्रिया पर रुख
मानसून सत्र के दौरान जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच रिपोर्ट पेश किए जाने से जुड़े सवाल पर सौगत रॉय ने कहा कि इसमें भ्रष्टाचार के आरोप हैं और यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर स्पीकर यह रिपोर्ट सदन में पेश करते हैं, तो सभी सदस्य उस पर वोट करेंगे। सौगत रॉय की राय में इस पूरी प्रक्रिया के बाद महाभियोग की कार्रवाई पूरी हो जाएगी।













