बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। जन सुराज पार्टी ने पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए पार्टी संस्थापक प्रशांत किशोर को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। बांकीपुर में यह उपचुनाव 30 जुलाई को होना है और अब सारी निगाहें इसी सीट पर टिक गई हैं।
बांकीपुर में उपचुनाव की नौबत क्यों आई
बांकीपुर सीट पर उपचुनाव कराने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने यह सीट छोड़कर राज्यसभा का रुख कर लिया था। सीट खाली होते ही यह तय हो गया था कि यहां जल्द ही उपचुनाव कराया जाएगा। जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती पहले ही साफ कर चुके थे कि उपचुनाव में अब गिनती के दिन बचे हैं और पार्टी इस मुकाबले में किसी मजबूत चेहरे को उतारेगी। उन्होंने बताया था कि प्रत्याशी को लेकर अंतिम फैसला 5 जुलाई को लिया जाएगा। मनोज भारती ने यह भी कहा था कि पिछले एक महीने से पार्टी के कार्यकर्ता बांकीपुर में लगातार जनता से बात कर रहे हैं और इस दौरान जो प्रतिक्रिया मिली है, उससे साफ लगता है कि इलाके में हर तबका बीजेपी सरकार से नाराज है।
पहली बार खुद मैदान में उतरेंगे प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर का बांकीपुर से चुनाव लड़ना इस लिहाज से बड़ी खबर है क्योंकि हाल में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उनके लिए दो सीटें चुनी गई थीं, लेकिन आखिरी वक्त पर उन्होंने खुद चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था और सिर्फ पार्टी के प्रचार अभियान पर ध्यान लगाया था। बांकीपुर उपचुनाव प्रशांत किशोर के राजनीतिक जीवन का पहला विधानसभा चुनाव होगा। इससे पहले वह बिहार के कोने कोने में यात्रा करके जन सुराज पार्टी को खड़ा करने में जुटे रहे हैं, लेकिन खुद चुनावी मैदान में कभी नहीं उतरे। अब बांकीपुर की जनता प्रशांत किशोर को अपना विधायक चुनती है या नहीं, इसका फैसला उपचुनाव के नतीजों से ही होगा।
बीजेपी के गढ़ में प्रशांत किशोर की असली परीक्षा
बांकीपुर सीट को बीजेपी का मजबूत किला माना जाता रहा है। इस सीट पर बीजेपी लगातार पांच बार जीत दर्ज कर चुकी है, यही वजह है कि इसे पार्टी का गढ़ कहा जाता है। ऐसे में इस उपचुनाव के नतीजे बेहद दिलचस्प होने वाले हैं। अगर बीजेपी यह सीट फिर जीत लेती है तो वह अपने गढ़ को बचाने में कामयाब मानी जाएगी, लेकिन अगर जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर यहां से जीत हासिल करते हैं तो यह उनके और उनकी पार्टी के लिए ऐतिहासिक पल होगा। दरअसल हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी, ऐसे में प्रशांत किशोर की जीत पार्टी के लिए विधानसभा में खाता खोलने वाली पहली जीत साबित होगी।













